विक्रम शर्मा, जो सालों तक उत्तराकंड के देहरादून में (Dehradun) अपनी पहचान छिपाकर (Hiding Personality) रहता था, वह झारखंड के अंडरवर्ल्ड (Underworld) का एक बड़ा रणनीतिकार (Strategist) माना जाता था.
Who was Gangster Vikram Sharma: उत्तराखंड के देहरादून में रहने वाला विक्रम शर्मा सिर्फ एक व्यवसायी नहीं, बल्कि झारखंड के कुख्यात गैंगस्टर अखिलेश सिंह का ‘आपराधिक गुरु‘ माना जाता था. इतना ही नहीं, वह पहचान छिपाकर 10 सालों तक उत्तराखंड में शरण लेने वाले इस शातिर अपराधी को जमशेदपुर पुलिस ने गिरफ्तार करने में बड़ी सफलता हासिल की है.
जानकारी के मुताबिक, विक्रम शर्मा एक बेहद ही खौफनाक अपराधी था. इन सबके अलावा विक्रम एक ब्लैक बेल्टर था और बच्चों को मार्शल आर्ट्स सिखाने का काम भी करता था. इसके साथ ही वह अपने शिष्यों को अपराध के गुण सिखाने के लिए चाइनीज फिल्में भी दिखाया करता था.
विक्रम शर्मा ने पढ़ाई जमशेदपुर से ही पूरी की थी. हालांकि, वह बहुत ज्यादा शिक्षित नहीं था, लेकिन वह बेहद ही शातिर था. इसके अलावा, हिंदी के साथ-स थ उसकी अंग्रेजी भाषा पर भी अच्छा खासी पकड़ थी. उसे अपराध जगत का ‘गुरु‘ इसलिए भी कहा जाता था, क्योंकि वह खुद सामने आने के बजाय पीछे से बड़े वारदातों को अंजाम दिया करता था.
साल 1990 के दशक के आखिरी में जब जमशेदपुर में गैंगस्टर अखिलेश सिंह उभर रहा था, तब वह विक्रम शर्मा के पास मार्शल आर्ट्स सीखने जाया करता था. यहीं से दोनों के बीच दोस्ती की शुरुआत हुई थी. तो वहीं, विक्रम ने अखिलेश को शारीरिक रूप से मजबूत बनाने के साथ-साथ यह भी सिखाया कि पुलिस और सत्ता का इस्तेमाल कैसे किया जाता है.
साल 2007 में जमशेदपुर में श्रीलेदर्स के मालिक आशीष डे की हत्या ने पूरे देश को झकझोर कर रखा दिया था. तो वहीं, इस हत्याकांड की साजिश में विक्रम का नाम मीडिया के सामने आया था. इतना ही नहीं वह ट्रांसपोर्टर अशोक शर्मा की हत्या में न सिर्फ खौफनाक साजिश रची, बल्कि मृतक की पत्नी पिंकी शर्मा की शादी अपने छोटे भाई अरविंद से करा दी ताकि संपत्ति पर कब्जा किया जा सके.
हालांकि, इन सब के अलावा विक्रम को पुलिस, राजनेताओं और प्रेस के बारे में अच्छी खासी समझ थी. जानकारी के अनुसार, साल 2004 से 2009 के बीच झारखंड के कई बड़े अफसर और नेता उसके प्रभाव में थे, जिसने उसे लंबे समय तक कानून से बचाए रखने में सबसे ज्यादा बड़ी मदद की थी.
जमशेदपुर पुलिस की गिरफ्त से बचने के लिए उसने चेहरा बदला और कई बार अपनी पहचान छिपाई. लेकिन, उत्तराखंड के देहरादून के एक किराए के फ्लैट में रहते हुए उसने स्टोन क्रशर का कारोबार शुरू किया ताकि समाज में एक इज्जतदार नागरिक की छवि बनी रहे. हालांकि, जमशेदपुर पुलिस के इनपुट और सख्त कार्रवाई ने उसके 10 साल के लुका-छुपी खेल को पूरी तरह से खत्म कर दिया.
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