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विदेशी मेहमानों के बीच Republic Day 2026 पर आधुनिक भारत की पावर देखेगी दुनिया, यूरोपीय संघ की टुकड़ी होगी शामिल, क्यों खास है इस बार का गणतंत्र दिवस?

Republic Day 2026: इस बार कर्तव्य पथ पर 2026 की गणतंत्र दिवस परेड में भारत के सैन्य प्रदर्शन में नए बदलावों के साथ-साथ परेड की पुरानी पारंपरिक विशेषताएं भी देखने को मिलेंगी.

Republic Day 2026: इस बार कर्तव्य पथ पर 2026 की गणतंत्र दिवस परेड में भारत के सैन्य प्रदर्शन में नए बदलावों के साथ-साथ परेड की पुरानी पारंपरिक विशेषताएं भी देखने को मिलेंगी. यह एक ऐसा मौका होता है, जो लोगों को देश के प्रति एकजुटता का संदेश देता है. हर स्कूल, चौराहों, सरकारी और प्राइवेट संस्थानों पर झंडा वंदन किया जाता है. राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने के मौके पर यह परेड भारत की सैन्य क्षमता, सांस्कृतिक विविधता और कई ऐतिहासिक पहली बार होने वाली घटनाओं को एक साथ लाएगी. इसमें यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे. कुल 18 मार्चिंग टुकड़ियों और 13 बैंड के साथ यह उत्सव भारत की बदलती रक्षा स्थिति, स्वदेशी तकनीकी प्रगति और इसके पारंपरिक प्रदर्शन में बढ़ती वैश्विक रुचि को दिखाएगा.

यूरोपीय संघ की टुकड़ी होगी शामिल

भारतीय वायु सेना इस साल के गणतंत्र दिवस के लिए मुख्य सेवा है और सभी पारंपरिक कार्यक्रमों की देखरेख करेगी. जबकि, भारतीय सेना अपनी पहली बार चरणबद्ध युद्ध संरचना, भैरव लाइट कमांडो बटालियन की शुरुआत और कई रेजिमेंटल टुकड़ियों को पेश करेगी. भारतीय नौसेना और IAF में से प्रत्येक में 144 सदस्यों वाली मार्चिंग टुकड़ियां होंगी. मुख्य अतिथि की उपस्थिति के हिस्से के रूप में एक अलग यूरोपीय संघ की टुकड़ी परेड में शामिल होगी. भारत की मशीनीकृत ताकत का भी प्रदर्शन किया जाएगा. उच्च-गतिशीलता वाले टोही वाहन, T-90 और अर्जुन टैंक, BMP-II और NAMIS-II सिस्टम, नाग और ब्रह्मोस मिसाइल प्लेटफॉर्म और स्वदेशी तोपें एक चरणबद्ध युद्ध संरचना का हिस्सा होंगी, जो परेड के इतिहास में पहली बार दिखाई देगी. 

सेना की मार्चिंग टुकड़ियां

सेना सात मार्चिंग टुकड़ियां, 61 कैवलरी का एक घुड़सवार दस्ता और परेड की पहली चरणबद्ध युद्ध संरचना पेश करेगी. 61 कैवलरी दुनिया की आखिरी चालू घुड़सवार सक्रिय-ड्यूटी कैवलरी रेजिमेंट में से एक है. इसकी शुरुआत आजादी के शुरुआती सालों से हुई. जब कई पूर्व रियासतों की कैवलरी इकाइयों को पुनर्गठित करके एक एकल घुड़सवार रेजिमेंट बनाया गया. साल 1954 में ग्वालियर लांसर्स, जोधपुर/कछवाहा हॉर्स और मैसूर लांसर्स को मिलाकर आज की 61वीं कैवलरी बनाई गई. पहली बार रीमाउंट और वेटरनरी कोर (RVC) एक खास एनिमल दल मैदान में उतारेगी. यह भारत की ऊंचाई वाले इलाकों की ऑपरेशनल हकीकत को दिखाता है. इस दल में बैक्ट्रियन ऊंट, जांस्कर टट्टू, रैप्टर, देसी मिलिट्री कुत्ते और मौजूदा आर्मी डॉग यूनिट शामिल हैं. 

