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आज के समय में मानसिक प्रेशर, फिजिकल एक्टिविटी की कमी और लंबे समय तक बैठकर काम करने के वजह से कूल्हों और कमर में अकड़न होना एक भारी समस्या बन गई हैं.आइए जानते हैं कुछ योगासनों के बारे में जिनको रोजाना या हफ्ते में 4-5 दिन करने से कूल्हों की जकड़न, दर्द और भारीपन धीरे-धीरे कम होता है.
Yoga for tight hips
आजकल मानसिक दबाव,लंबे समय तक बैठकर काम करने, फिजिकल एक्टिविटी की कमी के कारण कूल्हों (हिप्स) में जकड़न एक आम समस्या बन गई है. कूल्हों की अकड़न के वजह से न केवल बैठने और चलने में परेशानी होती है, बल्कि इसके वजह से कमर दर्द और शरीर की मूवमेंट भी प्रभावित होती है.
योग एक्सपर्टस के अनुसार, योग कूल्हों की जकड़न को दूर करने का सबसे सुरक्षित और प्रभावी तरीका है. धीरे-धीरे किए जाने वाले योगासन हिप जॉइंट्स को खोलते हैं, आसपास की मांसपेशियों को स्ट्रेच करते हैं और ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाते हैं.
यहां बताए गए 16 योगासन खासतौर पर उन लोगों के लिए हैं जो शुरुआत कर रहे हैं या जिनका शरीर ज्यादा लचीला नहीं है.
यह बैठकर किया जाने वाला सबसे आसान योगासन है. इसमें रीढ़ सीधी रहती है और हिप्स पर दबाव नहीं पड़ता. नियमित अभ्यास से कूल्हे धीरे-धीरे रिलैक्स होते हैं और मन भी शांत होता है.
इस आसन में पैरों के तलवे आपस में मिलाए जाते हैं, जिससे जांघों और हिप जॉइंट्स में खिंचाव आता है. यह अकड़न कम करता है और बैठने से हुई जकड़न को खोलने में मदद करता है.
इसमें रीढ़ और पेल्विक एरिया को आगे-पीछे मूव किया जाता है. इससे कमर और कूल्हों की जमी हुई सख्ती कम होती है और शरीर में लचीलापन बढ़ता है.
बालासन शरीर को पूरी तरह रिलैक्स करने वाला आसन है. इसमें हिप्स और कमर पर हल्का स्ट्रेच आता है, जिससे तनाव और थकान से बनी जकड़न शांत होती है.
यह आसन हिप फ्लेक्सर्स के लिए बहुत फायदेमंद है. जो लोग लंबे समय तक कुर्सी पर बैठते हैं, उनके कूल्हे सख्त हो जाते हैं, उन्हें खोलने में यह आसन मदद करता है.
यह एक नेचुरल स्क्वॉट पोज है, जो कूल्हों को प्राकृतिक रूप से खोलता है. इससे हिप्स की मूवमेंट बेहतर होती है और शरीर का संतुलन भी सुधरता है.
इस आसन में आगे की ओर झुकने से हिप जॉइंट्स और पीठ को आराम मिलता है. यह शरीर को शांत करता है और जकड़न धीरे-धीरे कम करता है.
इससे बाहरी कूल्हों और हिप्स के आसपास की मांसपेशियां ढीली होती हैं. यह उन लोगों के लिए खास है जिन्हें बैठने के बाद हिप्स में दर्द या भारीपन महसूस होता है.
पीठ के बल लेटकर घुटनों को छाती की ओर लाने से हिप जॉइंट्स में ब्लड फ्लो बढ़ता है. यह अकड़न और थकान को कम करता है.
इस आसन में कूल्हे आराम से खुलते हैं और पीठ को पूरा सपोर्ट मिलता है. यह गहरी जकड़न को धीरे-धीरे रिलीज करता है और शरीर को हल्का महसूस कराता है.
यह एक रेस्टोरेटिव योगासन है. इसमें शरीर पूरी तरह सपोर्ट में रहता है और हिप्स बिना जोर लगाए खुलते हैं, जिससे गहरी रिलैक्सेशन मिलती है.
यह हिप्स खोलने के लिए बहुत असरदार आसन है. कुशन या ब्लॉक का सहारा लेने से यह सुरक्षित रहता है और धीरे-धीरे अकड़न कम करता है.
इससे अंदरूनी जांघों और कूल्हों में अच्छा स्ट्रेच आता है. हल्के रूप में करने से दर्द नहीं होता और फ्लेक्सिबिलिटी बढ़ती है.
पैर फैलाकर आगे झुकने से हिप्स, जांघें और कमर रिलैक्स होती हैं. यह संतुलन बनाए रखते हुए अकड़न कम करता है.
यह आसन कमर और कूल्हों को तुरंत राहत देता है. गैस, तनाव और जकड़न से जुड़ी परेशानी में यह काफी फायदेमंद माना जाता है.
इस आसन में पैरों को दीवार पर टिकाने से शरीर पर दबाव कम होता है. इससे हिप्स की थकान दूर होती है और ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है.
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