कभी पढ़ाते थे इंजीनियरिंग, फिर बॉलीवुड पर किया राज; कब्रिस्तान में करते थे एक्टिंग की प्रैक्टिस, कौन हां वो?
Kader Khan: हिंदी सिनेमा में कुछ कलाकार ऐसे होते हैं, जिनकी मौजूदगी ही फिल्म को खास बना देती है. कादर खान भी उन्हीं में से एक थे. कभी खलनायक बनकर उन्होंने दर्शकों को डराया, तो कभी अपनी कॉमेडी से लोगों को हंसाकर लोटपोट कर दिया. उनके लिखे डायलॉग आज भी लोगों की जुबान पर हैं. अमिताभ बच्चन से लेकर गोविंदा तक, कई बड़े सितारों के साथ उन्होंने यादगार फिल्में दीं लेकिन क्या आप जानते हैं कि फिल्मों में नाम कमाने से पहले कादर खान इंजीनियरिंग के प्रोफेसर थे?
कब्रिस्तान में करते थे एक्टिंग की प्रैक्टिस
कादर खान को बचपन से ही अभिनय का शौक था. वह अपने आसपास के लोगों को ध्यान से देखते और फिर अकेले में उनकी नकल किया करते थे. अभिनय की प्रैक्टिस के लिए वह घर के पास स्थित एक यहूदी कब्रिस्तान में चले जाते थे. वहां वह संवाद बोलने और अलग-अलग किरदार निभाने का अभ्यास करते थे. एक दिन अभिनेता अशरफ खान की नजर उन पर पड़ी. उनकी प्रतिभा से प्रभावित होकर उन्होंने कादर खान को नाटक में काम करने का मौका दिया. यहीं से उनके अभिनय के सफर को आगे बढ़ने का रास्ता मिला.
फिल्मों में आने से पहले क्या करते थे कादर खान
कादर खान की जिंदगी का यह पहलू शायद बहुत कम लोग जानते हैं. उन्होंने सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी और मुंबई के एमएच साबू सिद्दीकी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में प्रोफेसर के तौर पर काम किया. वह छात्रों को तकनीकी विषय पढ़ाते थे. एक तरफ वह क्लासरूम में इंजीनियरिंग की बारीकियां समझाते थे, तो दूसरी तरफ थिएटर के जरिए अपने अभिनय और लेखन के हुनर को निखार रहे थे.
पहली फिल्म के लिए मिले सिर्फ 1,500 रुपये
कादर खान को फिल्मों में पहचान सबसे पहले अपने लेखन से मिली. उनके नाटक और संवाद लिखने की कला ने फिल्मकारों का ध्यान खींचा. उन्हें फिल्म जवानी दीवानी के डायलॉग लिखने का मौका मिला, जिसके लिए उन्हें 1,500 रुपये मिले. इसके बाद उनकी फीस में तेजी से इजाफा हुआ. फिल्म खेल-खेल में के लिए उन्हें 21,000 रुपये मिले. वहीं रोटी फिल्म के लिए करीब 1.21 लाख रुपये मिलने की बात उन्होंने एक इंटरव्यू में बताई थी.
मनमोहन देसाई ने दिया था खास तोहफा
कादर खान की लेखन प्रतिभा से फिल्म निर्देशक मनमोहन देसाई भी काफी प्रभावित थे. दोनों ने रोटी, अमर अकबर एंथनी और कुली जैसी फिल्मों में साथ काम किया. कादर खान ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उनके लिखे संवादों से खुश होकर मनमोहन देसाई ने उन्हें पोर्टेबल ब्लैक एंड व्हाइट टेलीविजन और सोने का कंगन तोहफे में दिया था.
अमिताभ से गोविंदा तक के लिखे डायलॉग
कादर खान की सबसे बड़ी खासियत थी कि वह अभिनय के साथ-साथ लेखन में भी माहिर थे. उन्होंने अमिताभ बच्चन की मुकद्दर का सिकंदर, लावारिस, शराबी, सत्ते पे सत्ता और अग्निपथ जैसी फिल्मों के लिए डायलॉग लिखे. उनके लिखे डायलॉग किरदारों को अलग पहचान देते थे.
गोविंदा के साथ जोड़ी रही हिट
वहीं, 90 के दशक में गोविंदा के साथ उनकी जोड़ी ने कॉमेडी फिल्मों में खूब धमाल मचाया. कुली नंबर 1, हीरो नंबर 1 , दूल्हे राजा और आंखें जैसी फिल्मों में उनकी कॉमिक टाइमिंग और डायलॉग ने दर्शकों को खूब हंसाया.