<
Categories: देश

व्हीलचेयर पर बैठ करते रहे ड्यूटी, जानें कैसे एक आईआईटियन ने कॉर्पोरेट सपने के बजाय देश सेवा को चुना

Manohar Parrikar: एक साल से ज़्यादा समय तक देश ने देखा कि एक लाइलाज बीमारी से जूझ रहे एक आदमी ने अपनी ड्यूटी पूरी की. वह व्हीलचेयर पर मीटिंग में शामिल हुए अपने बिस्तर से काम किया और यह पक्का किया कि सरकार काम करे.

 Manohar Parrikar: जब मनोहर पर्रिकर ने 1970 के दशक में IIT-बॉम्बे से मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग में डिग्री ली तो आम रास्ता उन्हें अमेरिका ले जाता. अपने कई साथियों की तरह वे सिलिकॉन वैली की भीड़ में शामिल हो सकते थे विदेश में आरामदायक जिंदगी बना सकते थे और कॉर्पोरेट में तरक्की कर सकते थे. इसके बजाय उन्होंने राजनीति को चुना. इसके बाद 25 साल का सफर शुरू हुआ जिसने उन्हें भारत में मुख्यमंत्री बनने वाला पहला IITian बना दिया और शायद गोवा का अब तक का सबसे बड़ा नेता.

व्यवसायिक परिवार से थे मनोहर

मनोहर गोपाळकृष्ण प्रभु पर्रिकर का जन्म 13 दिसंबर 1955 को गोवा के मापुसा में हुआ. वे पर्रा गांव के एक सामान्य व्यवसायिक परिवार से थे उनका नाम ‘पर्रिकर’ ही उनके गांव से आया. बचपन से ही उनकी पढ़ाई में प्रतिभा थी जिससे वे भारत के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी-बॉम्बे तक पहुंचे.

RSS में हुए शामिल

IIT में बिताए उनके सालों ने न सिर्फ उनके टेक्निकल दिमाग को बल्कि दुनिया को देखने के उनके नजरिए को भी बनाया. वह अपनी जवानी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) में शामिल हो गए जहां उन्होंने राष्ट्रवाद और अनुशासन के मूल्यों को अपनाया. ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने मेसर्स गोवा हाइड्रोलिक्स लिमिटेड एक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट को मैनेज किया. पॉलिटिक्स उनके रडार पर नहीं थी.

चुनाव लड़ने को लेकर परिवार परेशान

जब उन्होंने घर पर अनाउंस किया कि वह चुनाव लड़ेंगे तो उनका परिवार बहुत परेशान हुआ. उनकी पत्नी और माता-पिता समझ नहीं पा रहे थे कि वह पॉलिटिक्स के लिए एक अच्छी नौकरी क्यों छोड़ रहे हैं. लेकिन पर्रिकर ने अपनी बात रखी. वह दिन में काम करते थे और रातें पार्टी के सिंबल पेंट करने और कैंपेनिंग में बिताते थे. जब पीछे हटने का समय आया तो उन्होंने चुपचाप ऐसा किया, बिना यह बताए कि यह शुरू से ही उनका प्लान था. परिवार का गुस्सा आखिरकार शांत हो गया लेकिन बीज बो दिया गया था.

1991 में लड़े पहला चुनाव

1991 में उन्होंने नॉर्थ गोवा लोकसभा सीट के लिए BJP के कैंडिडेट के तौर पर अपना पहला चुनाव लड़ा. वह हार गए उन्हें कांग्रेस कैंडिडेट के 88139 वोटों के मुकाबले 26003 वोट मिले. लेकिन वह डटे रहे. 1994 में उन्होंने पणजी असेंबली सीट से चुनाव लड़ा और जीत गए. एक लॉमेकर के तौर पर उनका सफर शुरू हो गया था.

2000 में बने गोवा के पहले BJP चीफ मिनिस्टर

अक्टूबर 2000 में पर्रिकर गोवा के पहले BJP चीफ मिनिस्टर बने. अगले दो दशकों में उन्होंने गोवा की पॉलिटिक्स पर किसी और की तरह दबदबा बनाया. जो चीज उन्हें सबसे अलग बनाती थी वह थी उनका स्टाइल. उनकी ट्रेडमार्क हाफ-स्लीव अनटके शर्ट और लेदर सैंडल उनकी पहचान बन गए. बाद में दिल्ली में जब वे डिफेंस मिनिस्टर बने तो वे उत्तर भारत की कड़ाके की सर्दियों में भी वही सैंडल पहनते थे यह एक शांत बात थी कि वे दिल से गोवा के ही हैं. 

टेक्नोक्रेट चीफ मिनिस्टर

उनके IIT बैकग्राउंड ने उन्हें एक “टेक्नोक्रेट चीफ मिनिस्टर” के तौर पर पहचान दिलाई जो फाइलों, नंबरों और इम्प्लीमेंटेशन को समझते थे. 2000 से 2005 के बीच अपने कार्यकाल के दौरान और बाद के कार्यकालों में भी उन्होंने ठोस नतीजों पर ध्यान दिया. जब आलोचकों ने कहा कि गोवा में एक बड़े फिल्म इवेंट को होस्ट करने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी है तो उन्होंने यह पक्का किया कि 2004 में इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया राज्य में आए और यह एक रेगुलर फीचर बन जाए. उन्होंने रोड इंफ्रास्ट्रक्चर को प्राथमिकता दी और मंडोवी नदी पर अटल सेतु पुल जो उनके आखिरी दिनों में पूरा हुआ  इस इलाके में ट्रैफिक जाम का एक पक्का हल बना हुआ है.

