Mandsaur Ravan Tradition: देशभर में दशहरे के दिन रावण दहन करके बुराई पर अच्छाई की जीत का उत्सव मनाया जाता है. लेकिन मध्य प्रदेश के मंदसौर में रावण को लेकर एक अलग ही परंपरा देखने को मिलती है. यहां रावण को मंदोदरी का मायका होने के कारण क्षेत्र का दामाद माना जाता है और उसकी प्रतिमा के सामने महिलाएं घूंघट करती हैं. इतना ही नहीं, रावण की प्रतिमा के पैर में धागा बांधने की भी मान्यता है. आइए जानते हैं मंदसौर की इस अनोखी परंपरा के बारे में.
मंदसौर को क्यों माना जाता है रावण का ससुराल?
मध्य प्रदेश के मंदसौर को पहले दशपुर के नाम से जाना जाता था. स्थानीय मान्यता के अनुसार, यह रावण की पत्नी मंदोदरी का मायका है. इसी वजह से यहां रावण को दामाद के रूप में सम्मान दिया जाता है. मंदसौर के खानपुरा क्षेत्र में रुण्डी नामक स्थान पर रावण की लगभग 35 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित है, जिसके दस सिर हैं. स्थानीय परंपरा के मुताबिक, महिलाएं रावण की प्रतिमा के सामने से गुजरते समय घूंघट करती हैं. इसके पीछे मान्यता है कि रावण इस क्षेत्र का दामाद था और दामाद के सामने सम्मान प्रकट किया जाता है.
रावण की प्रतिमा पर क्यों लगाया गया गधे का सिर?
मंदसौर की रावण प्रतिमा की एक खास बात यह है कि उसके सिर पर गधे का सिर भी दिखाई देता है. स्थानीय लोगों के अनुसार, इसे रावण की बुद्धि भ्रष्ट होने के प्रतीक के रूप में लगाया गया है. हालांकि, यह स्थानीय मान्यता है, इसकी ऐतिहासिक प्रामाणिकता की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है. दशहरे के दिन नामदेव समाज के लोग प्रतिमा के सामने पूजा-अर्चना करते हैं. इसके बाद राम और रावण की सेनाओं से जुड़ी पारंपरिक रस्में निभाई जाती हैं. रावण वध से पहले लोग उससे क्षमा मांगते हैं और फिर विजय का उत्सव मनाते हैं.
रावण के पैर में धागा बांधने की क्या है मान्यता?
मंदसौर में रावण की प्रतिमा के पैर में धागा बांधने की भी परंपरा है. स्थानीय मान्यता है कि ऐसा करने से बीमारियों से रक्षा होती है. कुछ महिलाएं संतान सुख की कामना के साथ भी प्रतिमा के पैर में धागा बांधती हैं. ये धार्मिक विश्वास हैं, इनके स्वास्थ्य संबंधी लाभों का वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध होना अलग विषय है.
विदिशा के गांव में रावण को कहते हैं ‘बाबा’
मध्य प्रदेश के विदिशा जिले की नटेरन तहसील के रावण गांव में भी रावण की पूजा की जाती है. यहां लोग उसे सम्मान से ‘बाबा’ कहते हैं. स्थानीय मान्यता के अनुसार, किसी शुभ काम की शुरुआत और नवदंपतियों के गृह प्रवेश से पहले रावण की प्रतिमा की पूजा की जाती है.
ये भी पढ़ें: Happy Dussehra 2026 Wishes: अपनों को भेजें दशहरा की ये खास शुभकामनाएं, Wishes, Quotes और Messages
कितनी पुरानी है मंदसौर की रावण प्रतिमा?
स्थानीय मान्यता के मुताबिक, मंदसौर में स्थापित रावण की प्रतिमा लगभग 200 साल पुरानी है. प्राकृतिक आपदाओं के कारण इसकी कई बार मरम्मत भी की जा चुकी है. यहां रावण से जुड़ी परंपराएं लंबे समय से स्थानीय संस्कृति का हिस्सा बनी हुई हैं. मंदसौर की रावण परंपरा दिखाती है कि भारत में एक ही धार्मिक पात्र को अलग-अलग क्षेत्रों में अलग नजरिए से देखा जाता है. यहां रावण को दामाद मानकर सम्मान दिया जाता है, जबकि अन्य जगहों पर दशहरे के दिन उसका दहन किया जाता है. इन परंपराओं का आधार मुख्य रूप से स्थानीय मान्यताएं और सांस्कृतिक रीति-रिवाज हैं.