Ayatollah Ali Khamenei Family: ईरान पर इजराइल और अमेरिका के हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई, उनकी एक बेटी, दामाद, बहू और एक पोता-पोती के मारे जाने की खबर है. अब उनके परिवार में 4 बेटे, एक बेटी और उनकी पत्नी बची है.
ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमलों में खामेनेई, खामेनेई की बेटी, बहू, दामाद और एक पोता-पोती के मारे जाने की खबर है. अब उनके परिवार में 4 बेटा, एक बेटी और एक पत्नी बची है.
Ayatollah Ali Khamenei Family: ईरान पर इजराइल और अमेरिका के हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के मारे जाने की खबर है. इसके अलावा, उनके परिवार के कई सदस्यों के मारे जाने की खबर सामने आ रही है. ऐसे में आइए जानते हैं कि खामेनेई के परिवार में कौन-कौन हैं? अमेरिका और इजराइल के हमले में खामेनेई के परिवार के कितने लोगों की मौत हो चुकी है? आइए जानते हैं.
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की पुष्टि ईरान के सरकारी मीडिया Press TV ने की है. इसके अलावा, खामेनेई के मारे जाने का दावा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी किया है.
अली खामेनेई की पत्नी का नाम मंसूरा खजस्तेह बघेरज़ादेह है. अली खामेनेई के कुल छह बच्चे हैं. चार बेटे और दो बेटियां. उनके बेटे मुस्तफा खामेनेई, मोजतबा खामेनेई, मसूद खामेनेई और मेसम खामेनेई हैं. उनकी बेटियों के नाम बुशरा खामेनेई और हुदा खामेनेई बताए जाते हैं. खामेनेई का परिवार आम तौर पर पब्लिक लाइफ से दूर रहता है. उनके ज़्यादातर बच्चे धार्मिक और पढ़ाई-लिखाई के कामों में लगे रहे हैं.
कई मीडिया रिपोर्ट्स के हमाले से सामने आ रही जानकारी के मुताबिक, इजराइल और अमेरिका के हमलों में उनके परिवार के कई सदस्यों की भी जान चली गई है. बताया गया है कि एक बेटी, एक पोता और पोती, और एक दामाद भी मारे गए. कुछ दावों से पता चलता है कि हाल ही में हुए बम धमाके में एक बहू समेत परिवार के दूसरे सदस्य भी मारे गए.
ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमलों में खामेनेई की एक बेटी, एक पोता और पोती, एक दामाद और एक बहू के मारे जाने की खबर सामने आ रही है. इसके मुताबिक, खामेनेई के 4 चार, एक बेटी और खामेनेई की पत्नी अभी जिंदा हैं.
अयातुल्ला अली खामेनेई के परदादा सैयद मोहम्मद खामेनेई लखनऊ में पले-बढ़े थे. उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई वहीं की थी. लेकिन उस समय इराक का नजफ शहर धार्मिक जानकारों के लिए हायर एजुकेशन का सबसे बड़ा सेंटर माना जाता था. हायर एजुकेशन और इज्तिहाद (धार्मिक जानकारी) हासिल करने के लिए सैयद मोहम्मद लखनऊ छोड़कर इराक के नजफ चले गए. तालीम हासिल करने के बाद भारत आने के बजाय उन्होंने ईरान में ही बसने का निर्णय लिया और फिर ईरान के अजरबैजान प्रांत में स्थित खामेने नामक शहर में जाकर बस गए.
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