Viral News: एक जनसुनवाई का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें एक दिव्यांग युवक जिला कलेक्टर पर पिछले दो साल से परेशान करने और मदद न मिलने का आरोप लगाता नजर आ रहा है.
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Viral News: एक पब्लिक हियरिंग का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है. वीडियो देखकर लोग भड़क गए हैं. वीडियो एक दिव्यांग युवक का है. जिसने डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर पर परेशान करने और लंबे समय तक नजरअंदाज करने का आरोप लगाया. उसने दावा किया कि उसे पिछले दो साल से बेसिक मदद नहीं मिली है. अधिकारियों के सामने दर्द और गुस्से से खड़े उस युवक ने कहा कि उसके दोनों पैर खराब हो गए हैं जिससे रोजाना चलना-फिरना बहुत मुश्किल हो गया है. आंसू रोकते हुए उसने वहां मौजूद लोगों से कहा कि वह हमदर्दी या चैरिटी नहीं बल्कि इंसाफ मांग रहा है.
दिव्यांग शख्स ने कहा कि “दो साल से मैं एक ऑफिस से दूसरे ऑफिस भाग रहा हूं.” “मैं अनगिनत बार कलेक्टर के ऑफिस गया. फाइलें खोली गईं, फाइलें बंद की गईं. मुझे बार-बार भरोसा दिया गया, लेकिन कुछ नहीं हुआ.”
दिव्यांग शख्स के मुताबिक वह दिव्यांग लोगों के लिए एक सरकारी वेलफेयर स्कीम के तहत बैटरी से चलने वाली ट्राइसाइकिल के लिए एलिजिबल था. उसने कहा कि ट्राइसाइकिल कोई लग्ज़री नहीं बल्कि एक ज़रूरत है चलने-फिरने, आज़ादी और इज्ज़त के लिए ज़रूरी. बार-बार अप्लाई करने और फॉलो-अप के बावजूद, उसका दावा है कि उसे अभी तक मदद नहीं मिली है.
हियरिंग के दौरान अधिकारियों और आम लोगों के सामने आखिरकार उसका गुस्सा फूट पड़ा. उनके इमोशनल अंदाज़ को अब सोशल मीडिया पर खूब शेयर किया जा रहा है, जिससे ऑनलाइन तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं, कई यूज़र्स ने कमज़ोर नागरिकों की सुरक्षा के लिए बने सिस्टम की जवाबदेही पर सवाल उठाए हैं.
नेटिजन्स इस पर प्रतिक्रिया दें रहे हैं. कुछ यूजर्स ने कहा कि दिव्यांग लोगों के लिए वेलफेयर स्कीम अक्सर सिर्फ कागजों तक ही सीमित रहती हैं, जबकि बेनिफिशियरीज़ को अपने अधिकारों तक पहुंचने के लिए सालों तक संघर्ष करना पड़ता है. वहीं दूसरे यूजर ने लिखा कि ‘यह घटना हमारे सरकारी सिस्टम की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़ी करती है. दो साल तक एक दिव्यांग का अपने हक के लिए भटकना बेहद शर्मनाक है. प्रशासन को फाइलों से बाहर निकलकर जिम्मेदारी तय करनी चाहिए ताकि जरूरतमंदों को समय पर सहायता मिल सके.
इस घटना ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं. कि आखिर दिव्यांग नागरिकों को बेसिक मदद के लिए सालों इंतज़ार क्यों करना पड़ता है? देरी के लिए अधिकारियों को ज़िम्मेदार क्यों नहीं ठहराया जाता? और सरकारी वेलफेयर असल में उन लोगों तक कब पहुंचेगा जिन्हें इसकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत है?
जैसे-जैसे वीडियो वायरल हो रहा है, तुरंत एक्शन, जवाबदेही और सिस्टम में सुधार की मांग बढ़ रही है ताकि यह पक्का हो सके कि दिव्यांग लोगों के अधिकारों को और नज़रअंदाज़ या देर न की जाए.
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