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We Women Want Conclave 2026: महाराष्ट्र में सूखे से हाहाकार! सूख गए कुएं-तालाब, 80% फसलें बर्बाद; CM फडणवीस ने बताया सरकार का प्लान

We Women Want Conclave 2026: देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि मानसून के आखिरी दो महीनों में बारिश हुई ही नहीं. इस दौरान बारिश की कमी 50 से 80 प्रतिशत तक रही. इसका नतीजा यह हुआ कि फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गईं. करीब 80 प्रतिशत फसलों को नुकसान पहुंचा. बड़े बांधों को छोड़ दें, तो छोटे बांध, छोटे तालाब, पीने के पानी के लिए इस्तेमाल होने वाली बावड़ियां और कुएं तक सूख गए.

Written By:
Edited By: Uttam Ojha
Last Updated: 2026-10-12 14:59:19

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We Women Want Conclave 2026: वी वीमेन वांट कॉन्क्लेव 2026 में महिलाओं की भागीदारी, नेतृत्व और सशक्तिकरण से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई. इस खास मंच पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी महिलाओं को संबोधित किया और उनके योगदान, नेतृत्व और आत्मनिर्भरता को लेकर अपना संदेश दिया. इस दौरान उन्होंने महाराष्ट्र में गंभीर सूखे पर बात की और बताई की सरकार उसके लिए क्या कर रही है.

देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि ‘देखिए, यह बिल्कुल सही बात है. हमारे सभी वेदर मॉडल्स ने पहले ही अल नीनो (El Niño) के संभावित प्रभाव की ओर संकेत किया था. हमारे यहां एक बड़ी और कुछ अलग स्थिति देखने को मिली. मानसून के शुरुआती दो महीनों में औसत से ज्यादा बारिश हुई. हमें लगा कि शायद अल नीनो का कोई असर नहीं होगा. फसलें भी अच्छी थीं और कुछ बड़े बांधों में पानी भी जमा हो गया था. इसलिए हम काफी संतुष्ट थे’.

‘मानसून में नहीं हुई बारिश’

लेकिन मानसून के आखिरी दो महीनों में बारिश हुई ही नहीं. इस दौरान बारिश की कमी 50 से 80 प्रतिशत तक रही. इसका नतीजा यह हुआ कि फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गईं. करीब 80 प्रतिशत फसलों को नुकसान पहुंचा. बड़े बांधों को छोड़ दें, तो छोटे बांध, छोटे तालाब, पीने के पानी के लिए इस्तेमाल होने वाली बावड़ियां और कुएं तक सूख गए.

एक सामान्य नियम है कि जब ऑब्जर्वेशन वेल यानी निगरानी कुएं में पानी का स्तर तीन मीटर से नीचे चला जाता है, तो इसका मतलब है कि अक्टूबर से अगले मानसून तक वहां पानी की कमी हो सकती है. ऐसी स्थिति में लोगों को टैंकरों के जरिए पानी उपलब्ध कराना पड़ता है. इसलिए हम इस समय बेहद गंभीर परिस्थिति से गुजर रहे हैं.

किसानों की मदद को लेकर कही ये बात

हालांकि, हमने किसानों की मदद के लिए कई प्रयास किए हैं. उन्हें अनाज उपलब्ध कराने, नकद सब्सिडी देने और फसल के नुकसान का मुआवजा देने जैसे कदम उठाए जा रहे हैं. पानी के प्रबंधन पर भी ध्यान दिया जा रहा है. हमें सिर्फ इंसानों के लिए ही नहीं, बल्कि मवेशियों के लिए भी पानी की व्यवस्था करनी है. महाराष्ट्र में पाले जाने वाले पशुओं की आबादी करीब ढाई करोड़ है. उनके लिए पानी के साथ-साथ चारे की व्यवस्था करना भी जरूरी है.

हमने पहले से तैयारी करते हुए अतिरिक्त चारे की बुवाई भी कराई थी. फिलहाल हमारे पास करीब सवा पांच दिन का चारा उपलब्ध है. हालांकि, अब यह अनुमान लगाया जा रहा है कि चारे की जरूरत अगले 200 दिनों तक पड़ सकती है. इसे ध्यान में रखते हुए हमने बांधों के आसपास उन जगहों पर भी चारा उगाने की योजना बनाई है, जहां मिट्टी में थोड़ी नमी बची हुई है. हमने किसानों से कहा है कि वे चारा उगाएं, सरकार उसे तय कीमत पर खरीदेगी.

इसके अलावा, विद्यार्थियों की परीक्षा फीस माफ कर दी गई है. किसानों और अन्य लोगों से कर्ज की वसूली भी रोक दी गई है. हालांकि, इन सभी कदमों के बावजूद मेरा मानना है कि अगले छह महीने हमारे लिए बेहद चुनौतीपूर्ण रहने वाले हैं.

