Rajiv Gandhi Love Story: सोनिया ने राजीव को जब पहली बार देखा तो वह शांत और हैंडसम, बहुत विनम्र, दूसरों से अलग थे .एक दिन जब सोनिया वहां लंच कर रही थीं तो राजीव अपने कॉमन दोस्त क्रिश्चियन वॉन स्टिग्लिट्ज़ के साथ अंदर आए.
कैसे सोनिया को राजीव से हुआ था प्यार
Rajiv Gandhi and Sonia Gandhi love story: भारत को 21वीं सदी में ले जाने का सपना देखने वाले राजीव गांधी ने अपना पॉलिटिकल करियर इतनी तेज़ी से शुरू किया कि उसका अंत भी उतने ही दुखद हालात में हुआ. 40 साल की उम्र में प्रधानमंत्री बनने के बाद, वे भारत के सबसे कम उम्र के प्रधानमंत्रियों में से एक थे. उनकी जयंती हर साल 20 अगस्त को ‘गुडविल डे’ के तौर पर मनाई जाती है. राजीव गांधी का जन्म 20 अगस्त, 1944 को मुंबई (तब बॉम्बे) में हुआ था. वे एक ऐसे परिवार में पले-बढ़े, जहां राजनीति और सत्ता देश के इतिहास में गहराई से जुड़ी हुई थी. उनके दादा, जवाहरलाल नेहरू, आज़ाद भारत के पहले प्रधानमंत्री थे, और उनकी माँ, इंदिरा गांधी, बाद में प्रधानमंत्री बनीं. उन्होंने अपना ज़्यादातर बचपन दिल्ली के तीन मूर्ति भवन में बिताया. राजीव गांधी की लव स्टोरी भी काफी चर्चा में रहीं. बहुत कम लोगोंं को पता होगा कि सोनिया का परिवार इस शादी के खिलाफ था और उनके पिता ने शादी के पहले एक बड़ी शर्त रखी थी.
सोनिया 7 जनवरी 1965 को कैम्ब्रिज पहुंचीं.उन्होंने दो मुख्य लैंग्वेज स्कूलों में से एक में एडमिशन लिया. उस समय, कैम्ब्रिज में एक सिस्टम था जहां यूनिवर्सिटी विदेशी स्टूडेंट्स के लिए एक परिवार के घर पर रहने का इंतज़ाम करती थी. सोनिया को एक घर भी अलॉट किया गया था.
उन्हें वहां का खाना पसंद नहीं था. शुरू में, उन्हें इंग्लिश बोलने में दिक्कत होती थी. हालांकि, उन्हें कैंपस में एक ग्रीक रेस्टोरेंट मिला जो इटैलियन खाना भी सर्व करता था. इसका नाम वर्सिटी था. यह यूनिवर्सिटी के युवाओं के बीच बहुत पॉपुलर था. सोनिया वहाँ रेगुलर खाना खाने लगीं. स्टूडेंट्स के लिए कीमतें सस्ती थीं. राजीव गांधी भी अक्सर दोस्तों से मिलने आते थे.
यहीं पर सोनिया ने राजीव को देखा. वह शांत और हैंडसम, बहुत विनम्र, दूसरों से अलग थे .एक दिन जब सोनिया वहां लंच कर रही थीं तो राजीव अपने कॉमन दोस्त क्रिश्चियन वॉन स्टिग्लिट्ज़ के साथ अंदर आए. तभी उनकी मुलाकात हुई. सोनिया गांधी ने अपनी बायोग्राफी, “सोनिया गांधी – एन एक्स्ट्राऑर्डिनरी लाइफ, एन इंडियन डेस्टिनी” की राइटर रानी सिंह को बताया कि उन्हें राजीव से पहली नज़र में प्यार हो गया था. राजीव को भी ऐसा ही लगा, जैसा राजीव ने उन्हें बताया था. उन्होंने पहले ही क्रिश्चियन से सोनिया से मिलवाने के लिए कहा था.
