गीता बाली से गुपचुप शादी, मधुबाला को देखकर भूल जाते थे डायलॉग, लगातार फ्लॉप हुईं फिल्मों के बाद ऐसे रॉकस्टार बने शम्मी कपूर
Shammi Kapoor: हिंदी सिनेमा में कुछ सितारे ऐसे होते हैं, जो अपनी अदाकारी के साथ-साथ अपने अंदाज से भी लोगों के दिलों पर राज करते हैं. शम्मी कपूर भी ऐसे ही अभिनेता थे. कभी फिल्मों में लगातार मिल रही असफलताओं ने उन्हें परेशान किया, तो कभी उनकी प्रेम कहानी ने खूब सुर्खियां बटोरीं. पर्दे पर उछलते-कूदते और अलग अंदाज में डांस करते शम्मी कपूर ने एक समय ऐसा भी देखा, जब उन्हें अपनी पहचान बनाने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा.
जब लिपस्टिक से भरवाई मांग
शम्मी कपूर की मुलाकात अभिनेत्री गीता बाली से 1955 में फिल्म की शूटिंग के दौरान हुई थी. दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और बात शादी तक पहुंच गई. दिलचस्प बात यह है कि गीता ने शादी के लिए उसी दिन का समय तय कर दिया. दोनों ने परिवार को पहले बताए बिना मुंबई में सुबह करीब चार बजे शादी कर ली. शादी के दौरान गीता ने अपने पर्स से लिपस्टिक निकाली और शम्मी से अपनी मांग भरने को कहा. यह अनोखा किस्सा उनकी प्रेम कहानी की सबसे यादगार बातों में शामिल हो गया.
फ्लॉप फिल्मों ने बदल दिया अंदाज
शुरुआती दौर में शम्मी कपूर की कई फिल्में नहीं चलीं. इसके बाद उन्होंने अपनी छवि बदलने का फैसला किया. 1957 में रिलीज हुई फिल्म तुमसा नहीं देखा में उनका नया अंदाज सामने आया. फिर जंगली ने उन्हें दर्शकों के बीच बड़ी पहचान दिलाई. उनका चुलबुला अंदाज और ऊर्जा से भरपूर अभिनय उनकी खास पहचान बन गया.
डांस की ट्रेनिंग छोड़ी
शम्मी कपूर का डांस बाकी अभिनेताओं से काफी अलग था. उन्होंने टैंगो सीखने के लिए डांस स्कूल में दाखिला लिया लेकिन उन्हें लगा कि वह खास कुछ नहीं सीख पाए. बाद में उन्होंने अपनी स्वाभाविक ऊर्जा और गानों के मुताबिक चेहरे के भावों से ऐसा अंदाज बनाया, जिसे दर्शकों ने खूब पसंद किया.
मधुबाला के सामने भूल जाते थे डायलॉग
फिल्म रेल का डिब्बा की शूटिंग के दौरान शम्मी कपूर मधुबाला की खूबसूरती से इतने प्रभावित हो जाते थे कि अपने डायलॉग भूल जाते थे. मधुबाला उस समय बड़ी स्टार थीं. वहीं शम्मी अपने करियर की शुरुआत कर रहे थे. बताया जाता है कि डायलॉग भूलने पर मधुबाला उनकी मदद भी करती थीं. इतना ही नहीं
शम्मी कपूर के कई लोकप्रिय गानों को मोहम्मद रफी ने आवाज दी. रफी की गायकी और शम्मी के पर्दे पर दिखाए गए भावों का तालमेल दर्शकों को खूब भाता था. शम्मी उन्हें अपनी असली आवाज मानते थे.
गीता बाली को खोने का गम
1965 में गीता बाली के निधन ने शम्मी कपूर को गहरा सदमा दिया. उस समय वह तीसरी मंजिल की शूटिंग कर रहे थे. निजी जिंदगी के इस मुश्किल दौर में भी उन्हें फिल्म का काम जारी रखना पड़ा. गीता की यादें उनके जीवन का भावुक हिस्सा बनी रहीं.
शुरुआती दौर में बने टेक्नोलॉजी के दीवाने
शम्मी कपूर को कंप्यूटर और इंटरनेट में भी काफी दिलचस्पी थी. जब इंटरनेट आम लोगों के बीच लोकप्रिय नहीं हुआ था, तब भी वह इसका इस्तेमाल करते थे. उनकी अपनी वेबसाइट थी और वह ऑनलाइन लोगों से संपर्क रखते थे. इंटरनेट के जरिए उन्हें पाकिस्तान में रहने वाले एक पुराने दोस्त का ईमेल भी मिला, जिससे करीब 50 साल से उनका संपर्क नहीं था.