India New Zealand Free Trade Agreement: भारत ने न्यूजीलैंड के साथ मुक्त व्यापार समझौते के तहत चुनिंदा आयातित उत्पादों पर सीमा शुल्क की रियायती दरें अधिसूचित की हैं. 20 अक्टूबर से शराब, मनुका शहद, कीवी फल और भेड़ के मांस समेत पात्र उत्पादों पर नई दरें लागू होंगी. हालांकि, छूट उत्पाद की श्रेणी और निर्धारित शर्तों पर निर्भर करेगी. डेयरी और प्रमुख कृषि उत्पादों को इन रियायतों से बाहर रखा गया है.
कीवी, शहद और शराब समेत इन उत्पादों पर बदलेगा आयात शुल्क
India New Zealand Free Trade Agreement: भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के तहत आयात शुल्क में राहत देने की प्रक्रिया शुरू हो गई है. भारत सरकार ने इस समझौते के तहत चुनिंदा न्यूजीलैंड उत्पादों के आयात पर सीमा शुल्क की रियायती दरें अधिसूचित कर दी हैं. वित्त मंत्रालय की 16 अक्टूबर को जारी अधिसूचना के मुताबिक, शराब, मनुका शहद, कीवी फल और भेड़ के मांस समेत कुछ उत्पादों पर नई दरें 20 अक्टूबर से लागू होंगी. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि इन सभी वस्तुओं पर हर तरह का टैक्स पूरी तरह खत्म कर दिया गया है. छूट उत्पाद की श्रेणी, तय शर्तों और लागू शुल्क के आधार पर मिलेगी.
राजस्व विभाग ने सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 की धारा 25(1) के तहत अधिसूचना जारी की है. इसमें भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते के तहत सीमा शुल्क में पहली रियायतों की दरें और शर्तें तय की गई हैं. इससे पात्र न्यूजीलैंड उत्पादों के आयात पर निर्धारित शुल्क में राहत मिल सकेगी. हालांकि, आयातकों को हर उत्पाद की श्रेणी और उस पर लागू नियमों की जांच करनी होगी.
अधिसूचना के मुताबिक, निर्धारित टैरिफ श्रेणी में आने वाले ताजे, ठंडे और जमे हुए भेड़ के मांस पर मूल सीमा शुल्क, कृषि अवसंरचना एवं विकास उपकर (AIDC) और स्वास्थ्य उपकर की दर शून्य रखी गई है. वहीं, कम से कम 2.50 डॉलर प्रति किलोग्राम कीमत वाले पात्र कीवी फलों के आयात पर 15 प्रतिशत की दर लागू होगी. यह रियायत संबंधित उत्पाद की पहचान और आयात की शर्तें पूरी होने पर ही मिलेगी.
अधिसूचना में कुछ मछलियों के लिए 25.71 प्रतिशत की दर का उल्लेख है, जबकि उन पर कृषि अवसंरचना एवं विकास उपकर और स्वास्थ्य उपकर शून्य होंगे. शराब और मनुका शहद समेत अन्य पात्र उत्पादों के लिए भी रियायती दरें निर्धारित की गई हैं. अलग-अलग उत्पादों पर लागू शुल्क एक जैसा नहीं है, इसलिए वास्तविक राहत संबंधित टैरिफ श्रेणी और अधिसूचना की शर्तों पर निर्भर करेगी.
इस समझौते के तहत दी गई राहत को सभी आयात शुल्कों की पूर्ण समाप्ति नहीं माना जा सकता. कुछ मामलों में केवल खास सीमा शुल्क या उपकरों में रियायत दी गई है, जबकि अन्य शुल्क लागू हो सकते हैं. इसलिए आयातकों को संबंधित उत्पाद की टैरिफ श्रेणी और अधिसूचित दरों की जांच करनी होगी, ताकि आयात पर लगने वाले कुल शुल्क का सही आकलन किया जा सके.
अधिसूचना में टैरिफ रेट कोटा (TRQ) का भी प्रावधान है. इसके तहत चुनिंदा उत्पादों को तय मात्रा और शर्तों के अधीन रियायती दरों पर आयात करने की अनुमति मिलती है. पात्रता के लिए आयातकों को निर्धारित उत्पाद संबंधी आवश्यकताएं पूरी करनी होंगी और न्यूजीलैंड में उत्पाद की उत्पत्ति का प्रमाण देना पड़ सकता है.
भारत ने संवेदनशील क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए डेयरी उत्पादों और प्रमुख कृषि उत्पादों को इन रियायतों से बाहर रखा है. इसका मतलब है कि मुक्त व्यापार समझौते के तहत सभी न्यूजीलैंड उत्पादों को समान लाभ नहीं मिलेगा. नई व्यवस्था चुनिंदा उत्पादों के आयात को राहत देती है, जबकि कुछ घरेलू कृषि क्षेत्रों के लिए सुरक्षा बनाए रखती है.
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