Hypertension In Teenages: आजकल की अनहेल्दी लाइफस्टाइल के चलते बच्चे भी गंभीर बीमारियों के शिकार हो रहे हैं. बच्चों में कई ऐसी बीमारियां देखने में आ रही हैं जो कभी बुढ़ापे या 50 साल के बाद देखी जाती थीं. हाइपरटेंशन ऐसी ही बीमारियों में से एक है. वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. विवेक कुमार से जानते हैं इस बीमारी के बारे में-
Hypertension In Teenages: यह सच है कि बुढ़ापा काफी दर्दभरा होता है. इसी उम्र में इंसान को बीमारियां सबसे ज्यादा शिकार बनाती हैं. क्योंकि, शरीर के अंग धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगते हैं, कोशिकाएं ठीक से काम नहीं करतीं और इम्युनिटी कमजोर हो जाती है. ऐसा होने से हृदय रोग, मधुमेह, गठिया और याददाश्त कमजोर होने जैसी कई समस्याएं बढ़ जाती हैं. सोंचो… अगर ये परेशानियां युवाओं और बच्चों में भी होने लगे तो उनका क्या होगा? दरअसल, आजकल हाइपरटेंशन के शिकार बच्चों की फेहरिस्त लंबी है. इसका सबसे बड़ा कारण अनहेल्दी लाइफस्टाइल को माना जा रहा है. यह बीमारी कभी 50 की उम्र के बाद वालों में देखी जाती थी. लेकिन, आज यह बच्चों को भी शिकार बना रही है. अब सवाल है कि आखिर हाइपरटेंशन क्या है? बच्चों में हाइपरटेंशन क्यों बढ़ा? हाइपरटेंशन के लक्षण क्या और बचाव कैसे करें? इस बारे में India News को जानकारी दे रहे हैं राजकीय मेडिकल कॉलेज कन्नौज के वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. विवेक कुमार-
6 से 19 साल तक के बच्चे भी शिकार
डॉ. विवेक कुमार बताते हैं कि, 7 से 8 साल पहले तक 20-30 साल के लोगों में हाइपरटेंशन न के बराबर था. लेकिन, आज इसका उटल है. वर्तमान में हाइपरटेंशन ने 6 से 19 साल तक के बच्चे भी हाइपरटेंशन का शिकार हैं. हाइपरटेंशन आमतौर पर एक साइलेंट बीमारी के तौर पर वार करती है. शुरुआत में इसके लक्षण समझ में आते नहीं हैं, और जब तक कुछ समझ पाते तब तक बीमारी बढ़ चुकी होती है. वे कहते हैं कि, यदि समय रहते हम इस पर बीमारी पर काबू नहीं पाए, तो आगे चलकर यह हाई प्रेशर हार्ट, अटैक, स्ट्रोक, किडनी की समस्या या डिमेंशिया जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है.
हाइपरटेंशन क्या है?
डॉक्टर के मुताबिक, हार्ट का मुख्य कार्य शरीर के चारों ओर ब्लड पंप करना होता है. यह धमनियों के जरिए ब्लड फ्लो करने के लिए दबाव की एक निश्चित मात्रा की आवश्यकता होती है. ब्लड फ्लो के लिए दबाव एक निश्चित मात्रा में ही होती है. लेकिन, यदि ब्लड फ्लो का यह दबाव सामान्य से अधिक होता है, तो यह रक्त वाहिकाओं की दीवार पर तनाव डालने लगता है. इसके बाद परेशानी शुरू होने लगती है. इसी स्थिति को हाई ब्लड प्रेशर या हाइपरटेंशन कहते हैं.
हाइपरटेंशन के लक्षण क्या हैं?
हाइपरटेंशन की शुरुआत बेहद खतरनाक है. यह साइलेंट होने से प्राइमरी स्टेज में इसके लक्षणों की पहचान कर पाना मुश्किल हो जाता है. हालांकि, फिर भी यदि बच्चों में लगातार उल्टी या मतली, सीने में जकड़न, सांस लेने में परेशानी, सिरदर्द, धड़कनें तेज चलना, दिखने में परेशानी हो तो तुरंत जांच कराएं. क्योंकि, बच्चों में इस तरह के लक्षण हाइपरटेंशन के हो सकते हैं.
बच्चों में हाइपरटेंशन के कारण?
डॉक्टर कहते हैं कि, बच्चों में हाइपरटेंशन के दो बड़े कारण हैं. पहला, प्राइमरी हाइपरटेंशन और दूसरा सेकेंडरी हाइपरटेंशन . टीनएजर और यंग में प्राइमरी हाइपरटेंशन सबसे कॉमन है. हालांकि, सेकेंडरी हाइपरटेंशन बच्चों में कम पाया जाता है. सामान्यतौर पर यह किडनी प्रॉब्लम, हाइपरथायरायडिज्म, हार्मोनल इंबैलेंस, हार्ट प्रॉब्लम, अधिक तनाव और दवाओं के कारण होता है. लेकिन, कई बार फैमिली हिस्ट्री के कारण भी हो सकता है. इसका सीधा असर हार्ट पर पड़ता है.
हाइपरटेंशन से कैसे करें बचाव?
हेल्दी डाइट से भी हाइपरटेंशन को कंट्रोल किया जा सकता है. इसके लिए डाइट में ताजे फल, सब्जियां, साबुत अनाज और लो फैट डेयरी प्रोडक्ट्स को शामिल करें. साथ ही, नियमित एक्सरसाइज जरूरी है. सप्ताह में कम से कम 150 मिनट वॉकिंग, एरोबिक, स्विमिंग और साइकिलिंग आदि करें. क्योंकि, कई बार मोटापे के कारण भी हाइपरटेंशन हो सकता है. स्ट्रेस मैनेजमेंट के लिए योग और मेडिटेशन का सहारा लें. इसके अलावा, नमक और सैचुरेटेड फैट का सेवन कम करें.
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