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Indian Tanker Jag Ladki: जंग के बीज होर्मुज स्ट्रेट से कैसे निकला 80 हजार टन तेल वाला भारतीय टैंकर? सुन भारत के दुश्मनों के उड़े होश

Indian Tanker Jag Ladki: यूएई से इम्पोर्ट किया गया लगभग 80,800 टन क्रूड ऑयल ले जा रहा यह जहाज रविवार को भारतीय समय के अनुसार सुबह करीब 10:30 बजे फुजैराह से निकला था.

 Indian Tanker Jag Ladki: वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव के बीच, भारत को एक अच्छी खबर मिली है. भारतीय झंडे वाला क्रूड ऑयल टैंकर जग लाडकी खतरनाक पानी से सुरक्षित निकल गया है और अब एक भारतीय पोर्ट की ओर जा रहा है. सरकार ने वेस्ट एशिया की स्थिति पर अपने लेटेस्ट अपडेट में यह जानकारी दी. सरकारी सूत्रों के मुताबिक, टैंकर यूनाइटेड अरब अमीरात में फुजैराह पोर्ट के पास हाई-रिस्क पानी से सुरक्षित निकल गया है.

सेंसिटिव बना हुआ है होर्मुज स्ट्रेट

यूएई से इम्पोर्ट किया गया लगभग 80,800 टन क्रूड ऑयल ले जा रहा यह जहाज रविवार को भारतीय समय के अनुसार सुबह करीब 10:30 बजे फुजैराह से निकला था. वेस्ट एशिया में बढ़ते संघर्ष ने समुद्री रास्तों पर काफी असर डाला है. होर्मुज स्ट्रेट के आसपास का इलाका खास तौर पर सेंसिटिव बना हुआ है. यह समुद्री रास्ता दुनिया के सबसे अहम तेल रास्तों में से एक है, जो अलग-अलग देशों में बड़ी मात्रा में क्रूड ऑयल पहुंचाता है.

चौथा भारतीय जहाज

चौथा भारतीय जहाज जग लाडकी का सुरक्षित निकलना भारत के लिए अहम माना जा रहा है. हाल के दिनों में यह चौथा भारतीय झंडे वाला जहाज है जो बिना किसी नुकसान के संघर्ष वाले इलाके से निकल गया है. सरकार ने यह भी बताया कि जहाज पर मौजूद सभी क्रू मेंबर सुरक्षित हैं और समुद्री एजेंसियां ​​जहाज़ के सफर पर लगातार नजर रख रही हैं.

फंसे हुए हैं 20 से ज़्यादा जहाज

पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष की वजह से कई जहाज समुद्र में फंसे हुए हैं. रिपोर्ट्स बताती हैं कि 20 से ज़्यादा भारतीय झंडे वाले जहाज़ अभी भी होर्मुज स्ट्रेट के पश्चिमी हिस्से में हैं, इन जहाजों पर सैकड़ों भारतीय नाविक काम कर रहे हैं.

सरकार इन जहाजों की सुरक्षा पक्का करने के लिए लगातार कोशिश कर रही है. कुछ जहाजों के सुरक्षित रास्ते पक्का करने के लिए भारतीय और ईरानी अधिकारियों के बीच हाई-लेवल बातचीत भी हुई है. भारत में तेल और गैस जैसी जरूरी एनर्जी सप्लाई ले जाने वाले जहाजों को खास प्राथमिकता दी जा रही है. सरकार ने यह भी कहा है कि वह इस इलाके के देशों के साथ लगातार संपर्क में है. ज़रूरत पड़ने पर तेल सप्लाई के दूसरे रास्तों का इस्तेमाल किया जा रहा है, ताकि भारत में फ्यूल सप्लाई पर असर न पड़े.

Divyanshi Singh

दिव्यांशी सिंह उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले की रहने वाली हैं। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की पढ़ाई की है और पिछले 4 सालों से ज्यादा वक्त से पत्रकारिता के क्षेत्र में हैं। जियो-पॉलिटिक्स और स्पोर्टस में काम करने का लंबा अनुभव है।

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