<
Categories: विदेश

Who is Tarique Rahman: कौन हैं तारिक रहमान? जिन्हें सुनाई गई थी मौत की सजा, अब बनने जा रहे हैं बांग्लादेश के प्रधानमंत्री

तारिक रहमान कौन हैं? जेल जाने के बाद तारिक को टॉर्चर सहना पड़ा जिससे उनकी रीढ़ की हड्डी को नुकसान पहुंचा. सितंबर 2008 में बेल पर रिहा होने के बाद वह अपनी पत्नी ज़ुबैदा और बेटी जाइमा के साथ मेडिकल ट्रीटमेंट के बहाने लंदन भाग गए.

तारिक रहमान कौन हैं? अब यह लगभग तय है कि तारिक रहमान बांग्लादेश के अगले प्रधानमंत्री बनेंगे. उन्होंने सरकार बनाने का दावा पहले ही पेश कर दिया है. यह बांग्लादेशी राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत है. बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने 12 फरवरी को हुए 13वें संसदीय चुनाव में भारी जीत हासिल की.60 साल के रहमान तीन महीने पहले ही लंदन में 17 साल के देश निकाला से लौटे हैं. शेख हसीना के समय में लगी उम्रकैद की सजा और भ्रष्टाचार के मामलों में उन्हें बरी कर दिया गया था. मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार 15 से 18 फरवरी के बीच सत्ता ट्रांसफर कर सकती है.

तारिक रहमान कौन हैं?

तारिक रहमान पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा ज़िया और पूर्व राष्ट्रपति ज़ियाउर रहमान के बेटे हैं. वह 36 सालों में देश के पहले पुरुष प्रधानमंत्री बनने वाले हैं. हालांकि उनका सफर आसान नहीं रहा है. उन्होंने पहले 17 साल का देश निकाला, जेल, टॉर्चर और राजनीतिक साजिशें झेली हैं. तारिक रहमान का जन्म 20 नवंबर 1965 को ढाका में हुआ था. उनके पिता जियाउर रहमान BNP के संस्थापक और पूर्व राष्ट्रपति थे जबकि उनकी मां खालिदा जिया तीन बार प्रधानमंत्री रहीं. हालांकि उनका दूसरा कार्यकाल कुछ ही हफ़्तों तक चला लेकिन उन्होंने दो कार्यकाल पूरे किए. उनके बेटे तारिक को बचपन से ही राजनीति में दिलचस्पी थी. तारिक 1990 के दशक में एक्टिव हुए और 1991 में अपनी मां खालिदा को प्रधानमंत्री बनवाने में अहम भूमिका निभाई.

डार्क प्रिंस

तारिक अपनी मां के तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद एक असरदार नेता बन गए. जब उनकी मां खालिदा जिया 2001 में दूसरी बार सत्ता में आईं तो तारिक पार्टी में एक असरदार नेता के तौर पर उभरे. उनका नाम ढाका के हवा भवन से जुड़ा वह जगह जहां से पार्टी के फैसले लिए जाते थे. हालांकि इस दौरान उन पर भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी और सत्ता के गलत इस्तेमाल के गंभीर आरोप लगे. विरोधी पार्टी अवामी लीग ने उन्हें डार्क प्रिंस कहना शुरू कर दिया. नतीजतन उनका राजनीतिक करियर फीका पड़ने लगा.

तारिक को देश निकाला

2006 से 2007 में बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता के कारण सेना के समर्थन वाली अंतरिम सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान शुरू किया. मार्च 2007 में तारिक को रातों-रात गिरफ्तार कर लिया गया. उनके खिलाफ 84 केस दर्ज किए गए जिनमें स्कैम से लेकर मनी लॉन्ड्रिंग और 2004 के ग्रेनेड अटैक तक शामिल थे. हालांकि BNP ने दावा किया कि ये सभी उनकी विरोधी शेख हसीना की साज़िशें थीं.

जेल में टॉर्चर

जेल जाने के बाद तारिक को टॉर्चर सहना पड़ा जिससे उनकी रीढ़ की हड्डी को नुकसान पहुंचा. सितंबर 2008 में बेल पर रिहा होने के बाद वह अपनी पत्नी ज़ुबैदा और बेटी ज़ाइमा के साथ मेडिकल ट्रीटमेंट के बहाने लंदन भाग गए. 11 सितंबर 2008 के बाद वो  देश नहीं लौटे और लंदन से BNP को लीड करते रहे. उन्होंने वीडियो कॉल के जरिए पार्टी और पार्टी वर्कर्स के साथ स्ट्रैटेजी बनाना शुरू किया.

