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सरकार ने बंद किए 83,000 व्हाट्सएप, 8 लाख सिम बेकार! क्या आपने तो नहीं की यह एक बड़ी भूल?

गृह मंत्रालय की I4C विंग ने साइबर ठगों पर बड़ी डिजिटल स्ट्राइक की है. 8 लाख सिम कार्ड और 83 हजार व्हाट्सएप बंद! कहीं आपकी एक छोटी सी भूल आप पर भारी न पड़ जाए.

Written By: Shivani Singh
Last Updated: March 30, 2026 16:49:07 IST

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गृह मंत्रालय की साइबर विंग I4C ने साइबर अपराधियों के खिलाफ एक डिजिटल स्ट्राइक शुरू की है जिसके परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में अकाउंट और सिम कार्ड ब्लॉक कर दिए गए हैं. इस ऑपरेशन में जो 2025 से चल रहा है, 83,867 व्हाट्सएप अकाउंट और 3,962 स्काइप आईडी को हमेशा के लिए बंद कर दिया गया है. इसके अलावा NCRP सिस्टम के ज़रिए 845,000 सिम कार्ड और 239,000 मोबाइल IMEI नंबर भी ब्लॉक किए गए हैं.

गृह मंत्रालय ने यह बड़ा अभियान पुलिस, दूरसंचार विभाग और टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स के साथ मिलकर चलाया. साथ ही धोखाधड़ी वाली गतिविधियों में शामिल पाए गए 827 मोबाइल ऐप्स पर भी बैन लगा दिया गया है. सहयोग पोर्टल की मदद से 111,185 संदिग्ध ऑनलाइन कंटेंट को हटा दिया गया है. यह पूरा ऑपरेशन डिजिटल प्लेटफॉर्म और मोबाइल नेटवर्क पर होने वाली साइबर धोखाधड़ी को पूरी तरह से खत्म करने के मकसद से चलाया गया था.

साइबर धोखाधड़ी पर करारा वार

साइबर अपराधियों पर शिकंजा कसने के लिए, I4C ने व्हाट्सएप और स्काइप जैसे प्लेटफॉर्म को निशाना बनाया है. अपराधियों द्वारा इस्तेमाल की जा रही हज़ारों ID ब्लॉक कर दी गई हैं, जिससे वे अब नए लोगों को अपने जाल में नहीं फंसा पाएंगे. इसके साथ ही इन अपराधियों को मदद पहुंचाने वाले तकनीकी ढांचे को भी तोड़ दिया गया है. इसके लिए 800 से ज़्यादा ऐसे मोबाइल ऐप्स हटा दिए गए हैं जिन्हें खास तौर पर धोखाधड़ी के मकसद से ही बनाया गया था.

SIM और IMEI नंबरों पर कार्रवाई

टेलीकॉम कंपनियों के साथ मिलकर काम करते हुए गृह मंत्रालय ने 800,000 से ज़्यादा संदिग्ध सिम कार्ड ब्लॉक कर दिए हैं. इसके अलावा 200,000 से ज़्यादा मोबाइल डिवाइस के IMEI नंबर जिनका बार-बार धोखाधड़ी करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था उसको ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है. इस व्यवस्था से अब किसी भी ऐसे डिवाइस को तुरंत ब्लॉक करना बहुत आसान हो गया है जिसकी पहचान धोखाधड़ी वाली गतिविधियों में शामिल होने के तौर पर की जाती है.

सहयोग पोर्टल के जरिए मंत्रालय ने इंटरनेट पर मौजूद 100,000 से ज़्यादा संदिग्ध और आपत्तिजनक कंटेंट को सफलतापूर्वक हटा दिया है. I4C की इस सक्रिय कार्रवाई से साइबर जालसाज़ों में हड़कंप मच गया है. मंत्रालय और जाँच एजेंसियाँ अब उन नेटवर्कों की पहचान करने में जुटी हैं जो नकली पहचान पत्रों का इस्तेमाल करके SIM कार्ड और खातों का संचालन कर रहे थे.

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गृह मंत्रालय की साइबर विंग I4C ने साइबर अपराधियों के खिलाफ एक डिजिटल स्ट्राइक शुरू की है जिसके परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में अकाउंट और सिम कार्ड ब्लॉक कर दिए गए हैं. इस ऑपरेशन में जो 2025 से चल रहा है, 83,867 व्हाट्सएप अकाउंट और 3,962 स्काइप आईडी को हमेशा के लिए बंद कर दिया गया है. इसके अलावा NCRP सिस्टम के ज़रिए 845,000 सिम कार्ड और 239,000 मोबाइल IMEI नंबर भी ब्लॉक किए गए हैं.

गृह मंत्रालय ने यह बड़ा अभियान पुलिस, दूरसंचार विभाग और टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स के साथ मिलकर चलाया. साथ ही धोखाधड़ी वाली गतिविधियों में शामिल पाए गए 827 मोबाइल ऐप्स पर भी बैन लगा दिया गया है. सहयोग पोर्टल की मदद से 111,185 संदिग्ध ऑनलाइन कंटेंट को हटा दिया गया है. यह पूरा ऑपरेशन डिजिटल प्लेटफॉर्म और मोबाइल नेटवर्क पर होने वाली साइबर धोखाधड़ी को पूरी तरह से खत्म करने के मकसद से चलाया गया था.

साइबर धोखाधड़ी पर करारा वार

साइबर अपराधियों पर शिकंजा कसने के लिए, I4C ने व्हाट्सएप और स्काइप जैसे प्लेटफॉर्म को निशाना बनाया है. अपराधियों द्वारा इस्तेमाल की जा रही हज़ारों ID ब्लॉक कर दी गई हैं, जिससे वे अब नए लोगों को अपने जाल में नहीं फंसा पाएंगे. इसके साथ ही इन अपराधियों को मदद पहुंचाने वाले तकनीकी ढांचे को भी तोड़ दिया गया है. इसके लिए 800 से ज़्यादा ऐसे मोबाइल ऐप्स हटा दिए गए हैं जिन्हें खास तौर पर धोखाधड़ी के मकसद से ही बनाया गया था.

SIM और IMEI नंबरों पर कार्रवाई

टेलीकॉम कंपनियों के साथ मिलकर काम करते हुए गृह मंत्रालय ने 800,000 से ज़्यादा संदिग्ध सिम कार्ड ब्लॉक कर दिए हैं. इसके अलावा 200,000 से ज़्यादा मोबाइल डिवाइस के IMEI नंबर जिनका बार-बार धोखाधड़ी करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था उसको ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है. इस व्यवस्था से अब किसी भी ऐसे डिवाइस को तुरंत ब्लॉक करना बहुत आसान हो गया है जिसकी पहचान धोखाधड़ी वाली गतिविधियों में शामिल होने के तौर पर की जाती है.

सहयोग पोर्टल के जरिए मंत्रालय ने इंटरनेट पर मौजूद 100,000 से ज़्यादा संदिग्ध और आपत्तिजनक कंटेंट को सफलतापूर्वक हटा दिया है. I4C की इस सक्रिय कार्रवाई से साइबर जालसाज़ों में हड़कंप मच गया है. मंत्रालय और जाँच एजेंसियाँ अब उन नेटवर्कों की पहचान करने में जुटी हैं जो नकली पहचान पत्रों का इस्तेमाल करके SIM कार्ड और खातों का संचालन कर रहे थे.

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