क्षमतावान हैं ये एनिमल दल

बैक्ट्रियन ऊंट लद्दाख के लिए नई पीढ़ी की सामान ढोने वाले जानवरों की क्षमता को दिखाते हैं. ये 15,000 फीट से ज़्यादा ऊंचाई पर बहुत ज़्यादा ठंड और कम ऑक्सीजन वाले इलाकों में 250 किलोग्राम तक वज़न ले जा सकते हैं. जांस्कर टट्टू भी इतनी ही ऊंचाई पर ज़बरदस्त सहनशक्ति दिखाते हैं. 40 से 60 किलोग्राम तक वजन ले जाने में सक्षम हैं. ये अक्सर गश्त के दौरान हर दिन 70 किलोमीटर तक साथ चलते हैं. रैप्टर आर्मी के बर्ड-स्ट्राइक मैनेजमेंट तरीकों के हिस्से के तौर पर दिखेंगे. RVC डॉग यूनिट देसी और पारंपरिक दोनों नस्लें विस्फोटक का पता लगाने और ट्रैक करने से लेकर हिमस्खलन बचाव और आतंकवाद विरोधी अभियानों तक कई तरह की ऑपरेशनल भूमिकाएं निभाती हैं. अब बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होने वाली देसी नस्लों में मुधोल हाउंड, रामपुर हाउंड, चिप्पीपराई, कोम्बाई और राजापलायम शामिल हैं.

स्काउट्स दल का भव्य नजारा

मिक्स स्काउट्स दल में अरुणाचल स्काउट्स, लद्दाख स्काउट्स, सिक्किम स्काउट्स, गढ़वाल स्काउट्स, कुमाऊं स्काउट्स और डोगरा स्काउट्स के सैनिकों को शामिल किया जाएगा. दल के कमांडर लेफ्टिनेंट अमित चौधरी हैं और इस दल में 144 अन्य रैंक, तीन JCO और एक अधिकारी शामिल हैं. स्काउट्स भारत के खास ऊंचाई वाले और सीमावर्ती सैनिक हैं, जिन्हें हिमालय के कुछ सबसे मुश्किल इलाकों में पहाड़ी युद्ध, सीमा निगरानी और तेज़ी से कार्रवाई के लिए तैयार किया गया है.

राजपूत रेजिमेंट दल

राजपूत रेजिमेंट को 1778 में ब्रिटिश भारतीय सेना के तहत बनाया गया था. यह भारत की सबसे पुरानी इन्फैंट्री रेजिमेंट में से एक है. आजादी के बाद यह भारतीय सेना के इन्फैंट्री ढांचे का एक बड़ा हिस्सा बन गई, जिसका रेजिमेंटल सेंटर उत्तर प्रदेश के फतेहगढ़ में है. रेजिमेंट का इतिहास औपनिवेशिक काल के अभियानों, विश्व युद्धों और सभी आधुनिक संघर्षों तक फैला हुआ है. रेजिमेंट का आदर्श वाक्य, सर्वत्र विजय (हर जगह जीत) और इसका युद्ध घोष, बोल बजरंग बली की जय इसकी पहचान का मुख्य हिस्सा हैं. अशोक के पत्तों के साथ क्रॉस किए हुए राजपूत खंजर का इसका प्रतीक रेजिमेंट की विरासत को दिखाता है. ऐतिहासिक रूप से इसमें राजपूत समुदायों का दबदबा रहा है लेकिन इसकी मौजूदा संरचना में अहीर, गुर्जर, ब्राह्मण और बंगाली भी शामिल हैं.

असम रेजिमेंट टुकड़ी पर नजर

पूर्वी सीमा की रक्षा के लिए 1941 में गठित असम रेजिमेंट ने द्वितीय विश्व युद्ध के बर्मा थिएटर 1947-48 में जम्मू-कश्मीर, 1971 में छंब में युद्ध सम्मान प्राप्त किया है. इसने आतंकवाद विरोधी अभियानों में एक लंबा रिकॉर्ड बनाया है. रेजिमेंट का युद्ध घोष राइनो चार्ज, इसके प्रतीक, पूर्वोत्तर भारत के एक सींग वाले गैंडे का आह्वान करता है. टुकड़ी के कमांडर कैप्टन आर्यन हैं और यह फॉर्मेशन कर्तव्य पथ पर 144 कर्मियों को लाएगा. 

