Bodi tribe Ethiopia: जहां आज की दुनिया में लोग सिक्स-पैक एब्स और साइज़ ज़ीरो फिगर के पीछे दीवाने हैं, वहीं एक रहस्यमयी जगह ऐसी भी है जहां एक बड़ा पेट मर्दानगी की असली निशानी माना जाता है. इथियोपिया के जंगलों में रहने वाली एक जनजाति के बीच किसी पुरुष का पेट जितना बड़ा होता है, उसे उतना ही अधिक सुंदर और शक्तिशाली माना जाता है. आखिर सुंदरता के इस अनोखे पैमाने के पीछे का राज क्या है? आइए, इस दिलचस्प जनजाति की कहानी में थोड़ा और गहराई से उतरते हैं.
इस जगह बड़ी तोंद वाला माना जाता है हैंडसम मैन
Bodi tribe Ethiopia: जहां आज की दुनिया में लोग सिक्स-पैक एब्स और साइज़ ज़ीरो फिगर के पीछे दीवाने हैं, वहीं एक रहस्यमयी जगह ऐसी भी है जहां एक बड़ा पेट मर्दानगी की असली निशानी माना जाता है. इथियोपिया के जंगलों में रहने वाली एक जनजाति के बीच किसी पुरुष का पेट जितना बड़ा होता है, उसे उतना ही अधिक सुंदर और शक्तिशाली माना जाता है. आखिर सुंदरता के इस अनोखे पैमाने के पीछे का राज क्या है? आइए, इस दिलचस्प जनजाति की कहानी में थोड़ा और गहराई से उतरते हैं.
इथियोपिया की ओमो घाटी में रहने वाली ‘बोडी जनजाति’ के रीति-रिवाज इतने हैरान करने वाले हैं कि आप उन्हें जानकर पूरी तरह से दंग रह जाएंगे. यहां, उभरी हुई मांसपेशियां नहीं बल्कि एक गोल और बाहर निकला हुआ पेट ही किसी पुरुष के गर्व का प्रतीक होता है. हर साल यह जनजाति ‘काएल उत्सव’ मनाती है जो असल में बड़े पेट वाले पुरुषों के लिए एक अनोखी प्रतियोगिता होती है. जनजाति की युवतियां इस उत्सव का बेसब्री से इंतज़ार करती हैं, क्योंकि इस प्रतियोगिता के विजेता को पूरे समुदाय में सबसे ज़्यादा पसंद किया जाने वाला कुंवारा पुरुष माना जाता है.
इस प्रतिष्ठित खिताब को जीतने के लिए जनजाति के पुरुष एक ऐसी दिनचर्या का पालन करते हैं जो किसी कठोर आध्यात्मिक तपस्या से कम नहीं होती. प्रतियोगिता से छह महीने पहले वे खुद को एक सुनसान झोपड़ी में सबसे अलग कर लेते हैं. इस दौरान उन्हें किसी भी तरह का ज़ोरदार शारीरिक श्रम करने की सख्त मनाही होती है. उनका खान-पान कुछ ऐसा होता है कि उसके बारे में सुनकर ही आपका पेट खराब हो सकता है. उनका पक्का मानना है कि उनके द्वारा तैयार किए गए एक खास एनर्जी ड्रिंक में कोई जादुई शक्ति होती है, जो उनके पेट को गुब्बारे की तरह फुला देती है. जानकारी के अनुसार, इनकी डाइट में गाय का खून और दूध पीना सबसे अच्छा माना जाता है. कहा जाता है कि इसकी वजह से पेट और आसपास के क्षेत्र में तेजी से चर्बी जमा हो जाती है. पुरुषों को कॉम्प्टिशन से 6 महीने पहले अलग-अलग झोंपड़ियों में रहना होता है. इस दरमियान पुरुषों को सेक्स पर पाबंदी भी होती है. सबसे मोटे आदमी को हीरो की उपाधि दी जाती है.
उत्सव के दिन ये पुरुष अपने शरीर पर राख और मिट्टी का मिश्रण मलकर नाचते हैं. जनजाति के बुज़ुर्ग हर पुरुष के पेट की गोलाई मापते हैं, और जिसका पेट सबसे ज़्यादा उभरा हुआ और बाहर निकला हुआ होता है, उसे विजेता घोषित कर दिया जाता है. इस जीत के बाद, उस पुरुष को न सिर्फ समुदाय में एक ऊंचा दर्जा मिलता है, बल्कि जनजाति की सबसे सुंदर युवतियां भी उससे शादी करने का मौका पाने के लिए आपस में होड़ लगाती हैं. यह प्रथा सदियों से चली आ रही है और आज भी इस इलाके के युवाओं के लिए एक बड़ा पेट या तोंद बनाना ही जीवन का सबसे बड़ा लक्ष्य माना जाता है.
दुनिया चाहे कितनी भी आधुनिक क्यों न हो जाए, बोडी जनजाति की ये रस्में हमें इस बात की याद दिलाती हैं कि सुंदरता का कोई एक ही पैमाना नहीं होता. जहां हम अपना वन कम करने के लिए संघर्ष करते हैं, वहीं ये लोग गर्व के साथ दुनिया के सामने अपने पेट का प्रदर्शन करते हैं. क्या यह सचमुच असाधारण नहीं है?
(डिस्क्लेमर: यह जानकारी सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट के आधार पर दी गई है. इंडिया न्यूज डॉट इन इसकी पुष्टि नहीं करता.)
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