Somnath Swabhiman Parv: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज जब मैं आपसे बात कर रहा हूं तो बार-बार मन में प्रश्न आ रहा है कि ठीक 1000 वर्ष पहले ठीक इसी जगह पर क्या माहौल रहा होगा?
Somnath Swabhiman Parv
PM Narendra Modi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को सोमनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना और शौर्य यात्रा निकालने के बाद सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में शामिल हुए. सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के दौरान मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने सोमनाथ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत व अभिनंदन किया. इस अवसर पर अपने संबोधन उन्होंने कहा कि सोमनाथ का इतिहास विनाश और पराजय का इतिहास नहीं है. ये इतिहास विजय और पुनर्निर्माण का है.
पीएम मोदी ने इस दौरान कहा कि “यह समय अद्भुत है, यह वातावरण अद्भुत है, यह उत्सव अद्भुत है. एक ओर स्वयं महादेव दूसरी ओर समुद्र की विशाल लहरें, सूर्य की किरणें, मंत्रों की यह गूंज, आस्था का यह उफान और इस दिव्य वातावरण में भगवान सोमनाथ के आप सब भक्तों की उपस्थिति यह इस अवसर को दिव्य, भव्य बना रही है. मैं अपना सौभाग्य मानता हूं कि सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष के रूप में मुझे सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में सक्रिय सेवा का अवसर मिला है.”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “इस आयोजन में गर्व, गरिमा, गौरव है. इसमें गरिमा का ज्ञान, वैभव की विरासत, अध्यात्म की अनुभूति है. इसमें अनुभव है, आनंद है, आत्मीयता है और सबसे बढ़कर महादेव का आशीर्वाद है. ”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज जब मैं आपसे बात कर रहा हूं तो बार-बार मन में प्रश्न आ रहा है कि ठीक 1000 वर्ष पहले ठीक इसी जगह पर क्या माहौल रहा होगा? अपनी आस्था, अपने विश्वास, अपने महादेव के लिए हमारे पुरखों ने अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया. 1000 साल पहले वह आक्रंता सोच रहे थे कि हमें जीत लिया कि आज 1000 साल बाद भी सोमनाथ महादेव के मंदिर पर फहरा रही ध्वजा पूरी सृष्टि का आह्वान कर रही है कि हिंदुस्तान की शक्ति क्या है, उसका सामर्थ्य क्या है यहां का कण-कण वीरता और साहस का साक्षी है.
पीएम मोदी ने आगे कहा कि सोमनाथ का इतिहास विनाश और पराजय का इतिहास नहीं है यह विजय और पुनर्निमाण का है.हमारे पूर्वजों के पराक्रम का है, हमारे पूर्वजों के त्याग और बलिदान का है. आक्रांता आते रहे लेकिन हर युग में सोमनाथ पुन: स्थापित होता रहा, इतनी सदियों का संघर्ष, इतना महान धैर्य, सृजन और पुनर्निमाण का यह जीवट, दुनिया के इतिहास में ऐसा उदाहरण मिलना मुश्किल है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जब महमूद गजनी से लेकर औरंगजेब तक तमाम आक्रांता सोमनाथ पर हमला कर रहे थे तो उन्हें लग रहा था कि उनकी तलवार सनातन सोमनाथ को जीत रही है, वे मज़हबी कट्टरपंथी यह नहीं समझ पाए कि जिस सोमनाथ को वे नष्ट करना चाहते हैं उसके नाम में ही ‘सोम’ अर्थात ‘अमृत’ जड़ा हुआ है. उसके ऊपर सदाशिव महादेव के रूप में वह चैतन्य शक्ति प्रतिष्ठित है जो कल्याणकारी भी है और शक्ति का स्रोत भी है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा यह समयचक्र है, सोमनाथ को ध्वस्त करने की मंशा लेकर आए मज़हबी आक्रांता आज इतिहास के कुछ पन्नों में सिमट कर रह गए हैं और सोमनाथ मंदिर उसी विशाल समुद्र के किनारे गगनचुंबी धर्मध्वजा को थामे खड़ा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा अगर किसी देश के पास 100 साल पुरानी विरासत होती है तो वह देश उसे अपनी पहचान बनाकर दुनिया के सामने प्रस्तुत करता है, वहीं भारत के पास सोमनाथ जैसे हजारों साल पुराने पुण्यस्थान है लेकिन दुर्भाग्य से आज़ादी के बाद गुलामी की मानसिकता वाले लोगों ने उनसे पल्ला झाड़ने की कोशिश की उस इतिहास को भूलाने के प्रयास हुए. हम जानते हैं कि सोमनाथ की रक्षा के लिए देश ने कैसे-कैसे बलिदान दिए थे. कितने ही नायकों का इतिहास सोमनाथ मंदिर से जुड़ा है लेकिन दुर्भाग्य से इसे कभी उतना महत्व नहीं दिया गया बल्कि आक्रमण के इतिहास को भी कुछ राजनेताओं और इतिहासकारों द्वारा व्हाइटवॉश करने की कोशिश की गई.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा हमारे धर्म के प्रति ईमानदार कोई भी व्यक्ति ऐसी कट्टरपंथी सोच का समर्थन नहीं करेगा लेकिन तुष्टीकरण के ठेकेदारों ने हमेशा इस कट्टरपंथी सोच के आगे घुटने टेके. जब भारत गुलामी की बेड़ियों से मुक्त हुआ, जब सरदार वल्लभभाई पटेल ने सोमनाथ के पुनर्निमाण की शपथ ली तो उन्हें भी रोकने की कोशिश की गई.
1951 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के यहां आने पर भी आपत्ति जताई गई.आज भी हमारे देश में वह ताकतें मौजूद और पूरी तरह सक्रिय हैं जिन्होंने सोमनाथ पुनर्निमाण का विरोध किया. आज तलवारों की जगह दूसरे कुच्छित तरीके से भारत के खिलाफ षड्यंत्र हो रहे हैं इसलिए हमें ज्यादा सावधान रहना है, हमें खुद को शक्तिशाली बनाना है, हमें एकजुट रहना है.”
गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने कहा ‘सोमनाथ कोई साधारण मंदिर नहीं है, यह वह चुनौती है जो भारत की आत्मा ने आक्रमणकारियों को दी है. 11वीं शताब्दी में मोहम्मद ग़ज़नवी यहां लूट की नीयत से आया था, उसे लगा था कि अगर आस्था टूटेगी तो भारत टूट जाएगा लेकिन आज यह दृश्य गवाह है कि ग़ज़नवी बिखर गया सोमनाथ आज भी अजेय है, अटूट है.”
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