Julia Roberts: हाल ही में हॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री जूलिया रॉबर्ट्स ने हिंदू धर्म में अपनी रुचि के बारे में खुलकर बात की है. उन्होंने बताया कि नीम करोली बाबा की एक तस्वीर ने उन्हें प्रभावित कर दिया.
नीम करोली बाबा की एक तस्वीर ने बदली जूलिया रॉबर्ट्स की जिंदगी
Julia Roberts on Neem Karoli Baba: भारत अपनी संस्कृति और परंपराओं की वजह से जाना जाता रहा है. इस देश में कुछ ऐसे विचारक और प्रबुद्ध जन हुए, जिन्होंने लोगों को जीवन के असल मूल्य को समझाने का काम किया. उनकी सादगी, सेवा की भावना और ज्ञान ने लोगों को प्रभावित भी किया. ऐसे महान विभूतियों से सिर्फ भारत के लोग ही नहीं, बल्कि कई विदेशी भी मंत्रमुग्ध हुए. अब हॉलीवुड की एक जानी-मानी अभिनेत्री जूलिया रॉबर्ट्स ने बताया कि नीम करोली बाबा की एक साधारण सी तस्वीर ने उन्हें हिंदू धर्म की ओर झुकने के लिए प्रेरित कर दिया. इसके साथ ही उन्होंने कई और बातों का उल्लेख किया.
हाल ही में टेलीविजन शो ‘गुड मॉर्निंग अमेरिका’ से बात करते हुए अकादमी पुरस्कार विजेता और हॉलीवुड अभिनेत्री जूलिया रॉबर्ट्स ने बताया कि उनकी आध्यात्मिक जिज्ञासा कैसे शुरू हुई. उन्होंने स्पष्ट किया कि नीम करोली बाबा की तस्वीर देखने के बाद ही उन्हें हिंदू धर्म में रुचि हुई. उन्होंने बताया कि उस तस्वीर को देखते ही उन्हें एक गहरा जुड़ाव महसूस हुआ. उस समय उन्हें नीम करोली बाबा के बारे में ज्यादा जानकारी भी नहीं थी. न उनसे कभी मुलाकात हुई थी, न कोई बातचीत और न ही पहले से उनके बारे में कोई खास पढ़ाई की थी. फिर भी उन्हें एक अपनापन सा महसूस हुआ. जब जूलिया से पूछा गया कि क्या वह कभी उनसे मिली थीं, तो उन्होंने कहा कि तस्वीर देखने से काफी पहले ही उनका निधन हो चुका था. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जिंदगी में बड़े बदलाव अचानक नहीं आते, बल्कि धीरे-धीरे होते हैं और समय के साथ हमें बदलते हैं.
नीम करोली बाबी की तस्वीर से प्रभावित होने के बाद जूलिया रॉबर्ट्स ने भारत की यात्रा की. जहां कैंची धाम की यात्रा के बाद उनकी हिंदू दर्शन में रुचि और भी बढ़ गई. हालांकि, आपको बता दें कि एक्ट्रेस सार्वजनिक रूप से अपने विचार बहुत कम व्यक्त करती हैं और वह बोलने से पहले वे अच्छी तरह सोच-विचार करना पसंद करती हैं.
साल 1973 में नीम करोली बाबा का निधन हो गया था. नीम करोली बाद आधुनिक भारत के सम्मानित संतों में गिने जाते हैं. बहुत से लोग उनसे कभी मिल नहीं पाए, लेकिन उनकी शिक्षाएं आज भी लोगों को प्रेरित करती हैं. कैंची धाम में बना उनका आश्रम आज भी भक्ति और ध्यान का प्रमुख स्थान है. यहां आने वाले लोग कहते हैं कि यह जगह दिखावे से ज्यादा शांति और सुकून के लिए जानी जाती है.
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