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Home > विदेश > इमरान खान की पार्टी को बड़ा झटका, खैबर पख्तूनख्वा में इमरजेंसी लागू, PTI सरकार के अधिकार खत्म

इमरान खान की पार्टी को बड़ा झटका, खैबर पख्तूनख्वा में इमरजेंसी लागू, PTI सरकार के अधिकार खत्म

Emergency in Pakistan: पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने 11 अक्टूबर को खैबर पख्तूनख्वा में इमरजेंसी लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी. इस फैसले से इमरान खान की पार्टी PTI के नेतृत्व वाली प्रांतीय सरकार का नियंत्रण प्रभावी रूप से खत्म हो गया है. केंद्र सरकार ने आतंकवाद और बिगड़ती कानून-व्यवस्था को इसकी वजह बताया है, जबकि PTI ने फैसले का विरोध किया है.

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Last Updated: October 11, 2026 18:24:50 IST

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Emergency in Pakistan: पाकिस्तान में इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की केंद्र सरकार के बीच टकराव और गहरा गया है. रविवार, 11 अक्टूबर को राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में इमरजेंसी लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी. इसके साथ ही इमरान खान की पार्टी के नेतृत्व वाली प्रांतीय सरकार का नियंत्रण प्रभावी रूप से खत्म हो गया है. अब प्रांत का प्रशासन राज्यपाल के अधीन होगा. केंद्र सरकार ने इस कदम के पीछे बढ़ते आतंकी हमलों और बिगड़ती सुरक्षा व्यवस्था को वजह बताया है. वहीं, PTI ने इस फैसले को लोकतांत्रिक जनादेश पर हमला बताते हुए विरोध जताया है.

आतंकवाद से निपटने में नाकामी का आरोप

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अध्यक्षता में संघीय कैबिनेट की बैठक हुई. इसमें खैबर पख्तूनख्वा की सुरक्षा स्थिति की समीक्षा के बाद इमरजेंसी लगाने का फैसला किया गया. इसके बाद राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने प्रधानमंत्री की सलाह पर प्रस्ताव को मंजूरी दी. पाकिस्तान के संविधान के अनुच्छेद 232 और 234 के तहत यह कदम उठाया गया है. केंद्र सरकार का आरोप है कि खैबर पख्तूनख्वा की प्रांतीय सरकार आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई में पर्याप्त सहयोग नहीं कर रही थी. प्रांत में आतंकी हमलों में बढ़ोतरी और कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए संघीय सरकार ने हस्तक्षेप का फैसला किया. हालांकि, PTI इस कदम का विरोध कर रही है और इसे राजनीतिक कार्रवाई बता रही है.

इमरान खान की पार्टी के हाथ से निकली प्रांत की सत्ता

खैबर पख्तूनख्वा पाकिस्तान में PTI का मजबूत गढ़ माना जाता है. यहां इमरान खान की पार्टी की सरकार थी. इमरजेंसी और राज्यपाल शासन लागू होने के बाद प्रांतीय प्रशासन की शक्तियां केंद्र के नियंत्रण में चली गई हैं. इस व्यवस्था के तहत राज्यपाल को प्रशासनिक अधिकार दिए जाएंगे और प्रांत के कामकाज के संचालन में केंद्र की भूमिका बढ़ेगी. इस फैसले से PTI और शहबाज शरीफ सरकार के बीच पहले से जारी राजनीतिक संघर्ष और तेज होने की आशंका है. PTI ने इसे अपने लोकतांत्रिक जनादेश को कमजोर करने वाला कदम बताया है. पार्टी का कहना है कि वह इस कार्रवाई के खिलाफ आवाज उठाती रहेगी.