जम्मू और कश्मीर लाइट इन्फैंट्री टुकड़ी

जम्मू और कश्मीर लाइट इन्फैंट्री (JAK LI) स्वतंत्र भारत में पूरी तरह से गठित एकमात्र रेजिमेंट है, जो उन स्वयंसेवी मिलिशिया से उभरी है जिन्होंने 1947-48 में कश्मीर पर आक्रमण को रोका था. इसकी भूमिका छोटे-दल की रणनीति, पर्वतीय युद्ध, उच्च जोखिम वाली टोही और कठिन इलाकों में अभियानों में विशेषज्ञता रखती है. इसका आदर्श वाक्य बलिदानम वीर लक्षणम (बलिदान बहादुरों का लक्षण है) और इसका युद्ध घोष भारत माता की जय, इसकी पहचान को दर्शाता है. रेजिमेंट ने आतंकवाद विरोधी अभियानों, उच्च ऊंचाई वाले युद्ध और उत्तरी थिएटर में प्रमुख अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.

रेजिमेंट ऑफ आर्टिलरी टुकड़ी

रेजिमेंट ऑफ आर्टिलरी को ऐतिहासिक रूप से युद्ध के देवता के रूप में जाना जाता है. इसकी उत्पत्ति 1827 में 5 (बॉम्बे) माउंटेन बैटरी के गठन से हुई है. आधुनिक आर्टिलरी के विकास, जिसमें स्टील गन बैरल, स्थिर रिकॉइल सिस्टम और हाई-एनर्जी प्रोपेलेंट शामिल हैं. इसने रेजिमेंट को भारतीय सेना की मारक क्षमता की रीढ़ बना दिया है. स्वतंत्रता के बाद रेजिमेंट ने 1947-48 के संघर्ष, 1962 के भारत-चीन युद्ध, 1965 और 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्धों और 1999 के कारगिल युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. जहां तोपखाने की बमबारी उच्च ऊंचाई वाले पदों पर फिर से कब्जा करने में अहम थी.

इसके सफर में लैंगिक एकीकरण में एक मील का पत्थर भी शामिल है. 2023 से महिला अधिकारियों की भर्ती, जिसमें 2024 की परेड में महिलाओं ने मैकेनाइज्ड कॉलम की कमान संभाली. आज इसके इक्विपमेंट में मोर्टार, फील्ड गन, मीडियम और सेल्फ-प्रोपेल्ड आर्टिलरी, मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर और सर्विलांस रडार शामिल हैं।

भैरव लाइट कमांडो बटालियन

भैरव बटालियन इस साल गणतंत्र दिवस पर पहली बार हिस्सा लेगी. आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि भैरव बटालियन को इन्फेंट्री और स्पेशल फोर्सेज के बीच “गैप को भरने” के लिए पेश किया गया है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस बटालियन को पिछले साल अक्टूबर के आसपास आर्मी ने बनाया था. अभी इसकी दो यूनिट हैं. इसने इस साल की शुरुआत में जयपुर में आर्मी डे परेड में हिस्सा लिया था.

लद्दाख स्काउट्स टुकड़ी

लद्दाख स्काउट्स को प्यार से नन्नू कहा जाता है. इसने 1999 के कारगिल संघर्ष के दौरान राष्ट्रीय पहचान हासिल की, जिसके कारण 2000 में उन्हें एक मिलिशिया-ओरिजिन यूनिट से एक पूरी रेजिमेंट में अपग्रेड किया गया. सिर्फ पांच बटालियन के साथ यह सबसे छोटी इन्फेंट्री रेजिमेंट है लेकिन सबसे ज्यादा सम्मानित रेजिमेंट में से एक है. इसे 600 से ज्यादा सम्मान मिले हैं. रेजिमेंट को बैटल ऑनर टर्टुक (1971), बैटल ऑनर बटालिक और थिएटर ऑनर कारगिल (1999) मिला है. इसने सियाचिन, पूर्वी लद्दाख और UN शांति मिशन में सेवा दी हैं. राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने 2017 में इसकी असाधारण वीरता और समर्पण के मॉडल के रूप में प्रशंसा की थी.

