KGMU Conversion Case: लखनऊ के KGMU धर्मांतरण मामले में एक बड़ा खुलासा हुआ है. सूत्रों के मुताबिक, पुलिस ने डॉ. रमीज से 100 से ज़्यादा बार पूछताछ की और उन्हें कई अहम सबूत मिले. डॉ. रमीज के पास से पहले एक मोबाइल फ़ोन और दो लैपटॉप बरामद किए गए थे. आरोपी डॉ. रमीज को 48 घंटे की पुलिस रिमांड पर लिया गया था. किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) धर्मांतरण और उत्पीड़न का मामला जनवरी 2026 में तब सामने आया जब एक महिला रेजिडेंट डॉक्टर ने पैथोलॉजी डिपार्टमेंट के रेजिडेंट डॉक्टर डॉ. रमीजुद्दीन नायक (डॉ. रमीज मलिक) पर गंभीर आरोप लगाए.
STF की जांच में चौंकाने वाले तथ्य
- STF ने KGMU में कथित धर्मांतरण नेटवर्क की जांच की और पूरे मामले का पर्दाफाश किया.
- STF की जांच में यूनिवर्सिटी के डॉक्टरों, रेजिडेंट डॉक्टरों और स्टाफ की कथित संलिप्तता का पता चला.
- जांच में महिला डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को प्रेम संबंधों में फंसाने, शादी का वादा करने और उन पर धर्म बदलने का दबाव डालने के आरोपों की जांच की गई.
- अपनी जांच रिपोर्ट में, STF ने अलग-अलग डिपार्टमेंट से जुड़े लोगों और घटनाओं का ज़िक्र किया. रिपोर्ट में गांधी वार्ड, पैथोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी और रेडियोलॉजी डिपार्टमेंट से जुड़े मामलों का ज़िक्र था.
- STF रिपोर्ट के आधार पर मेडिकल एजुकेशन डिपार्टमेंट ने KGMU एडमिनिस्ट्रेशन को एक्शन लेने का निर्देश दिया. मेडिकल एजुकेशन डिपार्टमेंट के जॉइंट सेक्रेटरी आनंद कुमार त्रिपाठी ने रजिस्ट्रार को लेटर लिखकर संबंधित मामलों में की गई एक्शन की डिटेल मांगी.
- जांच रिपोर्ट में नफीस, मुस्तफा और रेजिडेंट डॉक्टर आदिल से जुड़े कथित मामलों का भी ज़िक्र है. अब, KGMU एडमिनिस्ट्रेशन और मेडिकल एजुकेशन डिपार्टमेंट STF की जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई एक्शन पर नज़र रख रहे हैं.
- STF की जांच KGMU में कथित धर्मांतरण नेटवर्क का पर्दाफाश करने में अहम रही. इसकी रिपोर्ट के बाद अब इंस्टीट्यूशनल एक्शन का मामला आगे बढ़ा है.
- STF ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है, जिसमें धर्म परिवर्तन और लव जिहाद से जुड़े गंभीर आरोपों की लिस्ट है.
पूरा मामला क्या है?
हॉस्पिटल की एक महिला डॉक्टर ने आरोप लगाया कि डॉ. रमीज़ ने शादी का झांसा देकर उसका यौन शोषण किया, उसे अबॉर्शन के लिए मजबूर किया और उस पर इस्लाम अपनाने का दबाव डाला. इसके बाद, मानसिक टॉर्चर से तंग आकर पीड़िता ने ओवरडोज़ लेकर आत्महत्या करने की कोशिश की. इस घटना के बाद, उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की जांच रिपोर्ट (अक्टूबर 2026) में पता चला कि KGMU के अलग-अलग डिपार्टमेंट में हिंदू महिला डॉक्टरों और स्टाफ को टारगेट करने वाला एक नेटवर्क कथित तौर पर एक्टिव था.
STF रिपोर्ट में पैथोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी और रेडियोलॉजी डिपार्टमेंट के कुछ मुस्लिम डॉक्टरों और फैकल्टी मेंबर्स (जैसे प्रो. सुरेश बाबू, डॉ. सुमैरा कय्यूम, शफात अली खान और डॉ. रिजवान) के नाम हैं. आरोप है कि जब महिला डॉक्टरों ने विरोध किया, तो उन्हें उनका करियर बर्बाद करने की धमकी दी गई या उन पर मानसिक रूप से अस्थिर होने का आरोप लगाया गया.
इसके बाद, मुख्य आरोपी डॉ. रमीज़ और उसके माता-पिता को गिरफ्तार कर लिया गया और KGMU ने उसे सस्पेंड कर दिया और कॉलेज से निकाल दिया. हाल ही में (अक्टूबर 2026 में) उत्तर प्रदेश सरकार ने STF रिपोर्ट के आधार पर KGMU एडमिनिस्ट्रेशन को इसमें शामिल डॉक्टरों और स्टाफ के खिलाफ सख्त डिपार्टमेंटल और लीगल एक्शन लेने का निर्देश दिया और रिपोर्ट तलब की.