पेशावर में सुरक्षा बढ़ी, सड़कों पर लगाए गए कंटेनर

इमरजेंसी लागू होने के बीच खैबर पख्तूनख्वा की राजधानी पेशावर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है. प्रमुख सड़कों पर कंटेनर लगाकर रास्ते बंद किए गए हैं. पुलिस और सुरक्षा बलों को दंगा नियंत्रण उपकरणों के साथ तैनात किया गया है. कुछ मार्गों पर वाहनों की आवाजाही सीमित रखी गई है. सुरक्षा व्यवस्था सख्त किए जाने से आम लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर PTI समर्थकों का मार्च जारी है और पार्टी इस आंदोलन को इस्लामाबाद तक ले जाने की तैयारी कर रही है.

इमरान खान की रिहाई के लिए सोहेल अफरीदी के नेतृत्व में मार्च

PTI का मार्च खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी के नेतृत्व में शुरू हुआ. पार्टी के समर्थक इमरान खान की रिहाई और उनसे मुलाकात की अनुमति देने की मांग कर रहे हैं. मार्च का उद्देश्य इस्लामाबाद पहुंचकर विरोध प्रदर्शन करना है, लेकिन संघीय सरकार ने प्रदर्शनकारियों को राजधानी में प्रवेश की अनुमति देने पर सख्त रुख अपनाया है. PTI की मांग है कि इमरान खान को उनके परिवार और निजी डॉक्टरों से मिलने दिया जाए, ताकि उनकी सेहत की जांच हो सके. पार्टी ने प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए इमरान खान की बहनों और समर्थकों की रिहाई की मांग भी उठाई है. इसके अलावा पार्टी चाहती है कि इमरान के खिलाफ चल रहे मामलों की सुनवाई बिना किसी हस्तक्षेप के हो.

2023 से जेल में बंद हैं इमरान खान

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान वर्ष 2023 से जेल में बंद हैं. उनकी पार्टी लगातार उनकी रिहाई और स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग कर रही है. PTI का कहना है कि इमरान खान से मुलाकात और उनके इलाज की अनुमति मिलने से मौजूदा तनाव कम हो सकता है. दूसरी ओर, केंद्र सरकार का कहना है कि खैबर पख्तूनख्वा में सुरक्षा हालात से निपटने के लिए यह कदम जरूरी था. इमरजेंसी लागू होने के बाद अब टकराव का केंद्र केवल इमरान खान की रिहाई का आंदोलन नहीं, बल्कि प्रांतीय सरकार के अधिकार और केंद्र के हस्तक्षेप का मुद्दा भी बन गया है. आने वाले दिनों में इस फैसले को लेकर पाकिस्तान की राजनीति में तनाव और बढ़ सकता है.

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Emergency in Pakistan: पाकिस्तान में इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की केंद्र सरकार के बीच टकराव और गहरा गया है. रविवार, 11 अक्टूबर को राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में इमरजेंसी लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी. इसके साथ ही इमरान खान की पार्टी के नेतृत्व वाली प्रांतीय सरकार का नियंत्रण प्रभावी रूप से खत्म हो गया है. अब प्रांत का प्रशासन राज्यपाल के अधीन होगा. केंद्र सरकार ने इस कदम के पीछे बढ़ते आतंकी हमलों और बिगड़ती सुरक्षा व्यवस्था को वजह बताया है. वहीं, PTI ने इस फैसले को लोकतांत्रिक जनादेश पर हमला बताते हुए विरोध जताया है.

आतंकवाद से निपटने में नाकामी का आरोप

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अध्यक्षता में संघीय कैबिनेट की बैठक हुई. इसमें खैबर पख्तूनख्वा की सुरक्षा स्थिति की समीक्षा के बाद इमरजेंसी लगाने का फैसला किया गया. इसके बाद राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने प्रधानमंत्री की सलाह पर प्रस्ताव को मंजूरी दी. पाकिस्तान के संविधान के अनुच्छेद 232 और 234 के तहत यह कदम उठाया गया है. केंद्र सरकार का आरोप है कि खैबर पख्तूनख्वा की प्रांतीय सरकार आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई में पर्याप्त सहयोग नहीं कर रही थी. प्रांत में आतंकी हमलों में बढ़ोतरी और कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए संघीय सरकार ने हस्तक्षेप का फैसला किया. हालांकि, PTI इस कदम का विरोध कर रही है और इसे राजनीतिक कार्रवाई बता रही है.

