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यूरोप का अनोखा देश, यहां मनुष्यों से ज्यादा है सूअरों की आबादी, नाम जानकर हो जायेंगे हैरान

यूरोप महाद्वीप पर एक छोटा-सा देश ऐसा है, जहां मनुष्यों से ज्यादा सुअरों की आबादी है. हम बात कर रहे हैं डेनमार्क की. यह छोटा-सा द्वीप देश, सूअर पालन में अग्रणी है. यहां हर 100 लोगों पर 215 सूअर पाए जाते हैं.

यूरोप महाद्वीप पर एक छोटा-सा देश ऐसा है, जहां मनुष्यों से ज्यादा सुअरों की आबादी है. हम बात कर रहे हैं डेनमार्क की. इस देश में सूअरों की संख्या लगभग वहां रहने वाले मनुष्यों की तुलना में दोगुनी है.

यह छोटा-सा द्वीप देश, सूअर पालन में अग्रणी है. यहां हर 100 लोगों पर 215 सूअर पाए जाते हैं. यह आंकड़ा 2018 की यूरोस्टेट रिपोर्ट से सामने आया था. रिपोर्ट के अनुसार डेनमार्क यूरोप में सूअरों की संख्या के मामले में शीर्ष पर है. 

अधिक सूअर होने की वजह

यूरोपीय संघ (ईयू) में कुल 150 मिलियन सूअर हैं, जिनमें से 40% स्पेन और जर्मनी में पाए जाते हैं. डेनमार्क में गायों सहित अन्य पशु 89 मिलियन के करीब हैं. डेनमार्क की आबादी करीब 58 लाख है, जबकि सूअर 1.25 करोड़ से अधिक हैं. दरअसल, डेनमार्क का पिग फार्मिंग उद्योग अत्यधिक विकसित है. यहां सूअर के मांस (पोर्क) का 90% उत्पादन चीन और यूरोपीय संघ के अन्य देशों को निर्यात कर दिया जाता है, डेनिश क्राउन जैसी कंपनियां दुनिया की सबसे बड़ी पिग मीट प्रोसेसर हैं. तुलनात्मक रूप से बात करें तो 1990 में 27,300 फार्म्स से घटकर 2021 तक यहां 2,576 फार्म ही बचे हैं, लेकिन मांस का उत्पादन बढ़ा है. यहां के 90% फार्म्स में 2,000 से अधिक जानवर हैं. 

नो-हाउ प्रोजेक्ट का बड़ा योगदान

डेनमार्क में प्रति सुअर प्रति वर्ष 30.5 पिगलेट्स वीनिंग रेट है. यह सफलता ‘नो-हाउ’ (जेनेटिक्स, मैनेजमेंट) प्रोजेक्ट से आई, जिसमें उच्च वेलफेयर और पर्यावरण प्रबंधन शामिल है. बता दें कि डेनमार्क दुनिया का चौथा सबसे बड़ा पोर्क निर्यातक देश है. बेकन की मांग से पिग मीट काफी लोकप्रिय है. हालांकि सूअर पालन में चुनौतियां भी हैं. 2008 की मंदी से प्रभावित सेक्टर घाटे में हैं. 2017 में 17.3 मिलियन सूअर स्लॉटर हुए, जो 2016 की तुलना में 1 मिलियन कम हैं. इसके अलावा जंगली सूअरों से अफ्रीकी स्वाइन फीवर का भी खतरा बना रहता है. 

Shivangi Shukla

वर्तमान में शिवांगी शुक्ला इंडिया न्यूज़ के साथ कार्यरत हैं. हेल्थ, बॉलीवुड और लाइफ़स्टाइल विषयों पर लेखन में उन्हें विशेष रुचि और अनुभव है. इसके अलावा रिसर्च बेस्ड आर्टिकल और पॉलिटिकल कवरेज से जुड़े मुद्दों पर भी वे नियमित रूप से लेखन करती हैं. तथ्यपरक, सरल और पाठकों को जागरूक करने वाला कंटेंट तैयार करना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है. डिजिटल मीडिया में विश्वसनीय और प्रभावी पत्रकारिता को लेकर वे निरंतर अभ्यासरत हैं.

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