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हीरो बनने की चाह नहीं थी, फिर भी एक्टिंग की दुनिया में छा गए के.के. मेनन? नौकरी से थिएटर और फिर फिल्में…

KK Menon: बॉलीवुड में कुछ कलाकार ऐसे होते हैं, जिन्हें देखकर लगता है कि एक्टिंग तो उनके खून में है लेकिन के.के. मेनन की कहानी थोड़ी अलग है. आज वह अपनी दमदार अदाकारी के लिए पहचाने जाते हैं लेकिन एक वक्त ऐसा भी था जब उनका फिल्मों में आने का कोई सीधा प्लान नहीं था. पढ़ाई पूरी की, एमबीए किया और नौकरी की दुनिया में कदम रखा. फिर एक दिन उन्हें एहसास हुआ कि जिस काम में वह हैं, उसमें उनका मन नहीं लग रहा. यहीं से शुरू हुआ वह सफर, जिसने आगे चलकर उन्हें हिंदी सिनेमा के अलग पहचान रखने वाले एक्टर्स में शामिल कर दिया.

Last Updated: October 2, 2026 | 3:00 PM IST
job after the MBA and then theatre - Photo Gallery
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MBA के बाद नौकरी और फिर थिएटर

के.के. मेनन ने फिजिक्स में ग्रेजुएशन के बाद एमबीए किया. इसके बाद उन्होंने विज्ञापन और कॉर्पोरेट फिल्ममेकिंग के क्षेत्र में काम किया. हालांकि नौकरी के दौरान उन्हें लगातार महसूस हुआ कि वह अपने अंदर की रचनात्मकता को पूरी तरह इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं. एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि वह ब्रांड्स के लिए काम कर रहे थे लेकिन उन्हें लगा कि वह अपनी भावनाओं को किसी 'कोक की बोतल' में बंद नहीं कर सकते.

Opportunity gained through theatre - Photo Gallery
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थिएटर से मिला मौका

उन्हें इंसानों से जुड़ना था और थिएटर उन्हें यही मौका देता था. इसके बाद उन्होंने थिएटर को गंभीरता से अपनाया. दिलचस्प बात यह है कि एक्टिंग उनके लिए बिल्कुल नई भी नहीं थी. उन्होंने बताया था कि स्कूल के दिनों में ही वह एक नाटक में सूरजमुखी का किरदार निभा चुके थे.

life partner found during struggle days - Photo Gallery
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जब संघर्ष के दिनों में मिली जीवनसाथी

थिएटर ने सिर्फ के.के. मेनन को एक्टर बनने का रास्ता नहीं दिखाया बल्कि यहीं उनकी मुलाकात एक्ट्रेस निवेदिता भट्टाचार्य से भी हुई. दोनों एक ही थिएटर सर्कल में काम करते थे. रिहर्सल और साथ काम करने के दौरान दोस्ती बढ़ी और धीरे-धीरे यह रिश्ता प्यार में बदल गया. उस समय दोनों के करियर की शुरुआत थी और काम की तलाश के साथ संघर्ष भी चल रहा था. बाद में दोनों ने शादी करने का फैसला किया. इस रिश्ते की खास बात यह रही कि दोनों ने अपनी शादी को लंबे समय तक लाइमलाइट से दूर रखा. निवेदिता ने बताया था कि वे नहीं चाहते थे कि लोग उन्हें सिर्फ एक कपल के रूप में देखें बल्कि वे काम के जरिए अपनी पहचान बनाएं.

Struggling Days - Photo Gallery
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फिल्मों में आए तो आसान नहीं था रास्ता

थिएटर के बाद के.के. मेनन ने टेलीविजन का रुख किया और फिर फिल्मों में पहुंचे. इस दौरान उन्होंने काफी संघर्ष किया. 1995 की 'नसीम' से उनका फिल्मी सफर शुरू हुआ. शुरुआती दौर में उन्हें तुरंत वह पहचान नहीं मिली जिसकी शायद एक अभिनेता को उम्मीद होती है. फिर हजारों ख्वाहिशें ऐसी, ब्लैक फ्राइडे, सरकार, कॉरपोरेट और शौर्य जैसी फिल्मों ने उनकी एक्टिंग से अलग पहचान बनाई.

stardom and controversies - Photo Gallery
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स्टारडम और विवादों से हमेशा अलग रहा अंदाज

के.के. मेनन ने हमेशा 'स्टार' कहलाने से ज्यादा खुद को एक्टर मानने पर जोर दिया. उनका कहना रहा है कि स्टारडम और अभिनय दो अलग चीजें हैं. वह ग्लैमर या लगातार सुर्खियों में रहने के बजाय किरदारों के जरिए पहचान बनाना पसंद करते हैं. उनके बेबाक बयानों ने भी कई बार चर्चा पैदा की. उन्होंने बॉलीवुड की मार्केटिंग और फिल्मों की पैकेजिंग पर खुलकर सवाल उठाए.

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