Bangladesh News: अंडमान सागर में 250 से ज्यादा बांग्लादेशी और रोहिंग्या को तस्करी कर एक छोटे से नाव में ढूंसकर ले जाया जा रहा था. तभी अचानक मौसम खराब होने और तेज लहरों में नाव डूब गई. जिसमें किसी तरह ने 9 लोगों ने अपनी जान बचाई. बाकी लोगों के साथ क्या हुआ उसका अबतक पता नहीं चला है.
250 बांग्लादेशी और रोहिंग्या की हो रही थी तस्करी, समुद्र में डूब गई नाव
Boat Sink in Ocean: अंडमान सागर में बहुत ही बड़ा हादसा सामने आया है. जहां अंडमान द्वीप समूह के पास पानी में मलेशिया जा रही एक नाव डूब गई. नाव पर 250 से ज्यादा बांग्लादेशी और रोहिंग्या लोग सवार थे. हालांकि जानकारी सामने आ रही है कि इस घटना के बाद 9 लोगों को बचा लिया गया है. इस पूरे मामले पर बांग्लादेशी अधिकारियों का बयान सामने आया है. जिसमें उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि अब तक 9 लोगों को बचाया गया है, जिसमें एक महिला भी शामिल है.
बताया जा रहा है कि इन लोगों को तस्करी करके ले जाया जा रहा था. बचे हुए लोगों ने इस खतरनाक सफ़र के बारे में एक दिल दहला देने वाली कहानी सुनाई है.
बांग्लादेशी अखबार द डेली स्टार के अनुसार, बांग्लादेश कोस्ट गार्ड के मीडिया अधिकारी लेफ्टिनेंट कमांडर सब्बीर आलम सुजान ने बताया कि बांग्लादेशी झंडे वाली नाव ‘MT मेघना प्राइड’ चटगांव से इंडोनेशिया जा रही थी. 9 अप्रैल की दोपहर को इस नाव ने अंडमान द्वीप समूह के पास अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र से नौ लोगों को बचाया. बचाए गए लोगों को बाद में बांग्लादेश कोस्ट गार्ड की गश्ती नाव ‘मंसूर अली’ को सौंप दिया गया.
बचे हुए लोगों ने मानव तस्करी के ऑपरेशन और अपने जानलेवा सफ़र के बारे में दिल दहला देने वाले ब्योरे साझा किए. रोहिंग्या के रहने वाले रफीकुल इस्लान न बताया कि 2 अप्रैल को उन्हें कुतुपालोंग बाज़ार में नौकरी के झूठे वादे के साथ इस योजना में फंसाया गया था. उन्हें टेक्नाफ़ के कछोपिया यूनियन के राजारछारा इलाके में एक घर में ले जाया गया, जहां उन्हें 20 से 25 अन्य लोगों के साथ बंद करके रखा गया था. इसके अलावा उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी कोई पीड़ित भागने की कोशिश करता था तो उसके साथ बहुत बुरा बर्ताव किया जाता था.
उन्होंने आगे बताया कि इलाके के कई घरों का इस्तेमाल उन लोगों को बंद करके रखने के लिए किया जा रहा था, जिनकी तस्करी की गई थी. 4 अप्रैल की रात को उन्हें राजारछारा के पास ‘मरीन ड्राइव’ से सटे समुद्र तट पर ले जाया गया और छोटी मछली पकड़ने वाली नावों में लाद दिया गया. एक समय उन्हें पास की झाड़ियों में छिपने के लिए मजबूर किया गया, क्योंकि बांग्लादेश सेना की एक गश्ती टीम उस इलाके से गुज़र रही थी.
4 अप्रैल को म्यांमार के शामिला के पास के पानी से निकलने के बाद नाव 8 अप्रैल को अंडमान द्वीप समूह के आस-पास पहुंची. समुद्र में उथल-पुथल और खराब मौसम की वजह से तस्करों ने यात्रियों को नाव के अंदर चार छोटे-छोटे हिस्सों में ठूंस दिया. ये हिस्से असल में मछलियां और मछली पकड़ने के जाल रखने के लिए बनाए गए थे. रफीकुल ने दावा किया कि दम घुटने और अत्यधिक भीड़भाड़ के कारण 25 से 30 लोगों की मौत हो गई. तस्करों ने धमकी दी थी कि अगर डेक पर मौजूद लोग कंपार्टमेंट में जाने से मना करेंगे तो वे जहाज़ को डुबो देंगे. आखिरकार विशाल लहरों की चपेट में आकर नाव पलट गई.
रफीकुल ने बताया कि उसने पानी की एक बोतल को पकड़कर अपनी जान बचाई. उसे नहीं पता कि बाकी लोगों का क्या हुआ. 9 अप्रैल को उसे आठ अन्य लोगों के साथ बचा लिया गया.
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