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पाकिस्तान लौटा रहा था जंग में पकड़ा गया बेटा, क्यों भारत के पहले फील्ड मार्शल KM Cariappa ने लेने से किया मना? पीछे की वजह जान चौड़ा हो जाएगा हर भारतीय का सीना

KM Cariappa: केएम करियप्पा ने 1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान अपने पकड़े गए बेटे के लिए स्पेशल ट्रीटमेंट लेने से मना कर दिया था. उनके पक्के उसूलों और लीडरशिप ने आगे चलकर इंडियन आर्मी की वैल्यूज़ को बनाया.

KM Cariappa: भारत ने 20 जनवरी को 77वां गणतंत्र दिवस पूरे गर्व और सम्मान के साथ मनाया. उससे कुछ दिन पहले 15 जनवरी को देश ने भारतीय सेना दिवस पर अपने जांबाज सैनिकों को सलाम किया. इसी बीच 23 जनवरी को जब बॉर्डर-2 फिल्म रिलीज हुई तो मानो देश की रगों में फिर से देशभक्ति दौड़ने लगी.आज इंस्टा रील्स हों या फेसबुक वॉच, र तरफ सेना से जुड़े कंटेट शेयर किए जा रहे हैं.हर दिल में फौज के लिए इज्जत है. इन सब के बीच इतिहास की एक ऐसी कहानी है.जो न सिर्फ रोंगटे खड़े कर देती है  बल्कि ये सिखा जाती है कि वर्दी पहनना सिर्फ नौकरी नहीं, एक तपस्या है. बहुत कम लोग जानते हैं कि 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान भारतीय सेना के पहले कमांडर-इन-चीफ फील्ड मार्शल के. एम. करियप्पा ने ऐसा फैसला लिया था.जिसे जानकर आज भी लोग हैरान हो जाते हैं. यह फील्ड मार्शल कोडंडेरा मडप्पा करिअप्पा की कहानी है, जिन्होंने 15 जनवरी 1949 को स्वतंत्र भारत के पहले भारतीय सेना के कमांडर-इन-चीफ बनकर इतिहास रच दिया  एक भूमिका जो पहले अंग्रेजों के लिए आरक्षित थी.

केएम करिअप्पा की इस कामयाबी के सम्मान में हर साल 15 जनवरी को आर्मी डे मनाया जाता है, जिनकी मजबूत इच्छाशक्ति और सिद्धांतों ने देश के लिए एक हमेशा रहने वाली मिसाल कायम की.

केएम करियप्पा के बारे में एक मशहूर कहानी है जब उन्होंने पाकिस्तान से कहा था कि उनके बेटे को रिहा न किया जाए और उसके साथ दूसरे युद्धबंदियों जैसा बर्ताव किया जाए. लेकिन आइए जानते हैं कि उन्होंने ऐसा क्यों कहा. यह 1965 की लड़ाई थी  भारत-पाक युद्ध का आखिरी दिन. इस दिन स्क्वाड्रन लीडर केसी करियप्पा, एएस सहगल और कुक्के सुरेश को पाकिस्तानी ठिकानों पर बमबारी करने का ऑर्डर दिया गया था. लेकिन बमबारी के पहले ही राउंड में पाकिस्तानी सैनिकों ने एएस सहगल के प्लेन पर एंटी-एयरक्राफ्ट गन से हमला कर दिया. हालांकि एएस सहगल हमले में बच गए लेकिन उन्हें बेस कैंप लौटना पड़ा.

पाकिस्तानियों सिर्फ बताया अपना नाम और रैंक

उनके जाने के बाद केसी करियप्पा और कुक्के मैदान पर ही रहे और दुश्मन के ठिकानों को तबाह करते रहे. इस बीच करियप्पा के एयरक्राफ्ट पर बार-बार पाकिस्तानी गोलियां लगीं. उनका प्लेन डैमेज हो गया और आग के गोले की तरह भारतीय इलाके में क्रैश हो गया लेकिन उनकी बॉडी पाकिस्तान में आ गिरी. क्रैश के बाद  पाकिस्तानी सैनिकों ने उन्हें घेर लिया और अरेस्ट कर लिया. जब केसी करियप्पा को पकड़ा गया तो उनसे पूछा गया कि क्या वह केएम करियप्पा के रिश्तेदार हैं लेकिन उन्होंने पाकिस्तानियों को सिर्फ अपना नाम और रैंक बताया.

पाकिस्तान को बताई क्या होती है देश भक्ती

उस समय पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल अयूब खान थे जो कभी ब्रिटिश भारतीय सेना में केएम करियप्पा के अधीन काम कर चुके थे. अयूब खान ने दोस्ती और सम्मान के तौर पर केसी करियप्पा को रिहा करने का प्रस्ताव दिया.  उन्होंने भारत में पाकिस्तानी हाई कमिश्नर के जरिए उन्हें बताया कि अगर वे चाहें तो उनके बेटे को रिहा किया जा सकता है, लेकिन के.एम. करियप्पा जो उसूलों के पक्के इंसान थे. उन्होने इसे मना कर दिया. उन्होंने कहा कि के.सी. करियप्पा सिर्फ उनके बेटे नहीं बल्कि पूरे देश के बेटे हैं और इसलिए उनके साथ किसी भी दूसरे युद्धबंदी जैसा बर्ताव किया जाना चाहिए. हालांकि अगर उन्हें रिहा किया जाता है तो दूसरे युद्धबंदी भी रिहा हो जाएंगे. दूसरे युद्धबंदी उनके बेटों जैसे थे. के.सी. करियप्पा कई दिनों तक पाकिस्तानी हिरासत में रहे और बाद में उन्हें दूसरे कैदियों के साथ रिहा कर दिया गया.

कौन थे केएम करियप्पा?

केएम करियप्पा का जन्म 28 जनवरी 1899 को कर्नाटक के कूर्ग (कोडागु) क्षेत्र में हुआ था. ब्रिटिश शासन के दौरान जब भारतीयों के लिए सेना में आगे बढ़ना बेहद मुश्किल था, तब उन्होंने कई भेदभाव तोड़ते हुए ब्रिटिश भारतीय सेना में जगह बनाई. आजादी के बाद वे 1949 में भारत के पहले सेना प्रमुख बने. 1947-48 के जम्मू-कश्मीर युद्ध में उनकी रणनीति ने भारत को बड़ी मजबूती दी. वे धर्मनिरपेक्ष सोच, अनुशासन और एकता के पक्षधर थे. उन्होंने भारतीय सेना को एक ऐसी ताकत बनाया जो एकजुटता और समानता पर आधारित थी.

Divyanshi Singh

दिव्यांशी सिंह उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले की रहने वाली हैं। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की पढ़ाई की है और पिछले 4 सालों से ज्यादा वक्त से पत्रकारिता के क्षेत्र में हैं। जियो-पॉलिटिक्स और स्पोर्टस में काम करने का लंबा अनुभव है।

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