नेहरू कैबिनेट से इस्तीफा और जेल की कालकोठरी का वो मंजर! आखिर कैसे मुट्ठी भर नेताओं के संघर्ष ने जनसंघ को दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बना दिया? पूरी कहानी यहां पढ़ें...
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का इतिहास भारतीय जनसंघ से जुड़ा है और यह नाता 74 से 75 साल पुराना है. जनसंघ की स्थापना 21 अक्टूबर 1951 को दिल्ली में हुई थी, जबकि भाजपा का गठन 6 अप्रैल 1980 को हुआ. आज भाजपा अपने शिखर पर है. केंद्र में लगातार तीसरी बार सत्ता में आने और देश के आधे से अधिक राज्यों में शासन करने तक का सफर भाजपा ने कड़ा संघर्ष और उतार-चढ़ाव के लंबे दौर से तय किया है.
आपको बता दें कि जनसंघ की नींव डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने रखी थी. आजादी के बाद, वह जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार का हिस्सा थे, लेकिन 19 अप्रैल 1950 को उन्होंने कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया और एक अलग राजनीतिक दल बनाने का फैसला किया श्यामा प्रसाद मुखर्जी का उद्योग मंत्री के पद से हटने और जनसंघ बनाने के फैसले ने कई सवाल भी खड़े किए हालांकि बाद में यही जनसंघ ‘भाजपा’ के रूप में जाना गया और भाजपा का दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बनने का सफर यहीं से शुरू हुआ था.
अब सवाल उठता है कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने कांग्रेस क्यों छोड़ी? आपको बता दें कि भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद लाखों लोगों ने पलायन किया. नेहरू-लियाकत समझौते के कारण दोनों देशों में भीषण दंगे हो रहे थे. दोनों देशों के बीच अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए आयोग बनाने पर सहमति बनी थी.
लेकिन डॉ. मुखर्जी के मन में नेहरू की नीतियों के खिलाफ वैकल्पिक राजनीति की इच्छा पनपने लगी थी. जिसके बाद नेहरू-लियाकत समझौते को ‘तुष्टिकरण की नीति’ बताते हुए श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने 19 अप्रैल 1950 को इस्तीफा दे दिया और कांग्रेस के विकल्प के रूप में नया दल बनाने का बीड़ा उठाया।
जनसंघ की स्थापना के दो मुख्य वजहें थी. पहला नेहरू-लियाकत समझौता और दूसरा महात्मा गांधी की हत्या के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर लगाया गया प्रतिबंध। RSS पर प्रतिबंध के कारण देश के एक बड़े वर्ग को लगने लगा कि कांग्रेस के टक्कर का यानी कांग्रेस का एक विकल्प होना जरूर होना चाहिए। वहीं जनसंघ से जुड़े लोगों को भी एक राजनीतिक आधार की आवश्यकता थी. इस्तीफा देने के बाद डॉ. मुखर्जी ने तत्कालीन सरसंघचालक माधव सदाशिवराव गोलवलकर से मुलाकात की. जहां जनसंघ के गठन की रणनीति बनाई गई.
21 अक्टूबर 1951 को दिल्ली में एक छोटे से कार्यक्रम में भारतीय जनसंघ की स्थापना हुई. इसके संस्थापकों में श्यामा प्रसाद मुखर्जी, बलराज मधोक और दीनदयाल उपाध्याय शामिल थे. जनसंघ का चुनाव चिन्ह ‘दीपक’ था और इसका झंडा भगवा था.
1952 के लोकसभा चुनाव में जनसंघ ने 94 सीटों पर चुनाव लड़ा। पहली बार इसके तीन सांसद चुने गए: दो पश्चिम बंगाल से और एक राजस्थान से. ये थे श्यामा प्रसाद मुखर्जी (कलकत्ता दक्षिण-पूर्व), दुर्गा चरण बनर्जी (मिदनापुर-झारग्राम) और उमाशंकर त्रिवेदी (चित्तौड़, राजस्थान).
जनसंघ ने समान नागरिक संहिता (UCC), गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध और जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाने की मांग की.
1953 में जनसंघ ने कश्मीर के पूर्ण एकीकरण के लिए बड़ा आंदोलन छेड़ा. उस समय कश्मीर जाने के लिए परमिट की जरूरत होती थी और वहां ‘मुख्यमंत्री’ के बजाय ‘प्रधानमंत्री’ का पद होता था. डॉ. मुखर्जी ने इसका विरोध किया और 8 मई 1953 को बिना परमिट कश्मीर की यात्रा शुरू की. 11 मई को उन्हें शेख अब्दुल्ला सरकार ने गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के मात्र 40 दिन बाद, 23 जून 1953 को उनका निधन हो गया.
अब समय आ गया था भाजपा के उदय का.1975 में आपातकाल का जनसंघ ने कड़ा विरोध किया जिसके बाद इसके नेता जेल गए. 1977 में आपातकाल हटने के बाद विपक्षी दलों ने इंदिरा गांधी को हराने के लिए हाथ मिलाया और ‘जनता पार्टी’ बनाई, जिसमें जनसंघ का विलय हो गया.
मोरारजी देसाई के नेतृत्व वाली सरकार में अटल बिहारी वाजपेयी विदेश मंत्री और एल.के. आडवाणी सूचना एवं प्रसारण मंत्री बने. हालांकि, 1978 में ‘दोहरी सदस्यता’ (RSS और जनता पार्टी दोनों का सदस्य होना) के मुद्दे पर विवाद छिड़ गया. अंततः 1979 में सरकार गिर गई और 1980 के चुनाव में जनता पार्टी की करारी हार हुई. इसके बाद, जनता पार्टी में RSS से जुड़े सदस्यों पर प्रतिबंध लगा दिया गया. नतीजतन, 6 अप्रैल 1980 को दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का गठन हुआ. अटल बिहारी वाजपेयी इसके पहले अध्यक्ष बने.
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