इसके बाद वे दोस्त बन गए. दोनों करीब आ गए. नेहरू-गांधी परिवार में लंबे लेटर लिखने का ट्रेडिशन था, और राजीव ने भी वही किया. जब वह अपनी माँ, इंदिरा गांधी को लेटर लिखते थे, तो वह उन्हें कैंपस, अपनी पढ़ाई, अपनी ज़िंदगी और अपने डेली रूटीन के बारे में सब कुछ बताते थे. जल्द ही, सोनिया गांधी भी उनके खतों में शामिल हो गईं, और वह उनसे उनका ज़िक्र करने लगे.
दोनों अपने परिवार से दूर, टेंशन-फ्री और इंडिपेंडेंट रहते थे. उन दिनों राजीव के पास एक पुरानी लाल फॉक्सवैगन थी. वह रोज सोनिया के घर जाते थे. वह और सोनिया अक्सर छुट्टियों में दूसरे दोस्तों के साथ लंबी कार राइड पर जाते थे. वे फ्यूल का खर्च शेयर करते थे. कभी-कभी, वह सोनिया के साथ सिल्वरस्टोन में कार रेसिंग देखने जाते थे. आज भी, सिल्वरस्टोन कार रेसिंग के लिए दुनिया भर में मशहूर ट्रैक है. कई फॉर्मूला वन टीमों ने इस ट्रैक को अपना बेस बनाया है.
कैम्ब्रिज के सभी स्टूडेंट्स को घर से कम इनकम होने की वजह से पैसे की दिक्कतों का सामना करना पड़ता था. इस वजह से उन्हें अपने खाली समय में छोटे-मोटे काम करने पड़ते थे. राजीव एक कोऑपरेटिव बेकरी में काम करते थे. वह ब्रेड सेक्शन में थे.
किताब में लिखा है, “सोनिया ऐसी इंसान थीं जिनके पास हमेशा काफी पैसे होते थे; यहां तक कि जब महीने के आखिर तक उनके दोस्तों की जेबें खाली हो जाती थीं, तब भी उनके पास पैसे होते थे.” किताब में, राजीव के कैम्ब्रिज के दिनों के दोस्त, ताहिर जहांगीर ने कहा, “सोनिया हमेशा अच्छे कपड़े पहनती थीं और हमेशा खुश रहती थीं.”
उस समय, कैम्ब्रिज में लड़के और लड़कियों का रेश्यो 12:1 था. इसका मतलब था कि लड़के ज़्यादा थे और लड़कियां कम. लंबे, घने काले बालों वाली पतली सोनिया उस समय कैम्ब्रिज शहर की सबसे खूबसूरत महिला थीं. वह अपने अच्छे लुक्स को लेकर भी बहुत अवेयर थीं.राजीव को फोटोग्राफी का शौक था. उन्होंने सोनिया की कई तस्वीरें लीं. राजीव उनके लिए बहुत खास बन गए. हालांकि वे अलग-अलग दुनिया से थे, लेकिन यह उनकी ज़िंदगी का सबसे खुशी का समय था. वे आज़ाद, खुश और अपनी ज़िंदगी का मज़ा ले रहे थे.
जब राजीव ने पहली बार अपनी मां इंदिरा को लिखे एक लेटर में सोनिया के लिए अपनी फीलिंग्स बताईं, तो वह उन्हें उनसे मिलवाना भी चाहते थे. इंदिरा जब सोनिया से मिली तो उन्होंने सोनिया से फ्रेंच में बात की यह जानते हुए कि वह इंग्लिश के मुकाबले फ्रेंच में ज़्यादा कम्फर्टेबल महसूस करती हैं. उन्होंने उनकी पढ़ाई के बारे में पूछा. इंदिरा ने सोनिया को अपने साथ अपने रिश्ते में कम्फर्टेबल महसूस कराने की कोशिश की. इस बीच सोनिया के परिवार को इस रिश्ते से दिक्कतें थीं.
सोनिया ने सच में राजीव के साथ आगे बढ़ने का मन बना लिया था. जब वह इटली के ओरबासानो में अपने घर गईं, तो उन्होंने इस बार अपने परिवार से बात करने का फैसला किया था. लेकिन उनका परिवार खुश नहीं था, और वह भारी मन से कैम्ब्रिज लौट आईं. हालांकि, यह सब जानने के बाद, उनका परिवार नहीं चाहता था कि वह कैम्ब्रिज वापस जाएं.
