Shankar Sharma: दिग्गज निवेशक शंकर शर्मा ने पाकिस्तान के शांति प्लान पर कड़ा प्रहार किया है. उनका मानना है कि भारत महंगाई और बाजार की गिरावट सह लेगा, पर राष्ट्रीय सम्मान से समझौता नहीं होगा. जानिए आखिर इस्लामाबाद समझौते पर क्यों छिड़ी है बड़ी बहस!
Shankar Sharma: जब देश के आर्थिक भविष्य और राष्ट्रीय अस्मिता की बात आती है, तो आंकड़ों के जादूगर भी अक्सर संवेदनशील हो उठते हैं. दिग्गज निवेशक शंकर शर्मा का हालिया बयान इसी कशमकश का उदाहरण है, जहां उन्होंने गिरते सेंसेक्स और बढ़ती महंगाई जैसी आर्थिक चुनौतियों को तो स्वीकार्य बताया है, लेकिन राष्ट्रीय सम्मान की कीमत पर किसी भी समझौते को सिरे से खारिज कर दिया है.
दरअसल, भारत के जाने-माने निवेशक शंकर शर्मा ने अपने हालिया बयान से वित्तीय बाजारों और राजनीतिक हलकों, दोनों में एक नई बहस छेड़ दी है. सोशल मीडिया पर अपने विचार व्यक्त करते हुए उन्होंने जोर देकर कहा कि जहां भारत किसी भी हद तक की आर्थिक चुनौतियों का सामना करने में सक्षम है, वहीं कुछ ऐसे मामले भी हैं जिन्हें राष्ट्रीय सम्मान की नजर से देखा जाना चाहिए। उन्होंने साफ शब्दों में लिखा, ‘मुझे पूरी उम्मीद है कि यह शांति पहल जिसकी अगुवाई पाकिस्तान कर रहा है असफल साबित होगी।’ यह बयान एक कथित प्रस्ताव के संदर्भ में दिया गया था, जिसे आजकल ‘इस्लामाबाद समझौता’ कहा जा रहा है.
अपनी पोस्ट में शंकर शर्मा ने कहा कि भारत प्रतिकूल आर्थिक स्थितियों को झेल सकता है, जैसे कि तेल की कीमतें 300 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच जाना, सेंसेक्स का 30,000 अंकों तक गिर जाना, महंगाई का 19 प्रतिशत तक बढ़ जाना, या डॉलर के मुकाबले रुपये का 130 तक कमज़ोर हो जाना. हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि देश ‘इस्लामाबाद समझौता’ जैसे किसी समझौते के नामकरण या उससे जुड़ी अपमानजनक स्थिति को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करेगा. उनके विचार में, यह महज़ एक आर्थिक मुद्दा नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा मामला है जो राष्ट्रीय भावनाओं से गहराई से जुड़ा हुआ है. फिर भी, कई जानकारों का मानना है कि शर्मा शायद व्यंग्य के तौर पर ऐसा कह रहे हैं, क्योंकि उन्होंने पहले भी पाकिस्तान के बारे में इसी तरह के व्यंग्यात्मक ट्वीट किए हैं.
शर्मा ने अपनी टिप्पणियों को सिर्फ़ भू-राजनीति तक ही सीमित नहीं रखा; उन्होंने शेयर बाज़ार के बारे में भी एक अहम बयान दिया. उनका मानना है कि भारतीय बाज़ार को इस समय और अधिक सुधार की ज़रूरत है. उन्होंने लिखा, ‘भारत की असली तेज़ी तभी शुरू होगी, जब उसे पाँच से दस साल तक चलने वाले मंदी के दौर का सामना करना पड़ेगा.’ उनका तर्क यह है कि बाज़ार में लंबे समय तक चलने वाली गिरावट लोगों को सट्टेबाज़ी और उन कंपनियों से दूर कर देगी जिनका मूल्यांकन ज़रूरत से ज़्यादा बढ़ा हुआ है. इसके बजाय यह लोगों को ठोस और वास्तविक दुनिया के व्यवसायों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित करेगी.
Lucknow Viral Video: लखनऊ के गोमती नगर स्थित Oranz Body Spa का एक वीडियो सोशल…
Diwali 2026: दिवाली के पांचों दिनों में अलग-अलग चीजें खरीदने की परंपरा है. जानिए धनतेरस…
Meerut Crime News: मेरठ में भतीजे ने भाभी को नशीला खाना खिलाकर बेहोश किया, अश्लील…
Indore Rehab Center Chaos: इंदौर के पहचान नशा मुक्ति केंद्र में युवक ने फांसी लगाकर…
Caught In CCTV : महिला से मसाज करवा रहा पति आराम से लेटा था, तभी…
Sara Ali Khan Kedarnath Controversy: सारा अली खान के केदारनाथ मंदिर में पूजा करने पर…