इमरान खान की पार्टी के हाथ से निकली प्रांत की सत्ता

खैबर पख्तूनख्वा पाकिस्तान में PTI का मजबूत गढ़ माना जाता है. यहां इमरान खान की पार्टी की सरकार थी. इमरजेंसी और राज्यपाल शासन लागू होने के बाद प्रांतीय प्रशासन की शक्तियां केंद्र के नियंत्रण में चली गई हैं. इस व्यवस्था के तहत राज्यपाल को प्रशासनिक अधिकार दिए जाएंगे और प्रांत के कामकाज के संचालन में केंद्र की भूमिका बढ़ेगी. इस फैसले से PTI और शहबाज शरीफ सरकार के बीच पहले से जारी राजनीतिक संघर्ष और तेज होने की आशंका है. PTI ने इसे अपने लोकतांत्रिक जनादेश को कमजोर करने वाला कदम बताया है. पार्टी का कहना है कि वह इस कार्रवाई के खिलाफ आवाज उठाती रहेगी.

पेशावर में सुरक्षा बढ़ी, सड़कों पर लगाए गए कंटेनर

इमरजेंसी लागू होने के बीच खैबर पख्तूनख्वा की राजधानी पेशावर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है. प्रमुख सड़कों पर कंटेनर लगाकर रास्ते बंद किए गए हैं. पुलिस और सुरक्षा बलों को दंगा नियंत्रण उपकरणों के साथ तैनात किया गया है. कुछ मार्गों पर वाहनों की आवाजाही सीमित रखी गई है. सुरक्षा व्यवस्था सख्त किए जाने से आम लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर PTI समर्थकों का मार्च जारी है और पार्टी इस आंदोलन को इस्लामाबाद तक ले जाने की तैयारी कर रही है.

इमरान खान की रिहाई के लिए सोहेल अफरीदी के नेतृत्व में मार्च

PTI का मार्च खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी के नेतृत्व में शुरू हुआ. पार्टी के समर्थक इमरान खान की रिहाई और उनसे मुलाकात की अनुमति देने की मांग कर रहे हैं. मार्च का उद्देश्य इस्लामाबाद पहुंचकर विरोध प्रदर्शन करना है, लेकिन संघीय सरकार ने प्रदर्शनकारियों को राजधानी में प्रवेश की अनुमति देने पर सख्त रुख अपनाया है. PTI की मांग है कि इमरान खान को उनके परिवार और निजी डॉक्टरों से मिलने दिया जाए, ताकि उनकी सेहत की जांच हो सके. पार्टी ने प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए इमरान खान की बहनों और समर्थकों की रिहाई की मांग भी उठाई है. इसके अलावा पार्टी चाहती है कि इमरान के खिलाफ चल रहे मामलों की सुनवाई बिना किसी हस्तक्षेप के हो.

2023 से जेल में बंद हैं इमरान खान

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान वर्ष 2023 से जेल में बंद हैं. उनकी पार्टी लगातार उनकी रिहाई और स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग कर रही है. PTI का कहना है कि इमरान खान से मुलाकात और उनके इलाज की अनुमति मिलने से मौजूदा तनाव कम हो सकता है. दूसरी ओर, केंद्र सरकार का कहना है कि खैबर पख्तूनख्वा में सुरक्षा हालात से निपटने के लिए यह कदम जरूरी था. इमरजेंसी लागू होने के बाद अब टकराव का केंद्र केवल इमरान खान की रिहाई का आंदोलन नहीं, बल्कि प्रांतीय सरकार के अधिकार और केंद्र के हस्तक्षेप का मुद्दा भी बन गया है. आने वाले दिनों में इस फैसले को लेकर पाकिस्तान की राजनीति में तनाव और बढ़ सकता है.

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