यह संकट खासतौर पर मुंबई या पुणे जैसे शहरों तक सीमित नहीं है. यहां पांच-सात दिनों तक हुई मूसलाधार बारिश के कारण बांध भर गए हैं और पीने के पानी की पर्याप्त उपलब्धता है. लेकिन जैसे-जैसे आप इन शहरों से बाहर जाएंगे, स्थिति उतनी ही चुनौतीपूर्ण होती जाएगी. हम इस संकट को प्रभावी ढंग से संभालने का प्रयास कर रहे हैं.

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We Women Want Conclave 2026: वी वीमेन वांट कॉन्क्लेव 2026 में महिलाओं की भागीदारी, नेतृत्व और सशक्तिकरण से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई. इस खास मंच पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी महिलाओं को संबोधित किया और उनके योगदान, नेतृत्व और आत्मनिर्भरता को लेकर अपना संदेश दिया. इस दौरान उन्होंने महाराष्ट्र में गंभीर सूखे पर बात की और बताई की सरकार उसके लिए क्या कर रही है.

देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि ‘देखिए, यह बिल्कुल सही बात है. हमारे सभी वेदर मॉडल्स ने पहले ही अल नीनो (El Niño) के संभावित प्रभाव की ओर संकेत किया था. हमारे यहां एक बड़ी और कुछ अलग स्थिति देखने को मिली. मानसून के शुरुआती दो महीनों में औसत से ज्यादा बारिश हुई. हमें लगा कि शायद अल नीनो का कोई असर नहीं होगा. फसलें भी अच्छी थीं और कुछ बड़े बांधों में पानी भी जमा हो गया था. इसलिए हम काफी संतुष्ट थे’.

‘मानसून में नहीं हुई बारिश’

लेकिन मानसून के आखिरी दो महीनों में बारिश हुई ही नहीं. इस दौरान बारिश की कमी 50 से 80 प्रतिशत तक रही. इसका नतीजा यह हुआ कि फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गईं. करीब 80 प्रतिशत फसलों को नुकसान पहुंचा. बड़े बांधों को छोड़ दें, तो छोटे बांध, छोटे तालाब, पीने के पानी के लिए इस्तेमाल होने वाली बावड़ियां और कुएं तक सूख गए.

एक सामान्य नियम है कि जब ऑब्जर्वेशन वेल यानी निगरानी कुएं में पानी का स्तर तीन मीटर से नीचे चला जाता है, तो इसका मतलब है कि अक्टूबर से अगले मानसून तक वहां पानी की कमी हो सकती है. ऐसी स्थिति में लोगों को टैंकरों के जरिए पानी उपलब्ध कराना पड़ता है. इसलिए हम इस समय बेहद गंभीर परिस्थिति से गुजर रहे हैं.

किसानों की मदद को लेकर कही ये बात

हालांकि, हमने किसानों की मदद के लिए कई प्रयास किए हैं. उन्हें अनाज उपलब्ध कराने, नकद सब्सिडी देने और फसल के नुकसान का मुआवजा देने जैसे कदम उठाए जा रहे हैं. पानी के प्रबंधन पर भी ध्यान दिया जा रहा है. हमें सिर्फ इंसानों के लिए ही नहीं, बल्कि मवेशियों के लिए भी पानी की व्यवस्था करनी है. महाराष्ट्र में पाले जाने वाले पशुओं की आबादी करीब ढाई करोड़ है. उनके लिए पानी के साथ-साथ चारे की व्यवस्था करना भी जरूरी है.

हमने पहले से तैयारी करते हुए अतिरिक्त चारे की बुवाई भी कराई थी. फिलहाल हमारे पास करीब सवा पांच दिन का चारा उपलब्ध है. हालांकि, अब यह अनुमान लगाया जा रहा है कि चारे की जरूरत अगले 200 दिनों तक पड़ सकती है. इसे ध्यान में रखते हुए हमने बांधों के आसपास उन जगहों पर भी चारा उगाने की योजना बनाई है, जहां मिट्टी में थोड़ी नमी बची हुई है. हमने किसानों से कहा है कि वे चारा उगाएं, सरकार उसे तय कीमत पर खरीदेगी.

इसके अलावा, विद्यार्थियों की परीक्षा फीस माफ कर दी गई है. किसानों और अन्य लोगों से कर्ज की वसूली भी रोक दी गई है. हालांकि, इन सभी कदमों के बावजूद मेरा मानना है कि अगले छह महीने हमारे लिए बेहद चुनौतीपूर्ण रहने वाले हैं.

यह संकट खासतौर पर मुंबई या पुणे जैसे शहरों तक सीमित नहीं है. यहां पांच-सात दिनों तक हुई मूसलाधार बारिश के कारण बांध भर गए हैं और पीने के पानी की पर्याप्त उपलब्धता है. लेकिन जैसे-जैसे आप इन शहरों से बाहर जाएंगे, स्थिति उतनी ही चुनौतीपूर्ण होती जाएगी. हम इस संकट को प्रभावी ढंग से संभालने का प्रयास कर रहे हैं.

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