भारत के रक्षा मंत्री

नवंबर 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पर्रिकर को दिल्ली बुलाया. गोवा के मुख्यमंत्री से भारत के रक्षा मंत्री बनना एक बड़ा बदलाव था. गोवा से बहुत ज़्यादा जुड़े होने के बावजूद पर्रिकर ने जिम्मेदारी स्वीकार की.रक्षा मंत्री के तौर पर उनका सबसे बड़ा योगदान वन रैंक, वन पेंशन (OROP) स्कीम को लागू करना था. जब फाइनेंस और रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने फाइनेंशियल असर के बारे में चिंता जताई तो पर्रिकर ने वही किया जो वे सबसे अच्छा करते थे  उन्होंने फाइनेंशियल फ्लोचार्ट तैयार किए और लागत का अंदाज़ा लगाया ताकि यह दिखाया जा सके कि यह मुमकिन है. उनका तर्क आसान था अगर प्रधानमंत्री ने वादा किया था तो उसे पूरा किया जाना चाहिए.

उन्होंने डिफेंस खरीद को भी आसान बनाया मॉडर्नाइज़ेशन, पर ज़ोर दिया और सेना को लड़ने के लिए तैयार करने के लिए शेकटकर कमेटी की सिफारिशों को लागू किया. उनके कार्यकाल के दौरान हुई सर्जिकल स्ट्राइक ने सीमा पार आतंकवाद के प्रति भारत के बदले हुए नज़रिए को दिखाया. उन्होंने डिफेंस सेक्टर में ‘मेक इन इंडिया’ पहल के ज़रिए स्वदेशी प्रोडक्शन पर ज़ोर दिया.

2018 की शुरुआत में पर्रिकर को पैंक्रियाटिक कैंसर का पता चला. किसी भी लीडर के लिए यह पीछे हटने हेल्थ और परिवार पर ध्यान देने का समय होता. लेकिन गोवा पॉलिटिकल उतार-चढ़ाव में था कोई स्टेबल सरकार नजर नहीं आ रही थी. अपनी खराब हेल्थ के बावजूद वह चीफ मिनिस्टर के तौर पर चार्ज संभालने के लिए वापस लौटे.

एक साल से ज़्यादा समय तक देश ने देखा कि एक लाइलाज बीमारी से जूझ रहे एक आदमी ने अपनी ड्यूटी पूरी की. वह व्हीलचेयर पर मीटिंग में शामिल हुए अपने बिस्तर से काम किया और यह पक्का किया कि सरकार काम करे. उन्होंने अटल सेतु को पूरा होते देखा वह पुल जिसका उन्होंने सालों पहले सपना देखा था. अपने आखिरी दिनों में भी ड्यूटी के प्रति उनका कमिटमेंट कभी कम नहीं हुआ.

2019 में निधन

17 मार्च 2019 को मनोहर पर्रिकर का 63 साल की उम्र में निधन हो गया. उनके निधन पर पार्टी लाइन से हटकर दुख जताया गया जो आज की बंटी हुई पॉलिटिक्स में एक रेयर ट्रिब्यूट है. प्राइम मिनिस्टर से लेकर अपोज़िशन लीडर्स तक आम लोगों से लेकर पॉलिटिकल राइवल्स तक सभी ने माना कि वह क्या रिप्रेजेंट करते थे.

मनोहर पर्रिकर सिलिकॉन वैली में कॉर्पोरेट करियर का आराम चुन सकते थे. इसके बजाय उन्होंने पब्लिक सर्विस की अनिश्चितता और मेहनत को चुना. IITians की एक पीढ़ी के लिए जो राजनीति को एक गंदा काम मानती है उनका जीवन एक उलटफेर है और यह याद दिलाता है कि देश को खराब नौकरियों में अच्छे लोगों की जरूरत है.

Divyanshi Singh

दिव्यांशी सिंह उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले की रहने वाली हैं। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की पढ़ाई की है और पिछले 4 सालों से ज्यादा वक्त से पत्रकारिता के क्षेत्र में हैं। जियो-पॉलिटिक्स और स्पोर्टस में काम करने का लंबा अनुभव है।

Recent Posts

भविष्य निर्माण के 5 गौरवशाली वर्ष: सार्वजनिक यूनिवर्सिटी मनाएगी स्थापना वर्ष का माहव्यापी उत्सव

1 जून से 30 जून तक शैक्षणिक, सांस्कृतिक, सामाजिक एवं पर्यावरणीय गतिविधियों की श्रृंखला आयोजित…

Last Updated: June 4, 2026 17:07:10 IST

एनजी ब्रांड की सूरत में दोबारा एंट्री, भव्य शुरुआत के साथ खुला एनजी मॉल

मॉल की आय का 60 प्रतिशत हिस्सा समाजसेवा में होगा खर्च, गरीब मरीजों के उपचार…

Last Updated: June 6, 2026 21:58:08 IST

IFS आशुतोष कुमार ने बताया बच्चों के लिए सिविल सर्विस और राष्ट्रसेवा का सफलता मंत्र

नई दिल्ली, 19 मई:  युवा पीढ़ी को राष्ट्रसेवा और प्रशासनिक सेवाओं के प्रति प्रेरित करने…

Last Updated: June 3, 2026 20:22:09 IST

SBS University के छात्र, देश की Top Pharma Companies में

Copmed, Macleods, Intas, Enzene, Akums और 4 और कंपनियों ने SBS University के छात्रों को…

Last Updated: June 3, 2026 20:07:07 IST

UP Politics: अवध में ‘ब्राह्मण कार्ड’ खेलेगी भाजपा? 2027 से पहले सांगठनिक फेरबदल की सुगबुगाहट तेज

UP Politics: अवध में 'ब्राह्मण कार्ड' की तैयारी में BJP? जानिए क्यों अचानक संगठन में…

Last Updated: June 3, 2026 18:41:28 IST