भारतीय नौसेना टुकड़ी

नौसेना की 144 नाविकों की टुकड़ी भारत के अलग-अलग हिस्सों का प्रतिनिधित्व करती है. यह सेवा के एक युद्ध के लिए तैयार, एकजुट और आत्मनिर्भर समुद्री बल होने के विजन को दर्शाती है. लेफ्टिनेंट करण नाग्याल के नेतृत्व में प्लाटून कमांडर लेफ्टिनेंट पवन कुमार गांधी, लेफ्टिनेंट प्रीति कुमारी और लेफ्टिनेंट वरुण ड्रेवरिया के साथ यह टुकड़ी नौसेना की बढ़ती मानव पूंजी और राष्ट्रीय पहलों के साथ उसके तालमेल को दिखाएगी. औसत 25 साल की उम्र वाले कर्मियों को भारतीय नौसेना से सावधानी से चुना गया है और उन्होंने परेड के लिए दो महीने से अधिक की विशेष ट्रेनिंग ली है.

नौसेना की झांकी 5वीं शताब्दी ईस्वी के सिलाई वाले जहाजों से लेकर मराठा नौसेना के गुरब जहाजों तक के समुद्री इतिहास को दर्शाएगी. यह INS विक्रांत, प्रोजेक्ट 17A फ्रिगेट, कलवरी-क्लास पनडुब्बियों और GSAT-7R सैटेलाइट जैसे आधुनिक स्वदेशी प्लेटफॉर्म पर खत्म होगी. सी कैडेट्स कोर के कैडेट झांकी के साथ होंगे.

भारतीय वायु सेना दल

IAF स्क्वाड्रन लीडर जगदीश कुमार के नेतृत्व में 144 सदस्यों वाला मार्चिंग दल उतारेगी. यह दल परंपरा और आधुनिकता का मिश्रण दिखाता है और IAF के आदर्श वाक्य, ‘गौरव के साथ आसमान को छूना’ को बनाए रखने के लिए कड़ी ट्रेनिंग से गुज़रा है. अतिरिक्त अधिकारियों में स्क्वाड्रन लीडर निकिता चौधरी, फ्लाइट लेफ्टिनेंट प्रखर चंद्राकर और फ्लाइट लेफ्टिनेंट दिनेश शामिल हैं.

IAF बैंड में पहली बार नौ महिला अग्निवीरवायु सहित 72 संगीतकार शामिल हैं. यह ‘साउंड बैरियर’ धुन बजाएगा. IAF ‘संग्राम से राष्ट्र निर्माण तक’ थीम पर आधारित पूर्व सैनिकों की झांकी भी पेश करेगा. इसमें ऐतिहासिक युद्ध मशीनों और राष्ट्र निर्माण में पूर्व सैनिकों की बदलती भूमिका को दिखाया जाएगा. फ्लाईपास्ट में आठ फॉर्मेशन में 29 विमान शामिल होंगे, जिनमें राफेल, Su-30 MKI, MiG-29 और जगुआर फाइटर से लेकर C-130 और C-295

ट्रांसपोर्ट विमान शामिल हैं. मार्च पास्ट के हिस्से के तौर पर दो जिप्सी गाड़ियों पर सवार चार यूरोपियन यूनियन के झंडाबरदार परेड रूट पर हिस्सा लेंगे. इस दल की भागीदारी यूरोपियन यूनियन के नेताओं की यात्रा के साथ हो रही है. गणतंत्र दिवस परेड में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होंगे. उनकी मौजूदगी ट्रेड, टेक्नोलॉजी, क्लाइमेट एक्शन और जियोपॉलिटिकल स्थिरता के क्षेत्र में यूरोप के साथ भारत के बढ़ते जुड़ाव को दिखाती है.

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