एक्सपर्ट का मानना है कि जब ईरान होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूल रहा है तो भारत ऐसा रणनीतिक कदम क्यों नहीं उठाता, जबकि भारत के पास भी तो 'स्ट्रेट ऑफ हार्मूज' जैसा रास्ता है. क्या आप जानते हैं इस रास्ते के बारे में? यहां समझिए कैसे ये भारत की वैल्यू बढ़ा सकता है?
भारत का 'मलक्का' है असली गेम चेंजर! चीन के 80% जहाज यहीं से गुजरते हैं, फिर भी हम 'टोल' क्यों नहीं मांगते?
अंतर्राष्ट्रीय दबावों के बावजूद ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज’ पर ईरान का दबदबा कम नहीं हुआ है. समुद्री नियमों को दरकिनार करके ईरान जहाजों पर मनमाना टोल लगा रहा है, जिससे अच्छी-खासी कमाई भी हो रही है. हालांकि समंदर में ईरान के बढ़ते रणनीतिक कदमों से दूसरे देश भी इंस्पीरेशन ले रहे हैं. भारत में कायस लगाए जा रहे हैं कि ईरान की तर्ज पर हमें भी अपने समुद्री अधिकार क्षेत्र में टोल लेना चाहिए, लेकिन भारत ऐसा क्यों नहीं करताजबकि ईरान की तरह भारत के पास भी अपना स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज है. जानें क्या कहती है भारत की रणनीति.
एबीपी न्यूज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, किसी भी देश को ये अधिकार नहीं है कि वो अपने समुद्री सीमा से गुजरने वाले जहाजों पर टैक्स लगाए. हालांकि देशों को इस बात का अधिकार है कि वो हर जहाज की जांच और निगरानी कर सकता है, लेकिन इस मामले में संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (UNCLOS) में भी साफ लिखा है कि समुद्र में जहाजों को बिना टैक्स दिए पूरी सुरक्षा के साथ आवाजाही करने की अनुमति है. इसलिए स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज में ईरान की मनमानी को नियमों के उल्लंघन के तौर पर देखा जा रहा है. यही वजह है कि ईरान अंतर्राष्ट्रीय अलगाव का भी सामना कर रहा है.
‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज’ की तर्ज पर ईरान जो टैक्स वसूल करता है, वो पूरी रह से गैर-कानूनी है. नियमों के मुताबिक, समुद्र में जहाजों से कोई टैक्स नहीं लिया जा सकता, जब तक कि वो किसी बंदरगाह पर न रुक जाए. यदि जहाज बंदरगाहों पर ठहरते हैं तो उनसे पोर्ट चार्ज लिया जाता है, जिसे ‘पायलेट चार्ज’ या ‘सर्विस चार्ज’ भी कहते हैं.
ये पूरी तरह से कानूनी है और हर देश वसूल सकता है. अंतर्राष्ट्रीय मानकों के हिसाब से, इस तरह के टैक्स में जहाजों के पायलट को दी जाने वाली सुविधाओं, जहाज की सेफ्टी और गोदाम का इस्तेमाल की अनुमति शामिल है.
क्या आप जानते हैं कि ‘मलक्का स्ट्रेट’ भी ईरान के स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज जैसा ही रणनीतिक इलाका है, जहां से चीन के 80 फीसदी जहाज बेफिक्र होके आवाजाही करते हैं. ‘मलक्का स्ट्रेट’ भारत के अंडमान और निकोबार से लेकर मलेशिया और सिंगापुर तक फैला है. लेकिन भारत इस रास्त पर किसी भी तरह का टैक्स नहीं लेता, हालांकि यहां भारतीय नौसेना कड़ी निगरानी रहती है. यदि भविष्य में वर्ल्ड वॉर जैसी कंडीशन होती है तो भारत यहां की नाकेबंदी तक कर सकता है, लेकिन टैक्स वसूलने जैसी कोई मनमानी भारत की ओर से नहीं की जाती.
एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब ईरान, स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज से गुजरने वाले जहाजों से टैक्स ले सकता है तो भारत को भी मलक्का स्ट्रेट से आवाजाही करने वाले जहाजों से टोल लेना चाहिए, लेकिन भारत की रणनीतिक साझेदारी कुछ और ही कहती है. लेकिन भारत के अब तक ऐसा न करने के पीछे 3 कारण है
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