Multiple Myeloma Cause and Symptoms: हड्डियों में लगातार दर्द को आमतौर पर लोग मामूली समझकर अनदेखा कर जाता है. अगर आप भी ऐसा करते हैं तो 'रुकिए'. क्योंकि, ये परेशानी मल्टीपल माइलोमा का संकेत हो सकती है. अब सवाल है कि आखिर, मल्टीपल माइलोमा की बीमारी क्या है? इस बीमारी का किन लोगों को जोखिम अधिक? इस बीमारी का क्या है कारण? आइए जानते हैं इस बारे में-
लगातार हड्डियों में दर्द से इन गंभीर बीमारी का खतरा. (Canva)
Multiple Myeloma Cause and Symptoms: आजकल की हमारी दिनचर्या ऐसी हो गई है कि, कब कौन गंभीर बीमारी हो जाए पता ही नहीं चलता है. इसलिए किसी भी साधारण परेशानी को हल्के में नहीं लेना चाहिए. हड्डियों में लगातार होता दर्द ऐसी ही गंभीर बीमारियों में से एक है. आमतौर पर लोग इसे मामूली समझकर अनदेखा कर जाता है. अगर आप भी ऐसा करते हैं तो ‘रुकिए’. क्योंकि, ये परेशानी मल्टीपल माइलोमा का संकेत हो सकती है. अब सवाल है कि आखिर, मल्टीपल माइलोमा की बीमारी क्या है? इस बीमारी का किन लोगों को जोखिम अधिक? इस बीमारी का क्या है कारण? मल्टीपल माइलोमा का निदान क्या है? आइए जानते हैं इस बारे में-
मायो क्लीनिक की रिपोर्ट के मुताबिक, मल्टीपल मायलोमा एक प्रकार का कैंसर है जो अस्थि मज्जा (bone marrow) में पाई जाने वाली प्लाज्मा कोशिकाओं में विकसित होता है. जो संक्रमण से लड़ने वाले एंटीबॉडी बनाते हैं. इन प्लाज्मा सेल्स के अंदर होने वाले कैंसर को मल्टीपल माइलोमा कहते हैं. इससे पीड़ित व्यक्ति के बोन मैरो में प्लाज्मा सेल्स जमा होने लगते हैं, जिससे रक्त कोशिकाओं का उत्पादन पर असर पड़ता है. यह एक दुर्लभ रक्त कैंसर है, जिसमें असामान्य प्लाज्मा कोशिकाएं तेजी से बढ़कर स्वस्थ कोशिकाओं को दबा देती हैं और ‘एम प्रोटीन’ नामक हानिकारक प्रोटीन बनाती हैं. इससे हड्डियों, किडनी और प्रतिरक्षा प्रणाली को नुकसान होता है.
इस बीमारी का कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है, लेकिन डॉक्टरों ने कुछ ऐसे कारक सुझाए हैं जो कि मल्टीपल माइलोमा के खतरे को बढ़ाते हैं. उनका मानना है कि मोटापा और 35 साल से ज्यादा की उम्र इसके कारणों में शामिल हो सकते हैं. वहीं पुरुषों को महिलाओं की तुलना में इस बीमारी का जोखिम अधिक होता है.
एक अन्य कारक ऑन्कोजीन्स हैं, जो कि शरीर में कोशिकाओं के विकास के लिए जिम्मेदार होते हैं. जब ऑन्कोजीन्स और ट्यूमर को दबाने वाले जीन्स के बीच असंतुलन होता है तो यह परिस्थिति पैदा हो सकती है. ट्यूमर को दबाने वाले जींस कोशिकाओं के विकास को कम करते हैं. किसी कारणवश इन जीन्स का रूप बदल जाए या फिर इसके काम करने के तरीके में गड़बड़ी हो तो शरीर में प्लाज्मा सेल्स का विकास अनियंत्रित होने लगता है. इससे मल्टीपल माइलोमा हो सकता है.
मल्टीपल माइलोमा के लक्षण शुरुआती चरण में पता नहीं चलते हैं, हालांकि बाद के चरण में कुछ संकेत दिखते हैं जैसे हड्डियों में लगातार दर्द, हड्डियों का कमजोर होना, बार-बार संक्रमण, खून में कैल्शियम की मात्रा बढ़ने से पेट में दर्द, कब्ज, एनीमिया या फिर किडनी का ठीक से काम न कर पाना या किडनी फेल होना.
मल्टीपल माइलोमा से पीड़ित व्यक्ति एक्स-रे, कम्प्लीट ब्लड काउंट (सीबीसी), यूरिन टेस्ट, सीटी स्कैन, पीईटी स्कैन या एमआईआर आदि करवा सकते हैं. इससे पता चलेगा कि ट्यूमर कहां है और कितना फैल चुका है. बोन मैरो का सैंपल लेने से पता चलेगा कि कैंसर वाली बायोप्सी से मल्टीपल माइलोमा होने की पुष्टि होती है.
मल्टीपल माइलोमा का सबसे आम इलाज कीमोथेरेपी है. कैंसर की कोशिकाओं को खत्म करने और ट्यूमर को बढ़ने से रोकने के लिए दवाइयां दी जाती है. ये इलाज बहुत अधिक सफल नहीं है क्योंकि इसके दुष्प्रभाव बहुत ज्यादा हैं. कीमोथेरेपी की दवाईयों की संपूरक बनकर उन्हें ज्यादा असरदार बनाने के लिए स्टेरॉयड का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन नींद लेने में परेशानी, अपच, सीने में जलन इसके दुष्प्रभाव हो सकते हैं. मल्टीपल माइलोमा के सेल्स को मारने के लिए थैलिडोमाइड भी मदद करती है, लेकिन इससे भी चक्कर आने, कब्ज जैसी दिक्कतें हो सकती है. इसके अलावा खून का थक्का जमने, सांस लेने में दिक्कत, सीने में दर्द की शिकायत भी हो सकती है.
फैन से ‘इमोशनल कनेक्शन’ ही स्टारडम की असली ताकत: अर्जुन कपूर पानी बचाने को घर-ऑफिस…
Spy Case: राजस्थान इंटेलिजेंस ने रविवार को असम के चाबुआ एयर फ़ोर्स स्टेशन पर जासूसी…
Hajipur Lodipur Clash: शनिवार दोपहर लोदीपुर गांव में एक लंबे समय से चले आ रहे…
आईपीएल सीजन 2021 के दौरान कोविड-19 पॉजिटिव आने के बाद वरुण चक्रवर्ती सोशल मीडिया पर…
Viral Stunt of Old Man: अक्सर सड़क पर युवाओं द्वारा बाइक और कार में स्टंट…
कन्नड़ एक्ट्रेस रान्या राव चर्चा में हैं और इसकी वजह गोल्ड स्मग्लिंग है. मीडिया रिपोर्ट्स…