Iran Israel war explained: ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच छिड़ी इस जंग की असली वजह क्या है? क्या '3-H' और तेल का खेल दुनिया को तबाही की ओर ले जा रहा है? आसान भाषा में यहां समझिए पूरा मामला
युद्ध की असली वजह आसान शब्दों में यहां समझिए
ईरान-इजराइल युद्ध की असली वजह: शनिवार की रात मिडिल ईस्ट की तस्वीरों ने पूरी दुनिया की नींद उड़ा दी. आसमान से बरसते बारूद और तेहरान की दहलती गलियों के बीच एक ऐसा ‘ऑपरेशन’ हुआ, जिसने दशकों पुराने साम्राज्य की नींव हिला कर रख दी है. इजरायल और अमेरिका के ‘ऑपरेशन रोअरिंग लायन’ ने सिर्फ मिसाइलें ही नहीं दागीं, बल्कि ईरान के सबसे शक्तिशाली नेतृत्व को एक ही झटके में खत्म करने का दावा किया है. अली खामेनेई की मौत की खबरों ने इस तनाव को उस मोड़ पर ला खड़ा किया है, जहां से वापसी का रास्ता शायद अब बंद हो चुका है. आखिर ये जंग अब किस ओर मुड़ेगी? क्या हम एक बड़े विश्व युद्ध की दहलीज पर खड़े हैं? आइए, आसान भाषा में समझते हैं मिडिल ईस्ट में इस तबाही और इजरायल, अमेरिका की दुश्मनी की असली वजह. इसमें जानेंगे कि ‘3-H’ क्या है? शिया-सुन्नी का क्या मसला है, साथ ही ऑयल रूट और अमेरिका की एंट्री यहां क्यों हुई है?
इजरायल और ईरान की दुश्मनी का सबसे बड़ा कारण है ‘प्रोक्सी वॉर’. ईरान तीन गुटों को सपोर्ट करता है, जिन्हें ‘3-H’ कहा जाता है: हिजबुल्लाह (लेबनान), हमास (गाजा), और हूती (यमन). ये तीनों संगठन लगातार इजरायल के लिए सुरक्षा चुनौती बने रहते हैं. आसान शब्दों में कहें तो इजरायल का आरोप है कि ईरान कई हथियारबंद समूहों को पैसा, ट्रेनिंग और आधुनिक हथियार मुहैया कराता है और यह आतंक को बढ़ावा देते हैं. इजरायल का मानना है कि जब तक ईरान इन संगठनों को पैसा और हथियार देना बंद नहीं करेगा, तब तक इलाके में शांति मुमकिन नहीं है.
इस्लामिक दुनिया में नेतृत्व को लेकर सऊदी अरब (सुन्नी) और ईरान (शिया) के बीच दशकों से होड़ मची है. यह सिर्फ धर्म की नहीं, बल्कि राजनीतिक पावर की भी लड़ाई है. दोनों देश चाहते हैं कि पूरे मिडिल ईस्ट पर उनका प्रभाव रहे.
दुनिया का एक बड़ा तेल व्यापार समुद्र के जिस रास्ते से गुजरता है (जैसे हॉर्मुज जलडमरूमध्य), उस पर ईरान अपना दावा ठोकता है. जबकि सऊदी का कहना है कि यह मेरा है. ईरान इसे पर्शियन का नाम देता है जबकि सऊदी इसे अरबियन का नाम देता है. अगर ईरान इस रास्ते को बंद कर दे, तो पूरी दुनिया में पेट्रोल-डीजल के दाम आसमान छूने लगेंगे और यही वजह है कि अमेरिका और उसके साथी देश कभी नहीं चाहेंगे कि इस ‘लाइफलाइन’ पर ईरान का कब्जा हो.
अमेरिका का इस लड़ाई में कूदने का तीन मुख्य कारण है:
साफ है कि यह लड़ाई सिर्फ जमीन की नहीं, बल्कि धर्म, तेल, परमाणु शक्ति और रसूख की है. यदि यह युद्ध लम्बे समय तक चला, तो इसका असर सिर्फ इन देशों पर नहीं, बल्कि आपकी और हमारी जेब पर भी पड़ेगा.
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