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Women Reservation Bill Kya Hai: क्या होता है महिला आरक्षण बिल? आर्टिकल 81 में क्यों जरूरी है बदलाव, यहां जानें सब कुछ

Women Reservation Bill Kya Hai: महिला आरक्षण पहले पूरी तरह लागू नहीं हुआ था इसलिए इसे पूरी तरह लागू करने के लिए सरकार कुछ जरूरी बदलाव करने वाली है. ऐसा क्यों किया जा रहा है और महिला आरक्षण बिल क्या होता है आइए जानते हैं सबकुछ-

Women Reservation Bill Kya Hai: महिला आरक्षण को लोकसभा और विधानसभाओं में लागू करने के लिए सरकार ने 2023 में एक कानून पास किया था, लेकिन इसे पूरी तरह लागू करने के लिए कुछ जरूरी बदलाव करने बाकी हैं. इसी कारण संसद का सेशन बुलाया गया है, जिसमें जरूरी संशोधन लाकर इस प्रक्रिया को तेज किया जाएगा. मेन रूप से संविधान के कुछ अनुच्छेदों में बदलाव किए जाएंगे, ताकि महिलाओं को राजनीति में बराबरी का अवसर मिल सके. इसका उद्देश्य है कि देश की संसद और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़े और उन्हें फैसले लेने में जरूरी भूमिका मिले.

इस कानून को लागू करने के लिए संविधान के कई अनुच्छेदों में संशोधन जरूरी है. खास तौर पर अनुच्छेद 81 में बदलाव किया जाएगा, जो लोकसभा की कुल सीटों से जुड़ा है. अभी लोकसभा में अधिकतम 552 सदस्य हो सकते हैं, लेकिन नए प्रस्ताव के अनुसार इसे बढ़ाकर 850 तक किया जा सकता है. नई व्यवस्था में लगभग 815 सीटें राज्यों के लिए और 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों के लिए तय की जा सकती हैं. इसके अलावा अनुच्छेद 55, 82, 170, 330, 332 और 334A में भी बदलाव किए जाएंगे, ताकि महिला आरक्षण को सही तरीके से लागू किया जा सके.

महिला आरक्षण बिल क्या है? (What is Women Reservation Bill)

महिला आरक्षण बिल का उद्देश्य संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण देना है. ये बिल पहली बार 1996 में पेश किया गया था, लेकिन उस समय ये पास नहीं हो सका. इस बिल में ये भी प्रावधान है कि अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) की महिलाओं को भी इसी आरक्षण के अंदर हिस्सा मिलेगा. हालांकि, अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए अलग से कोई आरक्षण इसमें शामिल नहीं किया गया था.

सीटों का आरक्षण और रोटेशन व्यवस्था

महिला आरक्षण लागू होने के बाद सीटों को एक तय समय के लिए आरक्षित किया जाएगा. उदाहरण के तौर पर, यदि किसी राज्य में 120 सीटें हैं, तो लगभग 40 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी. रोटेशन प्रणाली के तहत कोई सीट लगातार कुछ चुनावों (जैसे 15 साल या 3 चुनाव) तक आरक्षित रह सकती है, उसके बाद इसे बदलकर किसी दूसरी सीट को आरक्षित किया जाएगा. इससे अलग-अलग क्षेत्रों की महिलाओं को अवसर मिलेगा.

इस व्यवस्था से महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ेगी और उन्हें नेतृत्व का मौका मिलेगा. हालांकि, सीटों के रोटेशन के कारण कुछ नेताओं को दिक्कत हो सकती है, जो लंबे समय से एक ही क्षेत्र से चुनाव जीतते आए हैं.

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