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क्या है पोर्श कार एक्सीडेंट केस? जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने 18 महीने बाद दी आरोपी आदित्य को बेल; पूरा मामला जान ठनक जाएगा माथा

Pune Porsche Case:सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को तीन आरोपियों को जमानत दे दी जिन पर 2024 में पुणे में हुए पोर्श एक्सीडेंट के बाद ब्लड सैंपल बदलने की साज़िश रचने का आरोप है.जिसमें दो लोगों की मौत हो गई थी.

Pune Porsche Case: सुप्रीम कोर्ट ने पुणे में हुए बहुत चर्चित पोर्श कार एक्सीडेंट केस में एक अहम फैसला सुनाते हुए आरोपी आदित्य अविनाश सूद को रेगुलर बेल दे दी है. आदित्य सूद इस केस के 10 आरोपियों में से एक मुख्य आरोपी था. उसके साथ कोर्ट ने आशीष मित्तल और अमर गायकवाड़ को भी बेल पर रिहा करने का आदेश दिया.  यह केस 19 मई 2024 की रात का है जब पुणे के कल्याणी नगर इलाके में एक नाबालिग जो कथित तौर पर नशे में था, पोर्श कार चला रहा था ने दो IT प्रोफेशनल्स को कुचल दिया जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई.

पिछले साल हुई गिरफ्तारियां

52 साल के आदित्य अविनाश सूद और 37 साल के आशीष सतीश मित्तल को पिछले साल 19 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था. उन पर आरोप था कि उन्होंने एक्सीडेंट के समय मुख्य आरोपी के साथ कार में मौजूद दो दूसरे नाबालिगों के साथ ब्लड सैंपल की अदला-बदली की, ताकि जांच को प्रभावित किया जा सके.

शर्तों के साथ बेल

आदित्य सूद की तरफ से सीनियर एडवोकेट प्रशांत पाटिल और एडवोकेट आबिद मुलानी कोर्ट में पेश हुए. बेल कन्फर्म करते हुए, एडवोकेट प्रशांत पाटिल ने कहा कि कोर्ट ने राहत देते समय कुछ शर्तें लगाई हैं. उन्होंने कहा कि उनका क्लाइंट जांच एजेंसी के साथ पूरा सहयोग करेगा और सबूतों के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की जाएगी. इस मामले ने पूरे देश में काफी ध्यान खींचा था, खासकर ब्लड सैंपल में कथित बदलाव और जांच को गुमराह करने की कोशिशों को लेकर पुलिस और प्रशासन पर सवाल उठाए थे.

जश्न मनाने का मतलब गरीबों को कुचलना नहीं है – कोर्ट

जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने पुणे पोर्श एक्सीडेंट पर नाराजगी जताते हुए कहा कि जश्न मनाने का मतलब तेज स्पीड में गाड़ी चलाना और फुटपाथ पर लोगों या गरीबों को कुचलना नहीं है. उन्होंने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब ऐसी घटना हुई है. अब कानून को और सख्त किया जाना चाहिए. जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि माता-पिता की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है. जज ने कहा कि वे बच्चों को मजे करने के लिए पैसे देते हैं. माता-पिता के पास अपने बच्चों से बात करने उनके साथ समय बिताने का समय नहीं हैं. तो फिर वो इसकी भरपाई पैसे, एटीएम कार्ड देकर करते है.

18 महीने बाद मिली जमानत

कोर्ट ने कहा कि ऐसे हालात में बच्चे मोबाइल फ़ोन की मदद से आज़ादी से घूम सकते हैं. हालांकि, कोर्ट ने आज इस मामले में गिरफ्तार तीन आरोपियों को ज़मानत दे दी, जिन पर नाबालिग आरोपी को बचाने के लिए उसका ब्लड सैंपल बदलने का आरोप है. कोर्ट ने कहा कि आरोपी 18 महीने से जेल में हैं, इसलिए ज़मानत दी जा रही है. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि ज़मानत की शर्तें निचली अदालत तय करेगी.

Divyanshi Singh

दिव्यांशी सिंह उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले की रहने वाली हैं। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की पढ़ाई की है और पिछले 4 सालों से ज्यादा वक्त से पत्रकारिता के क्षेत्र में हैं। जियो-पॉलिटिक्स और स्पोर्टस में काम करने का लंबा अनुभव है।

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