सुनाई गई थी मौत की सजा

पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के 15 साल के राज में उन्हें एक केस में मौत की सजा भी सुनाई गई थी. हालांकि उन्होंने अपना देश निकाला जारी रखा. वह बांग्लादेश नहीं लौट रहे थे. उनके घर वापसी का सफर अगस्त 2024 में शेख हसीना के ख़िलाफ़ स्टूडेंट मूवमेंट से शुरू हुआ जिसमें प्रदर्शनकारियों ने अवामी लीग को सत्ता से हटा दिया था. फिर एक अंतरिम सरकार बनी और मुहम्मद यूनुस को उसका हेड बनाया गया. यूनुस के समय में तारिक को बड़ी राहत मिली जब कोर्ट ने उनके ख़िलाफ़ सभी पेंडिंग केस खारिज कर दिए.

25 दिसंबर को ढाका एयरपोर्ट पर लाखों सपोर्टर्स ने किया स्वागत

इसके बाद दिसंबर 2025 में उन्होंने लंदन से लौटने का ऐलान किया. 25 दिसंबर को, ढाका एयरपोर्ट पर लाखों सपोर्टर्स ने तारिक का शानदार स्वागत किया. एक तरह से, यह उनकी घर वापसी का सबसे बड़ा सेलिब्रेशन था. वह देश के उथल-पुथल भरे राजनीतिक हालात के बीच घर लौटे. तारिक के ढाका लौटने के कुछ ही दिनों में उनकी मां खालिदा जिया का निधन हो गया. 

तारिक रहमान के वादे क्या हैं?

रहमान ने डेमोक्रेटिक रेस्टोरेशन और बांग्लादेश फर्स्ट पर कैंपेन चलाया.

इंस्टीट्यूशनल सुधार

  • प्रधानमंत्री के लिए दो टर्म 10 साल की लिमिट
  • उपराष्ट्रपति पद बनाना
  • राज्य पर लोगों की मालिकी के लिए संविधान में बदलाव
  • भ्रष्टाचार के लिए ज़ीरो टॉलरेंस
  • बदले की राजनीति का अंत

आर्थिक और सामाजिक वादे

  • किसानों के लोन का ब्याज माफ
  • युवाओं के लिए 20 लाख नई नौकरियां
  • कपड़ों के अलावा आर्थिक विविधता
  • महिलाओं की मुफ्त शिक्षा
  • अल्पसंख्यकों और महिलाओं के खिलाफ हिंसा के लिए ज़ीरो टॉलरेंस

विदेश नीति

  • बराबरी और आपसी सम्मान पर भारत के साथ संबंधों को रीसेट करना
  • चीन और भारत के साथ संबंधों में संतुलन बनाना
  • SAARC को फिर से शुरू करना ASEAN की मेंबरशिप लेना
  • पाकिस्तान के साथ मेल-मिलाप जारी रखना

बांग्लादेश का जियोपॉलिटिकल स्टैंड कैसे बदलेगा?

भारत के साथ रिश्ते

नई दिल्ली 2001-2006 के BNP के सरकार को बॉर्डर पार बगावत और 2004 के चटगांव हथियारों की बरामदगी के तौर पर याद करती है भारत विरोधी मिलिटेंट्स के दस ट्रक हथियार मिले थे. रहमान अब ‘रीसेट’ की मांग कर रहे हैं. उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ लगातार सहयोग, तीस्ता जल बंटवारे के प्रस्ताव और हिंदू माइनॉरिटीज की सुरक्षा का वादा किया है. लेकिन उनका ‘बांग्लादेश फर्स्ट’ सिद्धांत हसीना के समय के लगभग पूरे स्ट्रेटेजिक तालमेल को खारिज करता है.

एनालिस्ट्स का कहना है कि भारत को एक बराबर का पार्टनर माना जाएगा न कि एक पैट्रन. एक रीजनल एक्सपर्ट ने रॉयटर्स को बताया कि ‘हसीना के राज में ढाका भारत का सबसे करीबी पड़ोसी था. रहमान के राज में ढाका एक नॉर्मल पड़ोसी होगा जब हित एक जैसे हों तो सहयोगी जब वे अलग हों तो मुखर.’

