India News (इंडिया न्यूज), Bhopal News: क्रिकेट का मैदान और संस्कृत का संगम—भोपाल के शिवाजी नगर स्थित अंकुर खेल मैदान पर कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। यहां महर्षि मैत्री मैच श्रृंखला-5 के तहत एक अनोखा क्रिकेट टूर्नामेंट आयोजित किया गया, जहां परंपराओं और आधुनिकता का अद्भुत मेल हुआ। खिलाड़ियों ने जर्सी और ट्रैक पैंट की जगह धोती-कुर्ता पहना, माथे पर तिलक और त्रिपुंड लगाए, और गले में रुद्राक्ष की माला डाले मैदान में उतरे।
खिलाड़ियों का हुआ पुष्पवर्षा से स्वागत
इस टूर्नामेंट की सबसे खास बात यह रही कि कमेंट्री संस्कृत में हुई। जैसे ही गेंद फेंकी जाती या चौका-छक्का लगता, दर्शक संस्कृत वाक्यों में उत्साहवर्धन सुनते। मैदान पर ऐसा माहौल था मानो कोई यज्ञशाला हो। हर खिलाड़ी का पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया, और खेल के दौरान संवाद में केवल संस्कृत का उपयोग हुआ।
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भगवान श्रीकृष्ण से प्रेरित आयोजन
आयोजन समिति के आचार्य वेणीप्रसाद वरिष्ठ ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण भी गेंद से जुड़े खेल खेलते थे। सदियों पुरानी इस खेल परंपरा को जीवित रखने और संस्कृत को बढ़ावा देने के लिए पिछले पांच सालों से यह टूर्नामेंट आयोजित किया जा रहा है। इस साल पूरे मध्यप्रदेश से 19 टीमों ने इसमें हिस्सा लिया है। टूर्नामेंट का पहला मैच आचार्य पाणिगृही चतुर्वेदी संस्कृत वैद पाठशाला और लक्ष्मीनारायण वैद्य विद्यालय के बच्चों के बीच हुआ। रोमांचक मुकाबले में पाणिगृही चतुर्वेदी टीम ने जीत दर्ज की।
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9 जनवरी को होगा फाइनल
महर्षि मैत्री मैच श्रृंखला का फाइनल मुकाबला 9 जनवरी को खेला जाएगा। आयोजकों का कहना है कि इस टूर्नामेंट का उद्देश्य संस्कृत को आमजन के बीच लोकप्रिय बनाना और युवाओं में अपनी सांस्कृतिक जड़ों को मजबूत करना है। भोपाल में खेला गया यह अनोखा मैच न केवल एक खेल प्रतियोगिता थी, बल्कि संस्कृत और भारतीय परंपराओं के पुनर्जीवन का उत्सव भी। दर्शकों और खिलाड़ियों के लिए यह अनुभव एक यादगार सांस्कृतिक यात्रा जैसा रहा।