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ज्ञानवापी और मथुरा की इबादतगाहों का हक नहीं छोड़ेंगे: हाफिज उबेद उल्लाह

इंडिया न्यूज़, (Jamiat Ulema-e-Hind Jalsa Against Islamophobia): यूपी के देवबंद में जारी जमीयत उलेमा ए हिन्द सम्मेलन के दूसरे दिन कुछ प्रस्ताव पास किए गए। इसमें कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। मुस्लिम धर्मगुरुओ का कहना है कि ज्ञानवापी मस्जिद और मथुरा की ईदगाह का दावा किसी हालत में नहीं छोड़ेंगे। दूसरे दिन की वर्किंग कमेटी […]

BY: India News Desk • UPDATED :
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इंडिया न्यूज़, (Jamiat Ulema-e-Hind Jalsa Against Islamophobia): यूपी के देवबंद में जारी जमीयत उलेमा ए हिन्द सम्मेलन के दूसरे दिन कुछ प्रस्ताव पास किए गए। इसमें कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। मुस्लिम धर्मगुरुओ का कहना है कि ज्ञानवापी मस्जिद और मथुरा की ईदगाह का दावा किसी हालत में नहीं छोड़ेंगे।

दूसरे दिन की वर्किंग कमेटी का फैसला

दूसरे दिन की वर्किंग कमेटी की बैठक में ये महत्वपूर्ण प्रस्ताव मशहूर हाफिज उबेद उल्लाह ने सबके सामने रखा। उलूम के नायब मोहतमिम मुफ़्ती राशिद आजमी समेत सम्मेलन में मौजूद सभी लोगों ने प्रस्ताव का समर्थन किया। मुस्लिम धर्मगुरुओ ने कहा कि प्राचीन इबादतगाहो को लेकर हर बार विवाद खड़े किए जा रहे हैं। ऐसी ताकतों का समर्थन किया जा रहा जिससे देश खतरे में पड़े और देश की अखंडता को नुकसान पहुंचे।

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प्रस्ताव पेश करने वाले हाफिज उबेद उल्लाह बनारसी ने कहा कि ज्ञानवापी मस्जिद ओर ऐतिहासिक ईदगाह समेत दूसरी इबादतगाहो के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। दारुल उलूम के नायब मोहतमिम ने सभी को बताया कि इबादतगाहों पर देश की आजादी में जमीयत का अहम योगदान रहा है। जिस समय देश पर अंग्रेज ने हुकूमत की, उस समय लग रहा था मानों अंग्रेज सभी इबादतगाहों को खत्म कर देंगे।

लेकिन न तो उस समय इबादतगाहों का कुछ बिगड़ सका और उनके साथ साथ न ही धार्मिक स्थलों को नुकसान पहुंचा। उन्होंने कहा कि जो लोग इबादतगाहों को खत्म करने की हिम्मत रखते हैं । उनके घरों को अल्लाह खुद खाख में मिला देगा। आखिर में उन्होंने कहा की हमारी इबादतगाहों को न कोई खत्म कर सका है और न ही आगे कर पाएगा।

कॉमन सिविल कोर्ट पर आया फैसला 

इससे पहले शनिवार की सुबह कॉमन सिविल कोड के खिलाफ प्रस्ताव भी रखा गया। जिसका प्रस्ताव सम्मेलन में रखा गया। जिसके समर्थन में सांसद मौलाना बदरूद्दीन अजमल ने किया। अजमल ने भी देश के मौजूदा हालात पर चिंता जाहिर करते हुए जमीयत के कार्यों की प्रशंसा की। कार्यक्रम में उन्होने दारुल उलूम वक्त के महत्व मौलाना सुफियान कासमी ने भी विचार सभी के सामने रखें और अपना पक्ष सभी के सामने रखा।

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