बंदूकों से लेकर बिटकॉइन तक, अब आतंकियों का बचना नामुमकिन! क्या है भारत का नया मिशन 'प्रहार' जो सीमा पार बैठे आकाओं की नींद उड़ा रहा है? यहां पढ़िए
भारत की पहली काउंटर-टेररिज्म पॉलिसी 'प्रहार'
गृह मंत्रालय (MHA) ने सोमवार को देश की पहली व्यापक आतंकवाद-विरोधी नीति जारी की है. इस नीति का मुख्य मंत्र है. ‘जीरो टॉलरेंस’ (आतंकवाद को बिल्कुल भी बर्दाश्त न करना). डिजिटल युग की चुनौतियों को देखते हुए इसमें इंटेलिजेंस और तकनीक के इस्तेमाल पर खास जोर दिया गया है. दिलचस्प बात यह है कि यह नीति ठीक उस वक्त आई है, जब एक दिन पहले ही भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और CRPF ने किश्तवाड़ में ‘सैफुल्ला’ जैसे खतरनाक कमांडर समेत तीन आतंकवादियों को ढेर किया है.
यह सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि एक खास रणनीति है. गृह मंत्रालय ने इसे एक एक्रोनिम (Acronym) के रूप में समझाया है, जिसके हर अक्षर का एक गहरा मतलब है.
P (Prevention): नागरिकों और देश के हितों की रक्षा के लिए आतंकी हमलों को पहले ही रोकना.
R (Response): खतरे के हिसाब से तुरंत और कड़ा जवाब देना.
A (Aggregating): सरकार के सभी विभागों को एक साथ लाना ताकि आतंकवाद के खिलाफ पूरी ताकत से लड़ा जा सके.
H (Human Rights): मानवाधिकारों और ‘कानून के शासन’ का पालन करते हुए खतरों को खत्म करना.
A (Attenuating): उन हालातों को खत्म करना जिनसे आतंकवाद पनपता है, जैसे कि कट्टरपंथ.
A (Aligning): आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दुनिया को एकजुट करना.
R (Recovery): आतंकी घटना के बाद समाज को दोबारा मजबूती से खड़ा करना.
मंत्रालय ने साफ शब्दों में कहा है कि पड़ोस के कुछ देश आतंकवाद को अपनी सरकारी नीति के हिस्से के रूप में इस्तेमाल करते हैं. भारत लंबे समय से सीमा पार से होने वाले ‘प्रायोजित आतंकवाद’ और जिहादी गुटों का सामना कर रहा है. हालांकि, सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत आतंकवाद को किसी खास धर्म, जाति या राष्ट्रीयता से जोड़कर नहीं देखता. भारत का मानना है कि हिंसा का कोई भी बहाना सही नहीं हो सकता.
आज के दौर में आतंकी सिर्फ बंदूक लेकर नहीं आते, वे तकनीक का भी सहारा ले रहे हैं। गृह मंत्रालय ने अल-कायदा और ISIS जैसे संगठनों का जिक्र करते हुए कुछ बड़े खतरों की ओर इशारा किया है. ड्रोन का इस्तेमाल, पंजाब और जम्मू-कश्मीर में हथियारों और नशीले पदार्थों की सप्लाई के लिए. सोशल मीडिया, युवाओं को गुमराह करने और प्रोपेगेंडा फैलाने के लिए. हाई-टेक टूल्स, अपनी पहचान छिपाने के लिए आतंकी अब डार्क वेब, एन्क्रिप्शन (Encryption) और क्रिप्टो वॉलेट का इस्तेमाल कर रहे हैं ताकि उनकी फंडिंग और बातचीत को पकड़ा न जा सके.
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