Amazon डिलीवरी ड्राइवर का वायरल वीडियो सामने लाया कि एक “सामान्य” दिन में 300+ स्टॉप और 500 पैकेज संभालने पड़ते हैं, जिससे काम के दबाव पर बहस तेज़ हो गई है.
Online Shopping: Amazon ड्राइवर का दिन देख लोग हैरान
Online Shopping: ऑनलाइन शॉपिंग की दुनिया में तेज़ डिलीवरी अब आम बात हो चुकी है, लेकिन इसके पीछे काम करने वाले लोगों की मेहनत कितनी भारी होती है, यह हाल ही में वायरल हुए एक वीडियो ने उजागर कर दिया. Amazon के लिए काम करने वाली एक डिलीवरी ड्राइवर ने अपना “सामान्य” कामकाजी दिन दिखाते हुए एक वीडियो साझा किया, जिसने सोशल मीडिया पर बड़ी बहस छेड़ दी है.
यह वीडियो सबसे पहले TikTok पर यूज़र @abbykaddaby द्वारा पोस्ट किया गया था. वीडियो में ड्राइवर अपने दिन की शुरुआत में ही अपने रूट की जानकारी दिखाती है, जिसमें 300 से अधिक स्टॉप और 500 से ज्यादा पैकेज शामिल हैं. इसके बाद कैमरा ट्रक के अंदर की स्थिति दिखाता है, जहां हर शेल्फ पैकेजों से भरी हुई है और सामान लगभग छत तक रखा हुआ है. हालत ऐसी है कि अंदर चलने के लिए भी मुश्किल से जगह बचती है.
यह क्लिप जल्द ही X (पूर्व में ट्विटर) पर भी वायरल हो गया. एक यूज़र ने इसे शेयर करते हुए लिखा कि यह कोई असामान्य दिन नहीं बल्कि एक सामान्य रूट है. इस दावे ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्या इतनी डिलीवरी एक ही शिफ्ट में करना वास्तव में संभव है.
वीडियो के सामने आने के बाद इंटरनेट यूज़र्स दो हिस्सों में बंट गए. कुछ लोगों ने इस काम को “कुशलता” (efficiency) का उदाहरण बताया. उनका कहना है कि एडवांस्ड एल्गोरिदम के जरिए रूट इस तरह प्लान किए जाते हैं कि एक ही इलाके में अधिकतर डिलीवरी पूरी हो जाएं, जिससे काम आसान हो जाता है.
वहीं, कई लोगों ने इसे गिग इकॉनमी में बढ़ते काम के बोझ और संभावित बर्नआउट का संकेत बताया. एक यूज़र ने गणित के जरिए बताया कि अगर 400 से अधिक स्टॉप को 8 घंटे में पूरा करना हो, तो हर मिनट एक डिलीवरी करनी पड़ेगी, जो लगभग असंभव लगता है.
कुछ लोगों ने इस काम के बोझ की तुलना FedEx और UPS के ड्राइवरों से की. उनका कहना था कि इन कंपनियों के कर्मचारी भी लंबे समय से भारी वर्कलोड संभालते आ रहे हैं, लेकिन उन्हें बेहतर वेतन और संसाधन मिलते हैं.
बहस का एक बड़ा मुद्दा वेतन भी रहा. कई यूज़र्स ने दावा किया कि Amazon डिलीवरी ड्राइवरों को प्रति घंटे 1481.64 रुपये से 1944.65 रुपये के बीच भुगतान मिलता है, जबकि अन्य लॉजिस्टिक्स कंपनियों में यह आंकड़ा 2778.07 रुपये प्रति घंटे से अधिक हो सकता है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इतनी मेहनत के मुकाबले यह भुगतान उचित है?
यह वायरल वीडियो सिर्फ एक कर्मचारी के अनुभव तक सीमित नहीं है, बल्कि गिग इकॉनमी में काम करने की वास्तविकताओं को सामने लाता है. तेज़ डिलीवरी की बढ़ती मांग के बीच, काम का दबाव और कर्मचारियों की सेहत दोनों पर ध्यान देना अब पहले से ज्यादा जरूरी हो गया है.
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