UP: किसानों का आंदोलन उस कूड़ागाह के स्थानांतरण को लेकर है, जिसे 83 गांवों के मध्य स्थापित किया गया है और जहां नगर निगम द्वारा शहर का कचरा डाला जा रहा है.
श्रीकान्त त्यागी किसानों के समर्थन में मीरपुर पहुंचे
गाजियाबाद: मीरपुर, लोनी, गाज़ियाबाद (उ.प्र.) में चल रहा किसान धरना अब एक व्यापक राजनीतिक विमर्श का विषय बन चुका है. अन्नदाता किसानों के समर्थन में धरना-स्थल पर पहुंचे राष्ट्रवादी नवनिर्माण दल के संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीकान्त त्यागी ने प्रदेश सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए.
किसानों का आंदोलन उस कूड़ागाह के स्थानांतरण को लेकर है, जिसे 83 गांवों के मध्य स्थापित किया गया है और जहां नगर निगम द्वारा शहर का कचरा डाला जा रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि इससे पर्यावरण, भूजल, कृषि और जनस्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है. यह संघर्ष केवल एक स्थान परिवर्तन का नहीं, बल्कि ग्रामीण अस्मिता और समान विकास के अधिकार का प्रश्न बन गया है.
रानद सुप्रीमो श्रीकान्त त्यागी ने आरोप लगाया कि पुलिस ने परिस्थिति को षड्यंत्रपूर्वक मोड़ने का प्रयास किया. उनके अनुसार, किसानों द्वारा दी जा रही स्वैच्छिक गिरफ्तारी को स्वीकार नहीं किया गया और कथित रूप से उत्पन्न अव्यवस्था का दोष किसानों पर डाल दिया गया. उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस वाहन बिना पर्याप्त विधिक आधार के धरना स्थल पर पहुंचा, जिससे स्थिति अनावश्यक रूप से तनावपूर्ण बनी.
उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) और 19(1)(b) का उल्लेख करते हुए कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन प्रत्येक नागरिक का अधिकार है. यदि इस अधिकार को बलपूर्वक सीमित किया जाएगा, तो यह लोकतांत्रिक अधिकारों की हत्या के समान है.
श्रीकान्त त्यागी ने एक महत्वपूर्ण सामाजिक प्रश्न भी उठाया—यदि गांवों के बीच कूड़ागाह स्थापित किया जा सकता है, तो वहीं स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, स्वच्छ पेयजल और बिजली घर जैसी बुनियादी सुविधाएं क्यों नहीं स्थापित की जा सकतीं? विकास का मॉडल ऐसा क्यों है, जिसमें ग्रामीण क्षेत्र केवल शहरों का बोझ उठाने के लिए चुने जाते हैं?
इसी के साथ श्रीकान्त त्यागी ने किसानों, महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों पर हुए लाठीचार्ज की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग की. उनका कहना था कि यदि समाज और किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रदेशव्यापी आंदोलन करना पड़े, तो रानद के लाखों कार्यकर्ता इसके लिए तैयार हैं.
अंत में रानद सुप्रीमो श्रीकान्त त्यागी ने नगर आयुक्त को एक सप्ताह के भीतर कूड़ागाह संबंधी निर्णय वापस लेने की चेतावनी दी. अन्यथा, राष्ट्रवादी नवनिर्माण दल व्यापक महारैली एवं बड़े जनआंदोलन का आयोजन करेगा, जिसकी पूर्ण जिम्मेदारी प्रशासन की होगी.
मीरपुर का यह प्रकरण केवल स्थानीय प्रशासनिक निर्णय का विवाद नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत के अधिकार, सम्मान और विकास की प्राथमिकताओं पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न है. आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संवाद का मार्ग प्रशस्त होता है या टकराव की राजनीति और तीव्र होती है.
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