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‘जहर उगलने की अनुमति…’, सुप्रीम कोर्ट में सोनम वांगचुक की NSA हिरासत की सुनवाई जारी, जानें SG तुषार मेहता ने क्या दी दलील?

Supreme Court Hearing: सोनम वांगचुक को लद्दाख को संवैधानिक सुरक्षा देने की मांग को लेकर हुए प्रदर्शनों के बाद NSA के तहत हिरासत में लिया गया था. जिसपर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है.

Sonam Wangchuk NSA Case: जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) की सोमवार को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत उनकी पत्नी गीतांजलि द्वारा हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में जारी है. इसमें उन्होंने वांगचुक की हिरासत को असंवैधानिक और मनमाना बताया है. इस मामले में केंद्र सरकार ने क्या दलील दी है आइए जानें?

क्या है पूरा मामला?

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि, सोनम वांगचुक को लद्दाख को संवैधानिक सुरक्षा देने की मांग को लेकर हुए प्रदर्शनों के बाद NSA के तहत हिरासत में लिया गया था. प्रशासन का आरोप है कि इन आंदोलनों और भाषणों के दौरान दिए गए कुछ बयान सार्वजनित व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता था. इसी आधार पर जिला मजिस्ट्रेट ने निरोध आदेश पारित किया.

क्या है केंद्र सरकार की दलील?

अब चलिए जानें कि सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई पर केंद्र सरकार द्वारा क्या दलील पेश की गई है. केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने याचिका का कड़ा विरोध किया है. उन्होंने अदालत को बताया कि जिला मजिस्ट्रेट उपलब्ध सामग्री से संतुष्ट था कि वांगचुक की गतिविधियों और बयान राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गंभीर सवाल खड़े करता है. इसलिए NSA के तहत निरोध जरूरी था.

SG मेहता ने आगे कहा कि लद्दाख एक संवेदनशील केंद्र शासित प्रदेश है, जो कि अंतरराष्ट्रीय सीमा साझा करता है और सेना की सप्लाई चेन के लिए बेहद अहम है. ऐसे क्षेत्र में दिए गए भाषण, जो अलगाव या जनमत संग्रह जैसे विचारों को बढ़ावा देते हों, सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है. 

‘जनमत संग्रह की मांग देशविरोधी’- SG मेहता

SG मेहता ने जनमत संग्रह और प्लेबिसाइट की मांग को पूरी तरह से देशविरोधी करार दिया उन्होंने अदालत में कहा कि अगर यह मामला NSA के तहत हिरासत का नहीं है, तो फिर कोई भी मामला NSA के दायरे में नहीं आएगा. वांगचुक के कुछ भाषणों में नेपाल जैसी स्थिती पैदा करने के संकेत थे और महात्मा गांधी का हवाला केवल दिखावे के लिए ही था. जबकि, वास्तविकता केवल हिंसा और अस्थिरता को हवा देने की थी. 

केंद्र की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि प्रिवेंटिव डिटेंशन कोई सजा नहीं है, बल्कि समाज और राष्ट्र की सुरक्षा के लिए एक एहतियाती कदम है. ऐसा व्यक्ति जो बार-बार भड़काऊ बयान दे रहा हो उसे जहर उगलने की अनुमति नहीं दी जा सकती है. 
 

Shristi S

Shristi S has been working in India News as Content Writer since August 2025, She's Working ITV Network Since 1 year first as internship and after completing 3 months intership Shristi Joined Inkhabar Haryana of ITV Group on November 2024. She Worked in Inkhabar Haryana 9 months there she cover full Haryana news. Currently In India News her speciality is hard news, lifestyle, entertainment, Business.

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