Iran US Peace Deal: यह प्रपोज़ल ईरान की तरफ़ से विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने पाकिस्तानी मीडिएटर्स को भेजा था. इस प्रपोज़ल में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स से भी सलाह ली गई थी. ईरान इंटरनेशनल ने हाल ही में एक रिपोर्ट पब्लिश की थी जिसमें कहा गया था कि अरागची IRGC अधिकारियों के सीधे कॉन्टैक्ट में थे.
परमाणु समझौते के लिए ईरान ने अमेरिका को भेजा आखिरी प्रस्ताव
Iran US Peace Deal: US हमले के खतरे के बीच ईरान ने US को एक डील के लिए नया प्रपोज़ल भेजा है. इस प्रपोज़ल को ईरान की तरफ़ से अहम माना जा रहा है. ईरान ने रूस, ओमान और पाकिस्तान से बातचीत के बाद US को यह प्रपोज़ल दिया. यह एग्रीमेंट प्रपोज़ल पाकिस्तान के ज़रिए US को भेजा गया था. US की तरफ़ से प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप इस प्रपोज़ल पर आखिरी फ़ैसला लेंगे.
ईरान न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक, यह प्रपोज़ल पाकिस्तानी मीडिएटर्स के ज़रिए US को भेजा गया था. प्रपोज़ल में होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह खोलने और न्यूक्लियर वेपन्स के मुद्दे पर बातचीत का सुझाव दिया गया है. इसे हाल ही में हुए एग्रीमेंट के तहत ईरान का आखिरी प्रपोज़ल माना जा रहा है.
यह प्रपोज़ल ईरान की तरफ़ से विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने पाकिस्तानी मीडिएटर्स को भेजा था. इस प्रपोज़ल में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स से भी सलाह ली गई थी. ईरान इंटरनेशनल ने हाल ही में एक रिपोर्ट पब्लिश की थी जिसमें कहा गया था कि अरागची IRGC अधिकारियों के सीधे कॉन्टैक्ट में थे.
ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के करीबी सहयोगी कौमी के मुताबिक, सुप्रीम लीडर खुद इस प्रपोज़ल की देखरेख कर रहे हैं. खामेनेई ने कहा है कि वह होर्मुज स्ट्रेट पर कोई समझौता नहीं करेंगे.
1. ईरान अपनी शर्तों पर होर्मुज स्ट्रेट को खोलना चाहता है. उसकी मांग है कि पहले होर्मुज के बाहर US की नाकाबंदी हटाई जाए. ईरान होर्मुज स्ट्रेट पर टोल वसूलने का अधिकार चाहता है. 34 किलोमीटर का होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के लिए बहुत ज़रूरी माना जाता है.
2. ईरान न्यूक्लियर डील को लेकर US के साथ बातचीत करना चाहता है. ईरान का मकसद 10 साल के लिए एनरिचमेंट को रोकना है, जबकि US कम से कम 20 साल के लिए ऐसा करना चाहता है. द गार्डियन के मुताबिक, नए प्रपोज़ल से यह साफ़ हो सकता है.
3. ईरान के प्रपोज़ल में बैन हटाने का ज़िक्र है. ईरान का कहना है कि बातचीत के शुरुआती दौर में उसे कम से कम $100 बिलियन की फंडिंग मिलनी चाहिए ताकि वह राहत और बचाव का काम कर सके.
प्रस्ताव पर सहमति बनने के बाद बातचीत शुरू होगी.
ईरान के विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता के मुताबिक, प्रस्ताव पर सहमति बनने के बाद बातचीत आगे बढ़ सकती है. ईरानी तरफ से पार्लियामेंट स्पीकर ग़ालिबफ़ बातचीत को लीड कर रहे हैं, जबकि US ने वाइस प्रेसिडेंट जेडी वेंस को यह ज़िम्मेदारी सौंपी है.
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