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‘दबाव नहीं डाला…’, DGCA ने VIP फ्लाइट के लिए जारी किया सख्त नियम, जानें क्या हुआ बदलाव?

DGCA VIP Flight New Rules 2026: नागरिक उड्डयन महानिदेशालय ने जरूरी गाइडलाइंस शेयर की है, जिसमें अगर हालात सुरक्षित नहीं हैं, तो पायलट बड़े अधिकारियों को ले जा रही उड़ानों में देरी कर सकते हैं, उनका रास्ता बदल सकते हैं या उन्हें रद्द भी कर सकते हैं. साथ ही, उन्हें VIP यात्रियों या उनके स्टाफ़ के किसी भी दबाव से पूरी तरह सुरक्षित रखा जाएगा.

DGCA VIP Flight Guidelines: एक नए आदेश में, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने साफ कर दिया है कि अगर हालात सुरक्षित नहीं हैं, तो पायलट बड़े अधिकारियों को ले जा रही उड़ानों में देरी कर सकते हैं, उनका रास्ता बदल सकते हैं या उन्हें रद्द भी कर सकते हैं. साथ ही, उन्हें VIP यात्रियों या उनके स्टाफ़ के किसी भी दबाव से पूरी तरह सुरक्षित रखा जाएगा.
पायलट का फ़ैसला ही आख़िरी होगा; अब कोई भी VVIP सुरक्षा से जुड़े फ़ैसलों को नहीं बदल सकता. भारत के एविएशन रेगुलेटर ने VIP उड़ानों के लिए नियम और सख़्त कर दिए हैं, जिसमें क्रू की आज़ादी और बिना किसी जोखिम के ऑपरेशन पर ख़ास ज़ोर दिया गया है.

DGCA द्वारा जारी गाइडलाइंस में क्या कहा है?

DGCA द्वारा जारी गाइडलाइंस में कहा गया है कि फ़्लाइट क्रू पर ऐसी उड़ान भरने के लिए कोई बेवजह का दबाव नहीं डाला जाएगा, जिससे ऑपरेशन की सुरक्षा पर असर पड़े. इसमें यह भी जोड़ा गया है कि VIPs द्वारा आख़िरी समय में किए जाने वाले किसी भी बदलाव को ऑर्गनाइज़ेशन के मैनेजमेंट के ज़रिए ही किया जाना चाहिए, न कि सीधे क्रू पर थोपा जाना चाहिए.
यह कदम VIP और चुनावी उड़ानों में सुरक्षा में चूक को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच उठाया गया है. ख़ास तौर पर इस जनवरी में महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री अजित पवार और चार अन्य लोगों की एक विमान दुर्घटना में मौत के बाद, रेगुलेटर ने पिछली घटनाओं में बार-बार नियमों के उल्लंघन की बात कही थी. इसी के चलते, केंद्र, राज्य और अन्य बड़े अधिकारियों को विमान से ले जाने के लिए नई गाइडलाइंस जारी की गई हैं.

किन पर लागू होते हैं ये नियम?

ये नए नियम कई तरह के बड़े अधिकारियों पर लागू होते हैं, जिनमें Z+ श्रेणी की SPG सुरक्षा वाले लोग, लोकसभा अध्यक्ष, राज्यसभा के उप-सभापति, केंद्रीय कैबिनेट मंत्री, भारत के मुख्य न्यायाधीश, राज्यपाल और मुख्यमंत्री आदि शामिल हैं. यह देखते हुए कि बड़े अधिकारी अक्सर छोटे विमानों और हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल करते हैं, ख़ास तौर पर चुनावी अभियानों के दौरान, DGCA ने कहा कि अस्थायी हवाई पट्टियों और हेलीपैड पर होने वाले ऑपरेशन से अक्सर सुरक्षा से समझौता हुआ है. आदेश में कहा गया है कि पहले हुई दुर्घटनाओं के विश्लेषण से अक्सर निर्देशों के उल्लंघन का पता चला है और सुरक्षा ख़तरे में पड़ी है, जिससे नियमों का और सख़्ती से पालन करने की जरूरत पर ज़ोर दिया गया है.

क्रू का अधिकार, अनुभवी पायलट जरूरी

नए नियमों के तहत, विमान के मुख्य पायलट और विमान रखरखाव इंजीनियरों के पास ऑपरेशन से जुड़े सभी फ़ैसले लेने का पूरा अधिकार होगा, और उन पर कोई बाहरी दबाव नहीं होगा. ऐसी उड़ानें उड़ाने की अनुमति केवल बहुत अनुभवी पायलटों को ही दी जाएगी, और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए कम से कम दो क्रू सदस्यों वाले दो इंजन वाले विमानों का इस्तेमाल अनिवार्य कर दिया गया है.
रेगुलेटर ने तकनीकी ख़ामियों के मामले में भी ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ की नीति लागू की है. हर उड़ान से पहले विमान की अच्छी तरह से जांच की जानी चाहिए और उसे प्रमाणित किया जाना चाहिए. इंजन, उपकरणों या अन्य साज़ो-सामान में कोई भी ख़ामी पाए जाने पर, उड़ान भरने से पहले उसे ठीक करना जरूरी होगा. मौसम से जुड़े कड़े नियम बिना किसी अपवाद के लागू होंगे, और ऑपरेटरों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके पास पर्याप्त ईंधन हो – जिसमें आपातकालीन रिज़र्व भी शामिल हैं और ईंधन भरते समय गुणवत्ता की कड़ी जाँच की जाए.

हेलीपैड और लैंडिंग के लिए और भी कड़े नियम

जमीनी ऑपरेशन्स पर भी अब और भी कड़ी नजर रखी जाएगी. ऑपरेटरों को हेलीपैड और लैंडिंग साइट्स के लिए कम से कम 24 घंटे पहले अनुमति लेनी होगी, खासकर दूरदराज या अनियंत्रित इलाकों में. ज़िला अधिकारी सुरक्षा, अग्निशमन और बचाव सेवाओं की उपलब्धता की पुष्टि करने के बाद ही मंज़ूरी देंगे, और साथ ही लैंडिंग की स्थितियों और निर्देशांकों के बारे में विस्तृत जानकारी भी साझा करेंगे.

जवाबदेही और यात्रियों को जानकारी देना

यात्रियों और सामान से जुड़े नियमों को भी कड़ा कर दिया गया है; अब सामान लोड करने से पहले उसकी अनिवार्य जांच होगी और लोड व ट्रिम सीमाओं का सख्ती से पालन करना होगा. नियमों के पालन के लिए ऑपरेटरों को सीधे तौर पर जवाबदेह ठहराया जाएगा, और DGCA ने नियमों के उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है.
खास बात यह है कि अब VIP यात्रियों को भी ऑपरेशन से जुड़ी सीमाओं के बारे में जानकारी देना अनिवार्य होगा, जिसमें सुरक्षा के हित में उड़ान में देरी होने या उसका रास्ता बदलने की संभावना भी शामिल है. चूंकि चुनावी उड़ानों को एक ‘उच्च-जोखिम वाली गतिविधि’ के रूप में पहचाना गया है, इसलिए DGCA ने ऐसी हर उड़ान से पहले जोखिम का आकलन करना अनिवार्य कर दिया है.

Shristi S

Shristi S has been working in India News as Content Writer since August 2025, She's Working ITV Network Since 1 year first as internship and after completing 3 months intership Shristi Joined Inkhabar Haryana of ITV Group on November 2024. She Worked in Inkhabar Haryana 9 months there she cover full Haryana news. Currently In India News her speciality is hard news, lifestyle, entertainment, Business.

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