राजीव ने अब इंपीरियल कॉलेज लंदन में मैकेनिकल इंजीनियरिंग कोर्स के लिए एडमिशन ले लिया था, इसलिए दोनों सिर्फ वीकेंड पर मिलते थे. सोनिया अपने सख्त पिता से डरती थीं. फिर भी, उन्होंने शादी करने और भारत में रहने का फैसला किया. जुलाई 1966 में सोनिया इटली लौट आईं. राजीव ने सोनिया के पिता स्टेफानो से भी मिलने का फैसला किया. उन्होंने एक कंस्ट्रक्शन साइट पर काम करके इतने पैसे कमाए कि वे ऐसा कर सकें. सोनिया और राजीव दोनों एक-दूसरे को रोज़ाना खत लिखते थे. राजीव ने अब अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई छोड़ दी थी और पायलट का लाइसेंस लेने के लिए ट्रेनिंग शुरू कर दी थी.
नवंबर 1966 में राजीव सोनिया के माता-पिता से मिलने इटली गए ताकि उन्हें रिश्ते का भरोसा दिला सकें. राजीव वहाँ बहुत इम्प्रेस हुए. उन्हें लगा कि राजीव एक अच्छे इंसान हैं और उनके इरादे भी अच्छे हैं. तब भी, स्टेफ़ानो शादी के लिए राज़ी होने में झिझक रहे थे. उन्हें चिंता थी कि उनकी बेटी विदेश में कैसे रहेगी. सोनिया ने किताब के लेखक को बताया, “उनके पिता ने उन्हें रिश्ता आगे न बढ़ाने के लिए मनाने की बहुत कोशिश की. जब उन्हें लगा कि सोनिया नहीं मानेंगी, तो उन्होंने एक शर्त रखी वे शादी से पहले कम से कम एक साल इंतज़ार करें. और अगर उस दौरान उनका प्यार बना रहा, तो वह सोनिया को राजीव के देश जाने देंगे, लेकिन अगर शादी में कुछ भी गलत हुआ तो वह उन्हें दोष नहीं दे सकती थीं.”
सोनिया ने 12 महीने इंतज़ार किया. स्टेफ़ानो को लगा कि इटली में उनके साथ एक साल बिताने के बाद उनकी बेटी राजीव को भूल जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. 13 जनवरी, 1968 को सोनिया दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरीं. जब सोनिया गांधी पहली बार दिल्ली के पालम एयरपोर्ट पर उतरीं, तो अमिताभ बच्चन कड़ाके की ठंड में उन्हें लेने के लिए राजीव गांधी के साथ मौजूद थे.जब सोनिया गांधी पहली बार 13 जनवरी, 1968 को भारत आईं, तो वह राजीव गांधी की मंगेतर थीं. भारतीय परंपरा के अनुसार, होने वाली बहू शादी से पहले अपने ससुराल (प्रधानमंत्री के घर) में नहीं रुक सकती थी.क्योंकि इंदिरा गांधी नहीं चाहती थीं कि सोनिया किसी होटल में रुकें, इसलिए वह दिल्ली के विलिंगडन क्रेसेंट में अपने सबसे करीबी फैमिली फ्रेंड्स, हरिवंश राय बच्चन और तेजी बच्चन के घर पर रुकीं.
सोनिया गांधी और राजीव गांधी की शादी 25 फरवरी, 1968 को हुई थी. शादी नई दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास, 1, सफदरजंग रोड के गार्डन में एक सादे सेरेमनी में हुई थी. शादी हिंदू रीति-रिवाजों और वैदिक मंत्रों के साथ हुई, जिसमें कपल ने एक-दूसरे को माला पहनाई, अंगूठियां बदलीं और मैरिज रजिस्ट्रार के सामने कानूनी तौर पर डॉक्यूमेंट्स पर साइन किए. सोनिया गांधी ने हल्के गुलाबी रंग की खादी साड़ी पहनी थी, जिसे जवाहरलाल नेहरू ने जेल में रहते हुए खुद काता था. इंदिरा गांधी ने भी अपनी शादी में इसे पहना था.
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