Petrol Diesel Windfall Tax: वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता के बीच केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर लगने वाले कुछ शुल्कों में कटौती की है. एटीएफ के निर्यात पर विंडफॉल टैक्स 22 रुपये से घटाकर 19.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है. डीजल पर 24 रुपये प्रति लीटर का विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क बरकरार है, लेकिन 1.5 रुपये प्रति लीटर रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस को शून्य कर दिया गया है.
ATF और पेट्रोल-डीजल पर घटा विंडफॉल टैक्स
Petrol Diesel Windfall Tax: वैश्विक स्तर पर ऊर्जा बाजार में बनी अस्थिरता के बीच भारत सरकार ने फ्यूल एक्सपोर्ट से जुड़े टैक्स में बदलाव किया है. सरकार ने विमानन टरबाइन ईंधन यानी एटीएफ और पेट्रोल-डीजल के निर्यात पर लगाए जाने वाले कुछ शुल्कों में कटौती की है. वित्त मंत्रालय की ओर से शुक्रवार देर रात जारी अधिसूचना के मुताबिक, संशोधित दरें शनिवार से प्रभावी हो गई हैं. हालांकि, इस फैसले का सीधा असर घरेलू स्तर पर पेट्रोल और डीजल खरीदने वाले उपभोक्ताओं के उत्पाद शुल्क पर नहीं पड़ा है. सरकार ने साफ किया है कि घरेलू खपत के लिए पेट्रोल और डीजल पर लागू मौजूदा उत्पाद शुल्क दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है.
सरकार के ताजा फैसले के तहत एटीएफ के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल गेन्स टैक्स में 2.5 रुपये प्रति लीटर की कटौती की गई है. पहले यह टैक्स 22 रुपये प्रति लीटर था, जिसे घटाकर अब 19.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है. विमानन क्षेत्र के लिए एटीएफ एक महत्वपूर्ण ईंधन है और इसकी कीमतों में अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियों का प्रभाव रहता है. ऐसे में निर्यात पर टैक्स में बदलाव का असर तेल कंपनियों और रिफाइनिंग क्षेत्र से जुड़ी गतिविधियों पर पड़ सकता है.
डीजल के मामले में सरकार ने विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क को 24 रुपये प्रति लीटर पर बरकरार रखा है. हालांकि, रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस में बड़ी राहत दी गई है. इस सेस को 1.5 रुपये प्रति लीटर से घटाकर शून्य कर दिया गया है. यानी डीजल के निर्यात पर एक प्रमुख अतिरिक्त शुल्क में कोई बदलाव नहीं हुआ है, जबकि रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस को पूरी तरह हटा दिया गया है. इससे निर्यात के लिहाज से डीजल पर लगने वाले कुल शुल्क के बोझ में कमी आएगी.
पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाले रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस को भी शून्य कर दिया गया है. सरकार के इस कदम से पेट्रोल निर्यात से जुड़े शुल्क ढांचे में बदलाव हुआ है. यह फैसला ऐसे समय आया है, जब अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में कीमतों और आपूर्ति को लेकर लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. सरकार अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियों के आधार पर पेट्रोलियम उत्पादों पर लगाए जाने वाले निर्यात शुल्क की समय-समय पर समीक्षा करती है.
इस फैसले को लेकर सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल पर लागू उत्पाद शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया गया है. यानी निर्यात शुल्क में की गई इस कटौती को सीधे घरेलू पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कमी के तौर पर नहीं देखा जा सकता. सरकार ने स्पष्ट किया है कि घरेलू खपत के लिए पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा उत्पाद शुल्क की दरें पहले की तरह ही बनी रहेंगी. इसलिए इस बदलाव का मुख्य संबंध पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात से है.
वहीं, देश के ज्यादातर प्रमुख महानगरों में डीजल की कीमत 100 रुपये प्रति लीटर से नीचे बनी रही. घरेलू कीमतों में स्थिरता के बीच सरकार ने निर्यात से जुड़े शुल्कों में बदलाव किया है. पश्चिम एशिया के ऊर्जा संकट के बाद बढ़ाया गया था टैक्स विंडफॉल टैक्स में मौजूदा कटौती को पश्चिम एशिया में ऊर्जा संकट के घटनाक्रम से भी जोड़कर देखा जा रहा है. ऊर्जा बाजार में संकट बढ़ने के बाद सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर शुल्क में बढ़ोतरी की थी. अब ऊर्जा बाजार की परिस्थितियों में कुछ राहत मिलने के बाद इन शुल्कों में दोबारा कटौती की गई है. इससे पहले भी सरकार अंतरराष्ट्रीय कीमतों और रिफाइनिंग मार्जिन में बदलाव के अनुसार पेट्रोल, डीजल और एटीएफ पर निर्यात शुल्क को संशोधित करती रही है.
गौरतलब है कि इसी सप्ताह की शुरुआत में केंद्र सरकार ने पेट्रोल, डीजल और एटीएफ पर निर्यात शुल्क में बढ़ोतरी की थी. अब ताजा समीक्षा के बाद कुछ शुल्कों को कम कर दिया गया है. सरकार का यह कदम बताता है कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में बदलाव के साथ पेट्रोलियम उत्पादों से जुड़े टैक्स ढांचे में भी तेजी से बदलाव किया जा रहा है. इसका मुख्य उद्देश्य घरेलू बाजार और निर्यात के बीच संतुलन बनाए रखने के साथ अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के अनुरूप शुल्क व्यवस्था को समायोजित करना है.
इस फैसले के बाद सबसे बड़ा सवाल घरेलू उपभोक्ताओं को लेकर है. चूंकि सरकार ने घरेलू खपत वाले पेट्रोल और डीजल के उत्पाद शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया है, इसलिए केवल इस फैसले के आधार पर पेट्रोल-डीजल के खुदरा दाम घटने की उम्मीद नहीं की जा सकती. फिलहाल सरकार का फैसला मुख्य रूप से निर्यात किए जाने वाले पेट्रोलियम उत्पादों पर लागू शुल्क से संबंधित है. घरेलू बाजार में कीमतों पर अलग-अलग कारकों का प्रभाव पड़ता है और इस फैसले को सीधे पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कटौती से जोड़ना सही नहीं होगा.
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