फॉक्स न्यूज़ की रिपोर्ट है कि US नेवी का एयरक्राफ्ट कैरियर USS जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश जल्द ही अटलांटिक पार करके पूर्वी मेडिटेरेनियन की ओर बढ़ेगा.
US एयरक्राफ्ट बुश जंग में होगा शामिल
विदेश: US और ईरान के बीच जंग बढ़ती जा रही है. ईरान को US ने जितना कमजोर समझा था, यह गलत साबित हुआ है. ईरानी मिसाइलों ने US के एयरक्राफ्ट कैरियर गेराल्ड फोर्ड को निशाना बनाया है. इसे देखते हुए वह अब अपनी मिलिट्री ताकत को और मज़बूत करने की तैयारी कर रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, US वेस्ट एशिया में तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर तैनात करने की तैयारी कर रहा है. यह कदम ईरान पर दबाव बढ़ाने और इस इलाके में US की मिलिट्री मौजूदगी को मज़बूत करने के लिए उठाया जा रहा है.
फॉक्स न्यूज़ की रिपोर्ट है कि US नेवी का एयरक्राफ्ट कैरियर USS जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश जल्द ही अटलांटिक पार करके पूर्वी मेडिटेरेनियन की ओर बढ़ेगा. इससे पहले, USS गेराल्ड आर. फोर्ड पहले ही स्वेज़ कैनाल पार करके रेड सी पहुंच चुका है और वहां ऑपरेशन में हिस्सा ले रहा है.
अगर US-ईरान जंग के दौरान जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश भी खाड़ी में पहुंचता है, तो ईरान के चारों ओर तीन US एयरक्राफ्ट कैरियर तैनात किए जाएंगे. माना जा रहा है कि जरूरत पड़ने पर यह जहाज यमन के हूती विद्रोहियों के खिलाफ ऑपरेशन में भी हिस्सा ले सकता है. ऐसी संभावना है कि हूती ईरान का साथ देने के लिए खुलेआम युद्ध में शामिल हो सकते हैं. पेंटागन ने हाल ही में तस्वीरें जारी की हैं, जिनमें दिखाया गया है कि गेराल्ड आर. फोर्ड और उसका एस्कॉर्ट शिप, USS बैनब्रिज, स्वेज नहर पार करके लाल सागर में घुस गए हैं. USS जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश ने भी एक बड़ी मिलिट्री ट्रेनिंग एक्सरसाइज पूरी कर ली है और अब इसे ऑपरेशन के लिए तैयार माना जा रहा है.
इस बीच, ईरान ने दावा किया है कि उसके रिवोल्यूशनरी गार्ड ने होर्मुज स्ट्रेट के पास US एयरक्राफ्ट कैरियर USS अब्राहम लिंकन को मिसाइलों से निशाना बनाया. ईरान का कहना है कि हमले के बाद शिप और उसके साथ के वॉरशिप तुरंत इलाके से हट गए. हालांकि, US ने इन दावों को खारिज कर दिया है. US मिलिट्री का कहना है कि कोई भी ईरानी मिसाइल या ड्रोन शिप तक नहीं पहुंचा और एयरक्राफ्ट कैरियर अभी भी इलाके में काम कर रहा है.
इस जंग के बीच, US ने इज़राइल को 12,000 से ज़्यादा 1,000-पाउंड के बम बेचने की भी मंज़ूरी दे दी है. लगभग 151.8 मिलियन डॉलर की इस डील को एक इमरजेंसी फैसले के तहत मंज़ूरी दी गई. माना जा रहा है कि यह फैसला ईरान के साथ चल रहे टकराव के बीच लिया गया है.
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