चीन के साथ रिश्ते

बांग्लादेश के पास बेल्ट एंड रोड के 6 बिलियन डॉलर के बकाया लोन हैं. रहमान से बीजिंग के साथ डिफेंस खरीद और इंफ्रास्ट्रक्चर में जुड़ाव जारी रखने की उम्मीद है. किसी प्रोजेक्ट के कैंसल होने की उम्मीद नहीं है.

पाकिस्तान के साथ मेल-मिलाप

यूनुस सरकार ने 2025 में मेल-मिलाप शुरू किया. रहमान ने संकेत दिया है कि वह जुड़ाव बनाए रखेंगे. इस्लामाबाद उनकी बढ़त को ढाका में डिप्लोमैटिक वज़न वापस पाने के मौके के तौर पर देख रहा है.

रीजनल फोरम

रहमान का मकसद सुस्त पड़े SAARC को फिर से शुरू करना और ASEAN संबंधों को गहरा करना है.किसी एक ताकत पर ज्यादा निर्भरता कम करने के तरीके हैं.

तारिक रहमान के लिए चुनौतियां

  • इकॉनमी: 475 बिलियन की इकॉनमी, डबल-डिजिट इन्फ्लेशन, 25% से ज्यादा का बैंकिंग नॉन-परफॉर्मिंग लोन रेट, चार महीने के इम्पोर्ट से भी कम का फॉरेन रिज़र्व, और कपड़ों के ऑर्डर में गिरावट.
  • पॉलिटिकल सुलह: रहमान ने अवामी लीग के नेताओं पर कोई केस न चलाने का वादा किया है. क्या वह बदला लेने की मांग कर रहे बीएनपी ग्रुप को रोक पाएंगे यह अभी तय नहीं है.
  • माइनॉरिटी का भरोसा: हिंदू, ईसाई, बौद्ध और आदिवासी समुदायआबादी का लगभग 12%ने कैंपेन के दौरान हुए हमलों के बाद कम संख्या में वोट दिया. जल्द ही सरकारी कार्रवाई की जरूरत होगी.
Divyanshi Singh

दिव्यांशी सिंह उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले की रहने वाली हैं। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की पढ़ाई की है और पिछले 4 सालों से ज्यादा वक्त से पत्रकारिता के क्षेत्र में हैं। जियो-पॉलिटिक्स और स्पोर्टस में काम करने का लंबा अनुभव है।

Recent Posts

BPCL Vacancy: अगर आपके पास है यह डिग्री, तो यहां नौकरी पाने का बढ़िया मौका, 140000 होगी महीने की सैलरी

Sarkari Naukri BPCL Recruitment 2026: भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) में नौकरी (Govt Jobs) की…

Last Updated: April 22, 2026 15:25:38 IST

Delhi Vegetable Market Price Today: टमाटर 40 तो प्याज 55 रुपये Kg, दिल्ली के बाजारों में क्या हैं सब्जी के दाम; क्या Blinkit पर मिलेंगी सस्ती?

Delhi Vegetable Market Price Today: दिल्ली की सब्ज़ी मंडी में आज के समय में सब्ज़ियों…

Last Updated: April 22, 2026 15:12:39 IST

Blue Tea: ब्लू टी क्यों हो रही है ट्रेंड? सुबह पीने से मिलते हैं ये 5 फायदे, हेल्थ के लिए है सुपरड्रिंक

Benefits of Blue Tea: ज्यादातर लोग अपने दिन की शुरुआत दूध वाली चाय या कॉफी…

Last Updated: April 22, 2026 15:01:29 IST

‘पहले टी20 टीम में आ जाओ, कप्तानी पर बाद में ध्यान देना…’ श्रेयस अय्यर पर पूर्व क्रिकेटर का कॉमेंट

Shreyas Iyer T20 captaincy: पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज जहीर खान का मानना है कि श्रेयस…

Last Updated: April 22, 2026 15:01:06 IST

Muzaffarnagar: एक घंटे तक बच्ची को ‘बंधक’ बनाए रहा बंदरिया, कैसे मोबाइल फोन ने बचाई जान

Muzaffarnagar Monkey Hostage Newborn Baby: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में एक बंदर ने बच्ची को बंधक…

Last Updated: April 22, 2026 14:47:53 IST