Indian Army Story: इरादों की ताकत से हर नाकामी को मात दी जा सकती है. ऐसे ही एक शख्स हैं, जिन्होंने साधारण सैनिक से आर्मी ऑफिसर तक का सफर तय किया है.
Indian Army Story: अगर इरादे मजबूत हों, तो बार-बार की नाकामियां भी मंज़िल तक पहुंचने से नहीं रोक पातीं. पंजाब की सैन्य परंपराओं से जुड़े परिवार में जन्मे गुरमुख सिंह (Gurmukh Singh) ने इसी सोच को सच कर दिखाया है. भारतीय सेना में एक साधारण सैनिक के रूप में करियर शुरू करने वाले गुरमुख आज देहरादून स्थित इंडियन मिलिट्री एकेडमी (IMA) से पास आउट होकर लेफ्टिनेंट बने हैं. उनकी यह उपलब्धि न सिर्फ उनके परिवार, बल्कि हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है.
33 वर्षीय गुरमुख सिंह का जन्म 6 जुलाई 1992 को पंजाब में हुआ. सेना में भर्ती होने के बाद उनका सपना हमेशा ऑफिसर की वर्दी पहनने का रहा. हालांकि यह सफर आसान नहीं था. ऑफिसर एंट्री के लिए उन्होंने लगातार प्रयास किए, लेकिन उन्हें सात बार असफलता का सामना करना पड़ा. इसके बावजूद उन्होंने हार मानने के बजाय हर नाकामी को सीख में बदला.
एक सैनिक के रूप में गुरमुख सिंह ने लद्दाख जैसे कठिन और दुर्गम इलाकों में अपनी सेवाएं दीं. सीमावर्ती इलाकों में तैनाती के दौरान पढ़ाई और तैयारी के लिए समय निकालना बेहद चुनौतीपूर्ण था. फिर भी उन्होंने अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया. सेवा के साथ-साथ उन्होंने पोस्ट ग्रेजुएशन और B.Ed की पढ़ाई पूरी की, जो उनके अनुशासन और समर्पण को दर्शाता है.
गुरमुख अपने पिता रिटायर्ड सूबेदार मेजर जसवंत सिंह को अपनी सबसे बड़ी प्रेरणा मानते हैं. उनके परिवार में सूबेदार हरबंस सिंह और प्रकाश सिंह भी देश सेवा कर चुके हैं. हर असफल प्रयास के बाद उनके पिता ने उन्हें हौसला दिया और लक्ष्य पर टिके रहने के लिए प्रेरित किया. जब IMA की पासिंग आउट परेड में माता-पिता ने बेटे को लेफ्टिनेंट की वर्दी में देखा, तो वह पल भावनाओं से भर देने वाला था.
कमीशन के बाद बातचीत में लेफ्टिनेंट गुरमुख सिंह ने युवाओं की बदलती सोच पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि आज कई युवा देश सेवा के बजाय विदेश में नौकरी को प्राथमिकता दे रहे हैं, जो चिंताजनक है. उनके अनुसार, माता-पिता को बच्चों में देशभक्ति और सेवा भाव के संस्कार डालने चाहिए.
IMA से पास आउट होने के बाद गुरमुख सिंह को आर्मी एयर डिफेंस (AAD) कोर में कमीशन मिला है. उनका मानना है कि एक सैनिक के रूप में मिला अनुभव उन्हें एक बेहतर लीडर बनाएगा. वे कहते हैं कि सैनिकों की जरूरतों को समझना और उनका नेतृत्व करना उनके लिए स्वाभाविक होगा.
लेफ्टिनेंट गुरमुख सिंह की कहानी यह साबित करती है कि अगर जुनून सच्चा हो और मेहनत लगातार हो, तो कोई भी सपना अधूरा नहीं रहता. उनकी सफलता आज हर उस युवा को प्रेरित करती है, जो मुश्किल हालात के बावजूद अपने लक्ष्य तक पहुंचना चाहता है.
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