Budget 2026: क्या आप जानते हैं 1 फरवरी को संसद में भाषण देने से पहले वित्त मंत्री को किन 5 कठिन चरणों से गुजरना पड़ता है? जानें बजट बनने की वो पूरी प्रक्रिया जो आपको हैरान कर देगा!
Budget 2026
भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस सप्ताह 1 फरवरी, रविवार, सुबह 11 बजे केंद्रीय बजट पेश करने के लिए तैयार हैं. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का यह लगातार नौवां बजट भाषण होगा, उनसे पहले पूर्व वित्त मंत्री मोरारजी देसाई ने सबसे अधिक 10 बार बजट पेश करने के रिकॉर्ड बनाया था. बजट पेश होने से पहले आम और खास लोगों में एक अलग तरह की उत्सुकता है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि बजट वास्तव में तैयार कैसे किया जाता है? यह प्रक्रिया कितनी लंबी होती है? और बजट बनाने में कौन-कौन शामिल होता है? आज के इस लेख में हम विस्तार से इन क्रियायों को आसान शब्दों में समझेंगे।
आइए, हर साल केंद्रीय बजट तैयार करने और पेश करने के प्रमुख चरणों को विस्तार से समझते हैं.
केंद्रीय बजट तैयार करने की प्रक्रिया दो प्रकार की गतिविधियों पर आधारित होती है; पहली, प्रशासनिक प्रक्रिया, जिसमें हितधारकों (stakeholders) के राय से बजट और उससे संबंधित डॉक्युमेंट्स तैयार किए जाते हैं. दूसरी, विधायी प्रक्रिया, जिसमें संसद में चर्चा के बाद बजट पारित किया जाता है।
पहला चरण: बजट प्रक्रिया की शुरुआत हर साल आमतौर पर सितंबर के महीने में ‘बजट सर्कुलर’ जारी होने के साथ शुरू हो जाती है. वहीं बजट 2026 के लिए, यह सर्कुलर अगस्त के अंतिम सप्ताह में जारी कर दिया गया था. यह सर्कुलर अलग-अलग मंत्रालयों/विभागों को चालू वित्तीय वर्ष के लिए अपने संशोधित अनुमानों और आने वाले वित्तीय वर्ष के लिए बजट अनुमानों को तैयार करने के संबंध में मार्गदर्शन करने के उद्देश्य से जारी किया जाता है.
दूसरा चरण: सर्कुलर में विभिन्न प्रकार की रसीद और व्यय के अनुमान तैयार करने के विस्तृत निर्देश होते हैं. इसमें वे फॉर्मेट्स और विवरण भी शामिल होते हैं जिनमें ये अनुमान प्रस्तुत किए जाने होते हैं.
तीसरा चरण: इन अनुमानों को तैयार करने के बाद, मंत्रालयों/विभागों को अपने बजट प्रस्ताव ‘अनंतिम SBE’ (Statement of Budget Estimates) के रूप में बजट प्रभाग के संबंधित अनुभागों को हार्ड कॉपी में जमा करने होते हैं.
चौथा चरण: इसके बाद वित्त मंत्रालय का बजट प्रभाग प्री-बजट बैठकों के लिए संक्षिप्त विवरण (briefs) तैयार करता है. इन बैठकों में खर्च के रुझान, बिना खर्च हुई राशि, योजनाओं/परियोजनाओं की मंजूरी की स्थिति आदि के आधार पर व्यय की विभिन्न मदों पर विस्तृत चर्चा की जाती है.
पांचवा चरण: व्यय सचिव की अध्यक्षता में होने वाली इन प्री-बजट बैठकों के दौरान विभागों की प्राप्तियों के साथ-साथ व्यय की सभी श्रेणियों के लिए धन की आवश्यकताओं पर चर्चा की जाती है.
इन बैठकों के बाद अक्टूबर से जनवरी की अवधि में कई अन्य कदम उठाए जाते हैं, जैसे बजट प्रभाग द्वारा वास्तविक आंकड़ों का प्रसंस्करण (processing), उन्हें मंत्रालयों को सूचित करना, हितधारकों/समूहों/वाणिज्य मंडलों/संघों आदि के साथ वित्त मंत्री की बैठकें, मंत्रालयों से अंतिम SBE प्राप्त करना, और वित्त विधेयक (Finance Bill) के मसौदे का प्रस्ताव और उसे अंतिम रूप देना.
फिर जनवरी के अंतिम सप्ताह में, वित्त मंत्री के बजट भाषण को अंतिम रूप दिया जाता है। इसके बाद ‘राष्ट्रपति के लिए सारांश’ (Summary for the President) पर प्रधानमंत्री की स्वीकृति प्राप्त की जाती है और फिर संविधान के अनुच्छेद 112, 115 और 117 (भाग V) के तहत बजट के लिए राष्ट्रपति की सिफारिशें ली जाती हैं, जो संसद में प्रमुख वित्तीय प्रक्रियाओं को परिभाषित करती हैं।
अंततः 1 फरवरी की सुबह, वित्त मंत्री कैबिनेट मंत्रियों को बजट की रूपरेखा (एक सारांश के माध्यम से) और वित्त विधेयक के बारे में जानकारी देती हैं. इस ब्रीफिंग के तुरंत बाद, वित्त मंत्री के भाषण के साथ बजट लोकसभा में पेश किया जाता है. बजट पेश होने के बाद, संसदीय कार्य मंत्रालय (वित्त मंत्रालय के परामर्श से) लोकसभा और राज्यसभा दोनों में बजट पर सामान्य चर्चा की तारीखें तय करता है.
इस स्तर पर चर्चा का दायरा बजट के सामान्य परीक्षण, वित्त मंत्री के बजट भाषण में व्यक्त कराधान (taxation) नीति और सामान्य योजनाओं एवं संरचनाओं तक सीमित होता है. चर्चा के अंत में, वित्त मंत्री के पास सवालों के जवाब देने का अधिकार होता है.
जहाँ तक वित्त विधेयक का प्रश्न है, लोकसभा और राज्यसभा में वित्त विधेयक पर विचार और उसे पारित करने का कार्य आमतौर पर मार्च के तीसरे या चौथे सप्ताह तक किया जाता है, जब वित्त विधेयक में संशोधनों के लिए राष्ट्रपति की सिफारिशें प्राप्त हो जाती हैं.
बजट हम सभी को किसी न किसी तरह प्रभावित करता है, इसलिए यह सवाल किसी के भी मन में आना स्वाभाविक है और इसका जवाब है- हाँ. वर्ष 2015 से, भारत सरकार ने बजट बनाने की प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता लाने और लोगों को इस प्रक्रिया में भागीदार बनाने के लिए सार्वजनिक सुझाव आमंत्रित करना शुरू किया. आगामी बजट 2026 के लिए भी वित्त मंत्रालय ने 17 दिसंबर 2025 से 16 जनवरी 2026 तक सुझाव आमंत्रित किए थे.
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