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क्या सर्दियां होती हैं ‘रोमांस का मौसम’? क्यों कफिंग सीज़न के नाम से जानी जाती है ठंड?

सर्दियों को हमेशा से ही 'रोमांस का मौसम' (Romance Season) कहा जाता है, लेकिन इसके पीछे वैज्ञानिक वजह बेहद ही कम है. इसके साथ ही ठंड को 'कफिंग सीज़न' (Cuffing Season) भी कहा जाता है.

Winter as romantic season:  सर्दियों को हमेशा से ही ‘रोमांस का मौसम’ कहा जाता है, हांलाकि, इसके पीछे की वैज्ञानिक वजह बेहद ही कम है. इसके अलावा इस समय को रोमांस के मौसम के साथ-साथ कफिंग सीज़न भी कहा जाता है, जहां ज्यादातर सिंगल्स ठंड के महीनों के लिए एक साथ की तलाश शुरू करने में जुट जाते हैं. 

क्यों कहा जाता है कफिंग सीज़न?

इस मौसम को कफिंग सीज़न इसलिए भी कहा जाता है क्योंकि यह सीज़न अक्टूबर से लेकर फरवरी तक चलता है. जब ज्यादातर अकेले रहने वाले लोग ठंड के साथ-साथ अकेलेपन महसूस कर रहे होते हैं.  ‘कफिंग’ शब्द का मतलब होता है, ‘हाथ कड़ी डालना’ (to handcuff), यानी खुद को एक रिश्ते से बांध देना.

क्या है इसके पीछे की असली और अहम वजह?

दरअसल, ठंड की वजह से लोग अपने आप को घर के अंदर रखना पसंद करते हैं, जिससे उनका अकेलापन और भी ज्यादा बढ़ जाता है. लेकिन, सीधे तौर पर कोई रोमांस हार्मोन नहीं देखने को मिलता है. सर्दियों में विटामिन डी (Vitamin D) का स्तर तेज़ी से घटने लगता है जिसकी वजह से मूड पर नकारात्मक लगातार पड़ने लगता है, जिससे भावनात्मक सहारे की ज्यादा ज़रूरत पड़ने लगती है. 

छुट्टियों का दबाव और किसी साथ की तलाशी

ठंड में आने वाले त्योहार जैसे क्रिसमस और नए साल की छुट्टियां अकेले गुज़ारने से बचने का एक अलग तरह का दबाव डालने लगती है. तो वहीं, शरीर की गर्मी बनाए रखने के लिए ऐसे मौसम में किसी साथी के साथ रहने की इच्छा तेज़ी से जागने लगती है. यह व्यवहार ज्यादातर युवाओं में ही देखने को मिलता है. 

ऑनलाइन डेटिंग ट्रेंड्स ने बढ़ाया ज्यादा तनाव

कई ऑनलाइन डेटिंग ऐप्स और प्लेटफॉर्म्स पर ठंड के आने से नवंबर और दिसंबर के महीनों में (Activity) और मैचिंग में वृद्धि देखने को मिलती है. इससे एक बात तो ज़रूर साफ है कि सिंगल्स ज्यादातर पार्टनर की तलाश में ही होते हैं. 

क्या विज्ञान इसकी पुष्टि करता है?

जानकारी के मुताबिक, अधिकांश वैज्ञानिक इसकी पुष्टि साफ तौर पर नहीं करते हैं. यह मौसम-संबंधी सामाजिक व्यवहार पर ही निर्भर करता है. ‘रोमांस का मौसम’ पूरी तरह से मनोवैज्ञानिक, सामाजिक और सांस्कृतिक कारकों पर ही पूरी तरह से निर्भर करता है बल्कि न कि किसी हार्मोनल बदलाव. तो वहीं, दूसरी तरफ सीमित शारीरिक गतिविधि और अंधेरे के समय में वृद्धि होने से लोगों में भावनात्मक निकटता (Emotional Closeness) की ज़रूरत ज्यादा बढ़ जाती है.

Darshna Deep

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