Medical College News: NMC ने श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस (SMVDIME) को लेकर एक अहम फैसला लिया है. इस फैसले के तहत MBBS कोर्स चलाने की अनुमति (LoP) वापस ले ली है.
Medical College News: नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने एक सख्त कदम उठाते हुए श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस (SMVDIME) को शैक्षणिक सेशन 2025-26 के लिए MBBS कोर्स चलाने की दी गई अनुमति (LoP) वापस ले ली है. यह फैसला हाल ही में हुए एक असेसमेंट के बाद लिया गया, जिसमें कॉलेज में बुनियादी ढांचे, फैकल्टी और क्लिनिकल सुविधाओं से जुड़ी गंभीर खामियां सामने आईं.
NMC की असेसमेंट टीम ने पाया कि संस्थान न्यूनतम मानक आवश्यकताओं (MSR) का पालन करने में असफल रहा. इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार टीचिंग फैकल्टी में लगभग 39 प्रतिशत और ट्यूटर व सीनियर रेजिडेंट स्टाफ में करीब 65 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई. इसके अलावा अस्पताल में मरीजों की संख्या, बेड ऑक्यूपेंसी और ICU उपयोग निर्धारित मानकों से काफी कम पाई गई.
असेसमेंट में यह भी सामने आया कि कई विभागों में पर्याप्त प्रैक्टिकल और रिसर्च लैब नहीं थीं. लेक्चर थिएटर न्यूनतम मानकों पर खरे नहीं उतरे और लाइब्रेरी में जरूरी किताबों व मेडिकल जर्नल्स की भारी कमी पाई गई. अस्पताल में ART सेंटर, MDR-TB सुविधा, पर्याप्त ऑपरेशन थिएटर और अलग पुरुष-महिला वार्ड जैसी जरूरी व्यवस्थाएं भी या तो मौजूद नहीं थीं या अधूरी थीं.
NMC के नियमों के अनुसार, 50 MBBS सीटों वाले नए मेडिकल कॉलेज के लिए कम से कम 220 बेड का पूरी तरह कार्यरत टीचिंग हॉस्पिटल, पर्याप्त फैकल्टी, आधुनिक लेक्चर थिएटर, स्किल्स लैब, लाइब्रेरी और रूरल व अर्बन हेल्थ ट्रेनिंग सेंटर अनिवार्य हैं. इन सभी मानकों को पूरे शैक्षणिक वर्ष तक बनाए रखना जरूरी होता है.
इस फैसले से सबसे बड़ी चिंता 2025-26 सत्र में एडमिशन ले चुके छात्रों को लेकर थी. NMC ने स्पष्ट किया है कि सभी 50 MBBS छात्रों को जम्मू-कश्मीर के अन्य मान्यता प्राप्त सरकारी मेडिकल कॉलेजों में ट्रांसफर किया जाएगा. इन्हें सुपरन्यूमेरी सीटों पर एडजस्ट किया जाएगा, ताकि उनकी पढ़ाई पर कोई असर न पड़े.
NMC ने नियमों के उल्लंघन को देखते हुए संस्थान की 15 करोड़ रुपये की परफॉर्मेंस बैंक गारंटी को भुनाने का भी आदेश दिया है. यह गारंटी मेडिकल कॉलेजों से यह सुनिश्चित करने के लिए ली जाती है कि वे सभी रेगुलेटरी मानकों का पालन करें. हालांकि, SMVDIME प्रशासन ने इन निष्कर्षों से असहमति जताई है. संस्थान का कहना है कि निरीक्षण सर्दियों की छुट्टियों के दौरान हुआ, जब कई फैकल्टी सदस्य अवकाश पर थे, जिससे वास्तविक स्थिति सही तरीके से सामने नहीं आ सकी.
NMC का यह फैसला साफ संदेश देता है कि मेडिकल शिक्षा में गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा. साथ ही, छात्रों के हितों की रक्षा को प्राथमिकता देते हुए रेगुलेटर ने यह भी सुनिश्चित किया है कि प्रभावित छात्रों का भविष्य सुरक्षित रहे.
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