Krishna Janmashtami 2026: कृष्ण जन्माष्टमी की रात को भगवान श्रीकृष्ण का जन्मदिन मनाया जाता है. इसके अगले दिन दही हांडी का उत्सव मनाया जाता है. गलियों और सड़कों पर कान्हा की बाल लीलाओं की झलक देखने को मिलती है.
दही हांडी 2026
Krishna Janmashtami 2026: कृष्ण जन्माष्टमी की रात जैसे ही आधी रात को भगवान कृष्ण के जन्म का जश्न पूरा होता है, तो हर तरफ खुशियां और धूम हो जाती है. हालांकि ये जश्न यहां पर खत्म नहीं होता है. भक्तों की खुशी अगले दिन भी जारी रहती है. फर्क सिर्फ इतना होता है कि अब मंदिरों की जगह गलियों और सड़कों पर कान्हा की बाल लीलाओं की झलक देखने को मिलती है. कहीं ढोल-ताशे बजते हैं, तो कहीं गोविंदाओं की टोलियां नाचती नजर आती हैं. हर तरफ ‘गोविंदा आला रे’ के जयकारे सुनाई देते हैं.
सड़क के बीचों-बीच रस्सी से एक मटकी बांधी जाती है मटकी जितनी ऊंची होती है, उसे फोड़ने का रोमांच उतना ही ज्यादा होता है. गोविंदाओं की टोली एक-दूसरे के कंधों पर चढ़ती है. देखते ही देखते इंसानों का पिरामिड तैयार हो जाता है. सबसे ऊपर पहुंचा गोविंदा आखिरकार मटकी तक पहुंचता है और उसे फोड़ देता है. इसी परंपरा को दही हांडी के नाम से जाना जाता है.
2026 में दही हांडी के त्योहार को लेकर असमंजय बना हुआ है कि आखिर दही-हांडी कब मनाया जाएगा? दही हांडी का त्योहार 5 सितंबर 2026, शनिवार को मनाया जाएगा. पूजा का शुभ समय सुबह 5:40 बजे से सुबह 8:10 बजे तक होगा. वहीं दही हांडी फोड़ने का मुख्य समय सुबह 10:00 बजे से शाम 06:00 बजे तक होगा.
दही हांडी के पीछे भगवान कृष्ण के बचपन की एक बेहद प्यारी कहानी मानी जाती है. कान्हा को माखन बहुत पसंद था. घरों में जब माखन की मटकी ऊंचाई पर रख दी जाती, तो नन्हे कृष्ण अपने दोस्तों के साथ उसे हासिल करने की तरकीब निकालते थे. कभी कोई दोस्त नीचे खड़ा होता और दूसरा उसके कंधे पर चढ़ जाता. इस तरह सभी मिलकर ऊपर तक पहुंचते हैं और कान्हा माखन की मटकी फोड़ देते हैं. दही हांडी में बनने वाला मानव पिरामिड इसी बाल लीला की याद दिलाता है.
दही हांडी का सबसे भव्य नजारा महाराष्ट्र में देखने को मिलता है. इसके अलावा दही हांडी गुजरात और देश के कई अन्य राज्यों में भी मनाया जाता है. इस दिन बच्चों और बड़ों की टीम तैयार की जाती है, जो पिरामिड बनाकर मटकी को तोड़ते हैं. इस दिन कई जगहों पर प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया जाता है. गोविंदाओं की टोली मटकी फोड़ने पहुंचती है, तो आसपास खड़ी भीड़ उनका हौसला बढ़ाती है. ढोल-ताशों की आवाज और जयकारों के बीच मटकी टूटने का पल सबसे ज्यादा रोमांच पैदा करता है. कई जगह जीतने वाली टीम को पुरस्कार भी दिया जाता है.
दही हांडी की असली खूबसूरती सिर्फ मटकी फोड़ने में नहीं है. इसमें पूरी टीम को एक-दूसरे पर भरोसा करना पड़ता है. सबसे ऊपर चढ़ने वाला गोविंदा तभी सफल हो सकता है, जब नीचे खड़े साथी मजबूती से उसका साथ दें. इसीलिए दही हांडी को एकता, साहस, विश्वास और टीमवर्क का प्रतीक भी माना जाता है.
Pitru Paksha 2026: पितृपक्ष में श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान के साथ जल अर्पित करने की…
Dehradun women case: देहरादून के नालापानी चौक पर बेटी को कॉलेज बस तक छोड़कर लौट…
PM Modi Bhajan Clubbing: पीएम नरेंद्र मोदी 25 सितंबर को दिल्ली के दीन दयाल उपाध्याय…
October November 2026 festival: सितंबर के अंत से शुरू होने वाला पितृपक्ष अक्टूबर-नवंबर के त्योहारों…
UP Crime: बदायूं के उघैती थाना क्षेत्र में 17 सितंबर को मंदिर के पास जंगल…
Gonda Media Worker Attacked: गोंडा में शुक्रवार दोपहर दीवानी कचहरी गेट के पास मीडियाकर्मी सत्यम…