वर्तमान में शादीशुदा जोड़ों के बीच डिवोर्स बढ़ता ही जा रहा है. वर्तमान में कपल्स के बीच 'साइलेंट डिवोर्स' का ट्रेंड तेजी से बढ़ता जा रहा है.
silent divorce
वर्तमान में शादीशुदा जोड़ों के बीच डिवोर्स बढ़ता ही जा रहा है, लेकिन बहुत सारे कपल ऐसे भी हैं जो कानूनी पचड़ों में नहीं पड़ना चाहते, लेकिन साथ भी नहीं रहना चाहते. ऐसे कपल्स के बीच ‘साइलेंट डिवोर्स’ का ट्रेंड तेजी से बढ़ता जा रहा है.
‘साइलेंट डिवोर्स’ ट्रेंड में कपल्स कानूनी रूप से शादीशुदा रहते हुए भावनात्मक रूप से अलग हो जाते हैं. एक ही छत के नीचे रहकर वे घर चलाते हैं लेकिन उनके बीच इंटिमेसी और भावनात्मक जुड़ाव खत्म हो जाता है. यह ट्रेंड कोर्ट बैटल, सोशल स्क्रूटिनी और ड्रामा से बचने का तरीका बन रहा है.
साइलेंट डिवोर्स में कपल्स एक ही घर में रहते हैं, खर्चे बांटते हैं, बच्चों की देखभाल करते हैं और लोगों के सामने परफेक्ट इमेज बनाए रखते हैं. लेकिन वे निजी तौर पर एक-दूसरे से अलग हो चुके होते हैं. वे आपस में भावनाओं को साझा नहीं करते, भविष्य की प्लानिंग बंद कर देते हैं और झगड़ों को सुलझाने की कोशिश नहीं करते. साइलेंट डिवोर्स, नार्मल डिवोर्स से मिलता जुलता है जहां भावनात्मक दूरी बढ़ जाती है लेकिन कानूनी तलाक नहीं होता.
आप किसी कपल को देखकर ये पता लगा सकते हैं कि उनके बीच साइलेंट डिवोर्स हो चुका है. ऐसे कपल्स के बीच कोई गहरी बातचीत नहीं होती, ये सिर्फ घर, पैसे, बच्चों और ऐसे ही बेहद जरूरी मुद्दों पर चर्चा करते हैं. इनके बीच किसी तरह की इमोशनल बॉन्डिंग नहीं होती. एक दूसरे के खुश रहने या नाराज रहने से इन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता. इन कपल्स के बीच किसी भी तरह की फिजिकल इंटीमेसी समाप्त हो चुकी होती है. ये सिर्फ नाममात्र के कपल होते हैं. एक घर में ही दोनों कपल अलग-अलग जिंदगी गुजारते हैं. उनके दोस्त, हॉबीज, रूटीन और कमरे सब अलग होते हैं.
लंबे तनाव, अनसुलझे झगड़े, लाइफस्टाइल में बदलाव, चीटिंग, अकेलापन, आर्थिक नुकसान, सोशल स्टेटस और बच्चों की चिंता साइलेंट डिवोर्स का मुख्य कारण हैं. सोशल मीडिया पर परफेक्ट कपल्स देखकर अपनी शादी से निराशा बढ़ती है. लोग लोनलीनेस महसूस करते हुए भी अजनबी साथी के साथ रहना पसंद करते हैं. साथ ही इससे बच्चों का पालन-पोषण करना आसान हो जाता है. इसके अलावा कपल कोर्ट के चक्कर, प्रॉपर्टी के बंटवारे इन सबसे भी बच जाते हैं. साथ ही साथ इससे उनकी पब्लिक इमेज भी बनी रहती है.
शुरुआत में तो यह एक बेटर ऑप्शन लगता है क्योंकि झगड़े, कोर्ट केस और सोशल ड्रामा से बचा जा सकता है, लेकिन लंबे समय के लिए यह स्थिति हानिकारक है. भावनात्मक अलगाव से लोनलीनेस, रिसेंटमेंट और मेंटल हेल्थ प्रॉब्लम्स बढ़ते हैं. परिवार के खराब माहौल का बच्चों पर बुरा असर पड़ता है.
कानूनी बंधन न होने की वजह से इस डिवोर्स को ख़त्म किया जा सकता है. कपल्स को चाहिए कि ईमानदार बातचीत से शुरू करें और थेरपिस्ट की मदद लें. छोटे कनेक्शन जैसे डिनर या साथ में वॉक ट्राई करें. धीरे-धीरे एक-दूसरे के पास जाने की कोशिश करें. फैसला लें: शादी बचानी है या शांतिपूर्ण कानूनी तलाक लेना है. अगर वापस साथ होना नामुमकिन लगे तो लीगल एंडिंग बेहतर है, ताकि दोनों अपनी जिंदगी में आगे बढ़ सकें.
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