Love Science: अक्सर हमारे दिमाग ये सवाल आता है कि प्यार क्यों होता है, पहली नजर का प्यार क्या होता है. इस सवाल के पीछे भी एक वैज्ञानिक रहस्य है जिसे हर कोई जानना चाहता है.
Scientific Reason of Love
पहली नजर का प्यार अक्सर फिल्मों जैसा लगता है, लेकिन असल में इसका आधार हमारे डीएनए में छिपा होता है. क्रोएशियाई जेनेटिसिस्ट तमारा ब्राउन के अनुसार, हमारे जीन में मौजूद ह्यूमन ल्यूकोसाइट एंटीजन (HLA) नामक हिस्सा यह तय करता है कि कौन-सी गंध या व्यक्तित्व हमें आकर्षक लगेगा. यानी, आपका डीएनए किसी की महक या वाइब को पहचान कर यह संकेत देता है कि यही है वो! इसलिए कभी-कभी बिना किसी कारण, किसी व्यक्ति की मौजूदगी ही दिल को भा जाती है.
प्यार महज एक एहसास नहीं, बल्कि केमिकल्स की जादुई रचना है. जब हम किसी से आकर्षित होते हैं, तब हमारे दिमाग में तीन खास केमिकल्स एक साथ सक्रिय हो जाते हैं—
1. नोराड्रेनालाइन (Noradrenaline):
यह आपको बेचैन, उत्साहित और नर्वस महसूस कराता है. दिल की धड़कनें तेज हो जाती हैं, हथेलियां पसीज जाती हैं.
2. डोपामाइन (Dopamine):
यह “फील-गुड” हार्मोन है, जो खुशी और संतुष्टि का अहसास देता है.
3. फेनएथलामिन (Phenylethylamine):
इसे “लव ड्रग” कहा जाता है. यही वह केमिकल है जो आपको हवा में उड़ने जैसा एहसास कराता है.
ये तीनों मिलकर हमारे दिमाग में एक ऐसा लव-लूप बनाते हैं, जिससे हम बार-बार उसी व्यक्ति के बारे में सोचने लगते हैं.
विज्ञान के अनुसार प्यार एक दिन में नहीं, बल्कि तीन चरणों में बढ़ता है —
1. लस्ट (कामना): यह पहला स्तर है, जिसमें पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन और महिलाओं में एस्ट्रोजेन हार्मोन सक्रिय होते हैं। यह केवल शारीरिक आकर्षण का चरण है।
2. अट्रैक्शन (आकर्षण): यहां डोपामाइन और नोराड्रेनालाइन का स्तर चरम पर होता है। व्यक्ति में वही नशे जैसा एहसास होता है, जैसे कोई लती व्यक्ति अपनी चाही चीज़ की तलाश करे।
3. अटैचमेंट (लगाव): जब रिश्ता स्थायी हो जाता है, तब ऑक्सीटॉसिन और वासोप्रेसिन हार्मोन साथ में काम करते हैं। यही लगाव हमें लंबे रिश्ते बनाने के लिए प्रेरित करता है।
हम अक्सर सुनते हैं कि विपरीत स्वभाव वाले लोग एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं. शुरुआत में यह सही लगता है कि अलग स्वभाव, अलग सोच, कुछ नया जानने का रोमांच. परंतु वैज्ञानिक अध्ययनों से पता चला है कि लंबे समय के रिश्तों में समान सोच और मूल्य ज्यादा टिकाऊ साबित होते हैं.
अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ कोलोराडो, बोल्डर की एक स्टडी के मुताबिक, 89% जोड़े उन्हीं पार्टनर्स के साथ लंबे समय तक खुश रहते हैं जिनकी सोच और जीवन-मूल्य उनसे मिलते-जुलते हैं. यानि, शुरुआती अट्रैक्शन अपोजिट्स में हो सकता है, लेकिन स्थायी रिश्ता समानताओं पर ही टिकता है.
जब रिश्ता टूटता है, तो यह केवल भावनात्मक नहीं बल्कि शारीरिक दर्द भी देता है. इस समय दिमाग में डोपामाइन और ऑक्सीटॉसिन जैसे “हैप्पी हार्मोन्स” बनना बंद हो जाते हैं. उनकी जगह तनाव पैदा करने वाले कॉर्टिसोल और एड्रेनालाइन सक्रिय हो जाते हैं.
इससे नींद कम होती है, दिल की धड़कनें बढ़ती हैं, मन उदास रहता है और कभी-कभी डिप्रेशन तक हो जाता है. यानी, टूटा हुआ दिल सिर्फ रूपक नहीं, एक असली बायोलॉजिकल प्रतिक्रिया है.
अगर आपका कोई दोस्त या करीबी ब्रेकअप से गुजर रहा है, तो उसे आपकी जरूरत है. विज्ञान कहता है कि “इमोशनल सपोर्ट” देने से शरीर में फिर से ऑक्सीटॉसिन का स्तर बढ़ता है, जो दर्द को कम करता है. इसके लिए आप उसकी मदद कुछ इस तरह कर सकते है जिसमें उसकी बात बिना टोके सुनें, उसे बाहर घूमने ले जाएं, पुराने अच्छे पलों की याद दिलाएं, सोशल मीडिया से थोड़ी दूरी बनाने को कहें और सबसे ज़रूरी उसे यह एहसास कराएं कि वो अकेला नहीं है.
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