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आपका वजन भी है 80 Kg से ज्यादा? आपकी यात्रा हो सकती है गैरकानूनी, जान लें नियम

अगर आप भी घूमने के शौकीन हैं और आपका वजह भी ज्यादा है तो आपके लिए समस्या खड़ी हो सकती है. खासतौर से अगर आपको घूमने के दौरान घोड़े, हाथी जैसे जानवरों की सवारी करना पसंद है तो आपके लिए समस्या खड़ी हो सकती है.

Animal Ride Weight Limit: अगर आप भी घूमने के शौकीन हैं और आपका वजह भी ज्यादा है तो आपके लिए समस्या खड़ी हो सकती है. खासतौर से अगर आपको घूमने के दौरान घोड़े, हाथी जैसे जानवरों की सवारी करना पसंद है तो आपके लिए समस्या खड़ी हो सकती है. 

दुनिया के कई फेमस टूरिस्ट प्लेस सैंटोरिनी से लेकर शिमला तक पर अब यह नियम बनाया जा रहा है कि घोड़े, ऊंट, गधे या ढोलू (poney/donkey) पर सवार होने के लिए आपका वजन कितना होना चाहिए, नहीं तो सवारी नहीं मिलेगी या फिर यह यात्रा गैरकानूनी भी मानी जा सकती है. ये नियम घूमने के मज़े को कम करने के लिए नहीं, बल्कि जानवरों की सेहत और उन पर होने वाली क्रूरता को रोकने के उद्देश्य से बनाए गए हैं. 

वजन सीमा क्यों ज़रूरी?

जानवरों पर उनकी क्षमता से ज्यादा वजन लादना उनकी रीढ़, जोड़ों और मांसपेशियों पर भारी दबाव डालता है. शोध बताते हैं कि घोड़े को अपने भार का लगभग 20% से ज्यादा वजन नहीं उठाना चाहिए, वरना उन्हें दर्द, चोट और लंबे समय तक चलने वाली बीमारियाँ हो सकती हैं. इसी तरह एक लगभग 160 किलो वजन वाला गधा सिर्फ करीब 50 किलो तक वजन आराम से ले जा सकता है; उससे ज्यादा होते ही उसकी सेहत पर खतरा बढ़ जाता है. ऊंट की क्षमता तो ज्यादा होती है, लेकिन वह भी एक तय सीमा के बाद लंबी दूरी तक खिंचाई नहीं झेल पाता.

अंतरराष्ट्रीय नियम

कई देशों ने इस बात पर पहले ही ध्यान दे दिया है. उदाहरण के लिए स्पेन के मिजास में गधों पर “डंकी टैक्सी” का प्रचलन है. वहां के नियम यह कहते हैं कि गधे पर 80 किलो से ज्यादा वजन वाले व्यक्ति को नहीं बैठाया जा सकता और आराम के लिए बीच‑बीच में गधे को आराम देना ज़रूरी है. इस तरह के नियम कई देशों में बढ़ते जा रहे हैं. ग्रीस के सैंटोरनी में 2018 से इसको लेकर साफ नियम है कि 100 किलो से ज्यादा वजन वाले लोग गधों की सवारी नहीं कर सकते. 

भारत में नियम

भारत में भी प्रिवेंशन ऑफ़ क्रूएल्टी टू एनिमल्स एक्ट, 1960 और ड्रॉट एंड पैक एनिमल्स रूल्स, 1965 के तहत यह तय है कि गधा अधिकतम 50 किलो, टट्टू (पोनी) 70 किलो और ऊंट 250 किलो तक वजन ही उठा सकता है. इसके साथ ही जानवरों से लगातार काम करने के घंटों पर भी रोक लगाई गई है, ताकि उन्हें आराम का पर्याप्त समय मिल सके.

पहाड़ी इलाकों में जारी हुई गाइडलाइन

हिमाचल प्रदेश में विशेषकर शिमला और आसपास के तीर्थ यात्रा वाले इलाकों में भी यह बात अब गंभीरता से ली जा रही है. अगस्त 2025 में तीर्थ यात्राओं के दौरान इस्तेमाल होने वाले जानवरों के लिए नई गाइडलाइंस जारी हुईं, जिनमें साफ तौर पर कहा गया कि गधे पर लगभग 25 किलो, टट्टू पर 50 किलो और घोड़े व खच्चर पर 80-90 किलो तक वजन लादना ही उचित और सुरक्षित माना गया है. इन गाइडलाइंस का मकसद यह है कि यात्री घूमें तो, लेकिन जानवरों पर बोझ इतना न हो कि वे दर्द में भी काम करें.

आम यात्री पर इसका असर

इन नियमों के अनुसार अगर किसी यात्री का वजन इन सीमाओं से ज्यादा हो जाता है, तो उसे कोई और ट्रांसपोर्ट विकल्प चुनना पड़ेगा. कुछ जगहों पर तो इसे “गैरकानूनी” भी मान लिया जाता है, अर्थात जानवर पर ज्यादा वजन लादकर घुमाना जानवरों के साथ क्रूरता के अपराध में आता है। ऐसे में यात्रियों को अपने साथी, बैग और जरूरत से ज्यादा भार को भी संतुलित करने की ज़िम्मेदारी लेनी पड़ेगी. 

जानवरों पर सवारी के लिए वजन‑आधारित नियम दिखाते हैं कि आने वाले समय में एनिमल वेलफेयर सेंसिटिव टूरिज्म की ओर रुख़ बनता जा रहा है. भारत और दुनिया के कई प्लेसेज पर ऐसे नियम और सख्त हो सकते हैं, जिससे कुछ यात्रियों को अपनी यात्रा की योजना फिर से बनानी पड़ेगी, लेकिन इसका असली फायदा उन जानवरों को मिलेगा, जिनकी पीठ पर कई दशकों से टूरिज्म का बोझ डाला गया है.

Shivangi Shukla

वर्तमान में शिवांगी शुक्ला इंडिया न्यूज़ के साथ कार्यरत हैं. हेल्थ, बॉलीवुड और लाइफ़स्टाइल विषयों पर लेखन में उन्हें विशेष रुचि और अनुभव है. इसके अलावा रिसर्च बेस्ड आर्टिकल और पॉलिटिकल कवरेज से जुड़े मुद्दों पर भी वे नियमित रूप से लेखन करती हैं. तथ्यपरक, सरल और पाठकों को जागरूक करने वाला कंटेंट तैयार करना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है. डिजिटल मीडिया में विश्वसनीय और प्रभावी पत्रकारिता को लेकर वे निरंतर अभ्यासरत हैं.

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Shivangi Shukla
Tags: travelling

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